सावित्रीबाई फुले की जयंती पर किसान चौपाल का आयोजन

शिवशंकर प्रसाद, पलामू : ज्ञान विज्ञान समिति पलामू के तत्वाधान में सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर किसान चौपाल का आयोजन पनेरी बांध गांव में किया गया। इस चौपाल में सावित्रीबाई फुले और दिल्ली बॉर्डर पर संघर्षरत किसानों के संदर्भ में चर्चा की गई। सर्वप्रथम ज्ञान विज्ञान समिति के वरिष्ठ नेत्री श्रीमती अनीता मिश्रा ने कहा कि आज के समय में सावित्रीबाई फुले की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। क्योंकि उन्होंने महिला शिक्षा पर जोर दिया था। उनका कहना था कि जब तक महिला शिक्षित नहीं होगी तब तक वह अपने हक अधिकार को नहीं समझ सकतीं। भारत में प्रथम महिला शिक्षिका के रूप में स्थापित सावित्रीबाई फुले हम लोगों के बीच में एक प्रेरणा स्रोत है।

इस कार्यक्रम में अपनी बात भारतीय जन नाट्य संघ के राज्य सचिव रंगकर्मी प्रेम प्रकाश ने वर्तमान किसान आंदोलन पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जब हम सावित्रीबाई फुले को याद करते हैं तो संघर्ष को मजबूत करने की जिम्मेवारी बढ़ जाती है। सावित्रीबाई फुले ने स्त्री शिक्षा और समाज की कुरीतियों के खिलाफ महिलाओं को एकजुट कर संघर्ष को जारी रखा था। सावित्रीबाई फुले को याद करने का मतलब है किसानों के आंदोलन को मजबूत करना। किसानों के हक व अधिकार की हिफाजत की लड़ाई जारी रखना ही सावित्रीबाई फुले को याद करना है। जब तक किसान खुशहाल नहीं होंगे तब तक हमारा देश भी खुशहाल नहीं होगा। कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए ज्ञान विज्ञान समिति पलामू के सचिव अजय साहू ने कहा कि हम देश को खुशहाल देखना चाहते हैं तो हमें आंदोलनरत किसानों के साथ एकजुटता दिखाने की जरूरत होगी। ताकि हम उनकी लड़ाई अंजाम तक पहुंच सके। सावित्रीबाई फुले को याद करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उन्होंने महिलाओं को एकजुट शिक्षित कर बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया था।

इस कार्यक्रम में ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य अध्यक्ष शिवशंकर प्रसाद ने कहा कि आज के आज के संदर्भ में सावित्रीबाई फुले को इसलिए भी याद करने की जरूरत है कि उन्होंने महिला के लिए और खास करके विधवा महिलाओं, कुमारी महिलाओं व किशोरियों के लिए शिक्षा की पूरी व्यवस्था की थीं। उन्हें आज के दिन याद करके हम उनके संघर्ष को याद करते हैं। उसी प्रकार हमें किसान आंदोलन को भी याद करने की जरूरत है। क्योंकि देश के अन्नदाता आज अपने हक अधिकार के लिए दिल्ली के सीमाओं पर कड़कती ठंड में डटे हुए हैं और सरकार के द्वारा पारित तीन काले कानून को वापस कराने के लिए संघर्षरत है। हम दिल्ली के किसान के साथ एकजुटता दिखाते हुए पलामू के खेत खलिहान से किसानों की आवाज को बुलंद करते हुए एकजुटता जाहिर कर रहे हैं। कार्यक्रम में दिनेश पाठक, आशा पाठक, अजय कुमार, विजय बैठा, जमालुद्दीन ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के क्रम में महिला ज्ञान विज्ञान समिति की अध्यक्ष कुसुम लता सिंह ने बतलाया कि सावित्रीबाई फुले हम महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इन्हे याद करना हम महिला के बेहतर जिंदगी के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि उस जमाने में महिलाएं चाहे किसी भी जाति धर्म के लोग हैं वह प्रताड़ित थीं। उनके हक अधिकार के लिए सावित्रीबाई फुले ने काम किया। इसी प्रकार अंत में आशा पाठक के द्वारा एक संवेदनशील गीत जेही कोखी बेटा जनमल वही कोखी बेटीया काहे कईला हो बाबूजी दुरंग नीतियां गीत के साथ कार्यक्रम के समापन की घोषणा की गई। उक्त कार्यक्रम में इप्टा के शशि पांडे, रवि शंकर, गुलशन बीबी, तनु देवी, सलोनी टोपनो, सुदेश्वर चौधरी, राजीव रंजन चौधरी, सुजन्ति देवी, सुमन देवी हो गया सहित अन्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में अजय साहू ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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