सन् 2022 में कन्या राशि का वार्षिक राशिफल जानें, पं. मनोज कृष्ण शास्त्री से

।।सन् 2022 में कन्या राशि का वार्षिक राशिफल।।

कन्या VIRGO
(टो, प, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
शुभरंग– हरा,
शुभ अंक– 3 व 8,
शुभरत्न– पन्ना,
शुभदिन– बुधवार,
ईष्ट– गणेश
शुभ कार्य– गणेश अथर्वशीर्ष और चालीसा का पाठ व बुधवार का व्रत कार्यसिद्ध करेगा,
शुभमास– वैशाख व ज्येष्ठ,
मध्यममास– आषाढ़ कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ व फाल्गुन,
अशुभमास– चैत्र, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन।

कन्या राशि का स्वामी बुध है। ये द्विस्वभाव रहता है। व्यावहारिक दृष्टि से किसी भी कार्य, बात की गुप्ता रख पाना संभव नहीं होता। उसी से जीवन में समस्याएं बनती- बढ़ती हैं स्थायित्व की कमी व चंचलता की कमी दोनों ही समान रह पाते हैं। आपके विचार, निर्णयों, गंभीरता का चेहरे पर असर तत्काल होता है, जिससे अन्य लोग आपके मन-विचारों को समझ जाते हैं। अधिकतर मामलों में आत्मविश्वास, मानसिक, वैचारिक कार्यकुशलता, स्थिति अनुरूप प्रयास, परिश्रम करते हैं जिसका संतोष रहता है। अपनी जवाबदारी, कर्तव्यबोध रहता है फिर भी आशातीत परिणामों में विलंब होता है।

व्यर्थ के मामलों में कई बात अडिग या हठधर्मिता पकड़ लेते हैं। जिस कारण लोग, परिवार को धारणा गलत हो जाती है। सहयोग, प्रेम, स्नेह की दूसरों की तरफ से कमी ही रहती है। पारिवारिक कर्तव्य, जवाबदारी में कमी नहीं रखते। स्वयं की इच्छा, ताकत, अनुभव से निर्वहन करते हैं। बुद्धि-ज्ञान विकास भी बराबर करते हैं। व्यस्तता में भी चिंतन-मनन, एकाग्रता रखते हैं। सामान्य से अधिक वैचारिक, मानसिक साहस आप में रहता है। भगवत-ध्यान, ज्ञानार्जन, सत्संग से भी अपने को जोड़कर आगे लाते हैं। कुदरती-नैसर्गिक अवस्थाओं को भी महत्व देते हैं।

कन्या राशि वालों के संपर्क में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति यही समझता है कि उन्हें केवल उसी में सर्वाधिक रुचि है। कन्या राशि का व्यक्ति अत्यन्त रहस्यमय होता है। कन्या राशि वाले लोग बातें बनाने में कुशल तथा विनोद – प्रिय होते हैं। भूमि तत्व से संबंधित यह राशि सेवा, स्वास्थ्य एवं व्यवसाय आदि से संबंध रखती है। इस राशि के लोग अपनी निश्चित योजना की पूर्ति एवं कार्य करने में सफल रहते हैं। कन्या राशि वाले अपने विचार आदि के बारे में लोगों को विशिष्ट ढंग से परिचित कराते हैं। वह किसी के साथ स्थायी रूप से वचनबद्ध नहीं होते। दयालुता का व्यवहार उन्हें आकर्षित करता है। कन्या राशि का स्वामी बुध है। कन्या राशि के व्यक्ति आलोचक तथा विश्लेषक प्रकृति के होते हैं। उनकी आलोचना रचनात्मक न होकर, नाटकीय होती है। कन्या राशि वाले निरंतर क्रियाशील बने रहते हैं। पूर्णता प्राप्त करने का प्रयत्न करते रहते हैं।

कन्या राशि का पुरुष स्वयं को योग्य समझने वाला, प्राप्त धन का श्रम द्वारा मूल्य चुकाने वाला, अपने स्तर को बनाए रखने वाला तथा धोखेबाजी से घृणा करने वाला होता है। और सदा अच्छा व्यवहार पसंद करता है। कन्या राशि वाले जातकों में मानसिक गतिशीलता अधिक मिलती है। इनके व्यक्तित्व के दो पक्ष होते हैं। एक वाहक, दूसरा प्रश्न एवं संदेहकर्ता आंतरिक व्यक्तित्व। कन्या राशि वाले व्यक्ति हर काम मनमाने ढंग से करते हैं, इसीलिए कभी-कभी आलसी या उत्साह रहित भी दिखाई देते हैं। विशेषतः इन्हें अच्छे या बुरे संस्कारों का प्रभाव शीघ्र ही होता देखा जाता है। इन लोगों को स्वाभिमान काफी रहता है। ये किसी ज्ञानी व्यक्ति से गुरु मंत्र भी प्राप्त कर लेते हैं। निश्चय के पक्के होते हैं। जो बात एक बार इनके मन में स्थानपा लेती है, तो उसे पूर्ण किए बिना नहीं छोड़ते हैं।

इनमें प्रसिद्धि पाने की गुप्त इच्छा भी पाई जाती है। ये सम्मान तथा उच्च पद को भी पाना चाहते हैं। कन्या राशि के पुरुष प्रतिदान के इच्छुक होते हैं। वे त्याग के बदले त्याग ही चाहते हैं। बच्चों में रुचि वाले, अपने रहस्य को गुप्त रखने वाले तथा कुछ कामुक प्रकृति के होते हैं। इन लोगों का जीवन भीतर-बाहर से भिन्न होता है। यश की कामना, परिचित होने की इच्छा, सदैव आकर्षक मित्रों से घिरे रहने की अभिलाषा तथा कुछ अद्भुत कर दिखाने की लालसा इनमें हमेशा पाई जाती है। ये व्यावहारिक, ईमानदार, निष्पक्ष तथा कुछ शर्मीली प्रकृति के होते हैं। अपने में विश्वास रखने वाली स्त्री की ओर इनका आकर्षण होता है। इन्हें उन्मुक्त प्रेम अच्छा लगता है। कन्या राशि वाले मिलनसार तथा सेवाभावी होते हैं।

उनके जीवन में आदतों का भारी महत्व होता है। आदतों से मुक्त हो पाना उनके लिए कठिन हो जाता है। इन्हें निष्क्रियता एवं बिना उद्देश्य भावुकता पसंद नहीं होती। प्रारंभिक आयु में उनका झुकाव नैतिकतावाद की ओर होता है। बाद में वह अपनी इस प्रवृत्ति पर काबू पा लेते हैं। कन्या राशि के लोग अच्छी स्मरण शक्ति वाले होते हैं। ये वस्तुओं के बाहरी रूप-रंग से प्रभावित होकर निर्णय लेते हैं। कन्या राशि वाले स्वच्छता पसंद, सुरुचि वाले तथा रीतियों को मानने वाले होते हैं। बहुसंख्यक व्यवहार को अपनाने में इन्हें कोई विरोध नहीं होता। वह नियमों का पालन सहज रूप से करते हैं। कर्तव्य उनके लिए सर्वोच्च स्थान रखता है। कन्या राशि के लोग सौदेबाजी को पसंद करते हैं।

इस वर्ष का गोचर ग्रह न्यास तथा दिनमान पथ का प्रतिफल विगत वर्ष अपेक्षा कुछ सुधारक ही बना है। जन-जीवन में अभिनव चेतना तथा कार्य-व्यवसाय-लाभ आमद आर्थिक पक्ष एवमेव मांगलिक शुभ कार्य संरचना का प्रारूप भी बन पावें। पुण्योदय, कर्मोदय, भाग्योदय हेतु उत्तरोत्तर क्रमिक सुधारक स्थिति सुयोग वृद्धि 60 प्रतिशत तो कुयोग का प्रभाव 40 प्रतिशत का है, इसी अनुपात से जन-जीवनीय प्रति क्षेत्र में फलाशय बन पावें। कुयोगदवश मनोविकार, मानसिक तनाव, कार्य प्रभार, श्रम साधना विशेषकर तथा स्त्री सुख-दाम्पत्य पक्ष, सन्तान विषयक विकार, असन्तोष की विभावना बनें। यश सुख-सम्पदा मानद जन-जीवन में मनोनीत, सफलता में न्यूनता सुयोगवश नवीन कार्य योजना विकास हेतु नव सम्पर्क तथा मित्र, बान्धव, सहयोगी वर्ग से विगत समय अपेक्षा राहत का अनुभव बनें। लाभ आमदनी का मार्ग ठीक रहे, परन्तु श्रम साधना विशेष से प्रतिफल बनें। प्रगति उत्थान विकास हेतु अवसर प्राप्त होवें। विगत वर्ष अपेक्षा यह वर्ष क्रमिक रूप से सुधारक ही रहे।

इस वर्ष 12 अप्रेल से आठवां राहु अशुभ फलदायक है। ऐहिक सुख में विघ्न उत्पन्न होंगे। धन हानि या अधिक व्यय के कारण आर्थिक संकट, मानसिक अशांति संभव है। दुर्घटना भय, शारीरिक कष्ट, रोग के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है। विजातीय मृतात्मा का अशुभ प्रभाव संभव है। 13 अप्रेल से स्वराशि में सप्तम गुरु शुभफलदायक है। बुद्धि-विवेक के सदुपयोग से आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। अच्छे उद्देश्य से किये गये कार्य सफल होंगे। स्त्री सुख, निजीजनों तथा मित्रों का सहयोग मिलेगा। धार्मिक प्रवचन-कथा, सत्संग आदि में रूचि बढ़ेगी। वर्ष में 29 अप्रेल से छठे स्थान में शनि ताम्रपाद से गतिशील होगा। फलतः शत्रुओं पर विजय, भूमि-मकान आदि का लाभ तथा धन-सम्पदा में वृद्धि होगी। पारिवारिक सुख-सहयोग मिलेगा।

शनि 4 जून से वक्री होकर 12 जुलाई से पुनः पांचवें स्थान में लोहपाद से गतिशील होगा। फलतः धन और सुख में कमी, दाम्पत्य जीवन में असन्तोष, सन्तान सम्बन्धी समस्याऐं उत्पन्न होंगी। बुद्धि- विवेक, सूझ-बूझ की कमी बुद्धि भ्रम से विवाद, कार्यों में विघ्न उपस्थित होंगे। अतः धैर्य और संयम रखना उचित होगा। 23 अक्टूबर से शनि मार्गी होकर 17 जनवरी 2023 से पुनः छठे स्थान में ताम्र पाद से शुभ फलदायक रहेगा। कार्य-व्यवसाय में लाभ, कृषि से लाभ, वाहन सुख, शारीरिक सुख मिलेगा। सारांशतः वर्ष में 12 जुलाई से 23 अक्टूबर तक का समय विशेष सावधानी बरतने योग्य है। राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिये राहु मंत्र जप, स्तोत्र पाठ, काली वस्तुओं का शनिवार का व्रत और दान तथा बटुक भैरव उपासना करनी चाहिये। आरक्षण सुरक्षा दृष्टि से हनुमान चालीसा हनुमानाष्टक के प्रतिदिवस पाठ करना श्रेयस्कर कल्याण विधायक समझें।

।।मासिक राशिफल।।

जनवरी : संतान को लेकर विचलित हो सकते हैं। यात्रा से परहेज करें एवं अनर्थक वाद-विवाद न करें। कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारी प्रसन्न रहेंगे। अटका हुआ धन वापस आयेगा। प्रशासन से निरर्थक झड़प न करें। वरिष्ठजनों से विचार-विमर्श के बाद ही कार्यक्षेत्रमें नये प्रयोग करें। कार्यक्षेत्र में नये लोग मिलेंगे, जो कि आपके काम आयेंगे। धन का अपव्यय न करें।
माह की 1 से 15 तारीख शुभ।

फरवरी : समय के साथ चलना शुभ होगा। परिवार में प्रेम बढ़ेगा। कुछ नया प्रयोग न करें, जो है उसी में सतुष्ट रहे। अनचाहे व्यक्ति से मिलने से मन खिन्न होगा भाग्य की उन्नति में इष्टमित्र सहायक होंगे। स्वास्थ्य गड़बड़ रहेगा एवं छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
माह की 1 से 5, 11 से 15 व 25 से 29 तारीख श्रेष्ठ।

मार्च : मन को नियंत्रित रखें। आत्मबल बढ़ेगा एवं स्वास्थ्य को लेकर सजग रहे किये गये कार्यों का मनोवांछित फल मिलेगा एवं आपकी वाणी संयमित रहेगी। परिवार आपके नियंत्रण से असहज हो सकता है, अपनी भावनाओं को उन पर जबर्दस्ती न थोपे। आध्यात्मिक रुझान बढ़ेगा एवं शत्रु परास्त होंगे।
माह का दूसरा व चौथा सप्ताह नए कार्य के प्रारम्भ के लिए शुभ नहीं।

अप्रैल : संयम रखें व समय का सम्मान करें। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा एवं खुद के लिए समय मिलेगा। धन का अपव्यय न करें अन्यथा मानसिक सन्ताप होगा। बुखार, सर्द-गर्म की शिकायत एवं स्लिप डिस्क का खतरा हो सकता है। साक्षात्कार प्रतियोगिता में मनोनुकूल फल मिलेगा। आपका अनर्थक विवाद के कारण शत्रु बढ़ेंगे।
माह का दूसरा व तीसरा सप्ताह श्रेष्ठ।

मई : ननिहाल से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। वाहन की दुर्घटन से ग्रस्त होंगे एवं किसी खास की तरफ से अशुभ समचार मिलेगा। मकान के नवीनीकरण के योग बनेंगे। सगाई संबंध टूटने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से पाला पडेगा। गलत सौदा आपको कर्जदार भी बना सकता है।
माह की 2, 3, 5, 6, 9, 10, 11, 12, 15, 16, 19, 20, 21, 23, 24, 27 व 29 तारीख शुभ

जून : दादा-दादी को लेकर चिंतित हो सकते हैं। परिवार की तरफ आपका अति सौम्य होगा। पीठ व पेट की तकलीफ से त्रस्त होंगे। अपने काम निकलवाने के लिए साम-दाम-दण्ड-भेद सभी आजमाने पड़ेंगे। लम्बित मामले पूर्ण होंगे। आय के नये स्रोत मिलेंगे। प्रशासन में आपका प्रभाव बढ़ेगा।
माह की 1, 4, 8, 10, 13, 17, 22 व 26 शुभ नहीं है।

जुलाई : संतानप्राप्ति के योग है। रोजगार के नये अवसर प्राप्त होंगे। यात्रा के योग बनेंगे एवं अविवाहितों का विवाह होगा। कार्यक्षेत्र में निष्पक्ष रवैया आपको शान्ति प्रदान करेगा। नये व्यापारिक रिश्ते लाभ देंगे। शत्रु भी मित्र बनना चाहेंगे। माह का प्रथम सप्ताह उत्तम व तीसरा सप्ताह मध्यम रहेगा।

अगस्त : यात्रा का योग है। गुरु का सप्तमस्थ स्वयं की राशि में परिभ्रमण जीवनसाथी से तकरार करवायेगा रुपयों का आवागमन ठीक नहीं होगा। कार्यक्षेत्र में आप महत्त्वपूर्ण व्यक्ति बनकर उभरेंगे। यात्राएं मंगलकारी होगी एवं वाहन पर खर्चा होगा। सामाजिक व्यवहार से आपके मित्र बढ़ेंगे।
माह की 11 से 20 तारिख शुभ है।

सितम्बर : उच्चाधिकारियों से सहयोग प्राप्त होगा। आप विकास के नये सोपान चढेंगे एवं किसी ऐसे व्यक्ति से मिलेंगे जो आपको तरक्की में सहयोग करेंगे। मनोवांछित फल मिलने से मन प्रसन्न होगा। प्रगति के लिए अनुकूल समय होगा एवं मान-पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी।
माह की 1, 4, 8, 10, 13, 17, 22 व 26 तारीख को व्यर्थ वाद-विवाद से बचें।

अक्टूबर : बड़े भाई से सहयोग प्राप्त होगा। कोर्ट-कचहरी के मामले, – सम्पत्ति के बंटवारे संबंधी विवाद भी लम्बित होंगे। आपकी बौद्धिक क्षमात बढ़ेगी। लोगों की निन्दा या आलेचना की परवाह न करें। मानसिक संताप से बनते कार्य बिगड़ सकते है। नये उद्यम में सफलता मिलेगी।
माह की 15 से 30 तारीख शुभ है।

नवम्बर : धर्म-कर्म के कार्य में मन लगेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी कुशलता की प्रशंसा होगी। आपका चुम्बकीय व्यवहार लोगों का आपकी तरफ आकर्षित करेगा। कार्य की अधिकता के तनाव पर नियंत्रण कर लेंगे। परिवार में सभी एक-दूसरे को सहायता करेंगे। संतोषी बने न कि लालची अन्यथा फंस जायेंगे।
माह की 2, 3, 6, 7, 10, 11, 12, 15, 19, 20, 21, 23, 25, 28, 29 व 30 तारीख शुभ है।

दिसंबर : मन विचलित रहेगा व हीन भावना से ग्रस्त हो सकते हैं। पैसा खर्च करने के बाद भी मनोवांछित लाभ नहीं मिलने से मन खिन्न होगा। अनर्थक वाद-विवाद से केवल ऊर्जा खर्च होगी लाभ नहीं मिलेगा। प्रशासन में तालमेल बैठेगा एवं अटका हुआ पैसा आयेगा।
माह की 1 से 15 तारीख कष्टप्रद होगी।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
9993874848

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