तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। शुभ मुक्ति के पावन पल में बांग्ला सिनेमा का सूरज चमका ‘सुपारी किलर’ के रूप में, जो दर्शकों के सीने में उतर आया जैसे ममता की गोद। निर्देशक अरिजीत आरि की यह कृति कोलकाता से लेकर जिलों के सिनेमाघरों में हाउसफुल का जादू बिखेर रही, मानो प्रेम की वर्षा हो रही हो।
समीक्षकों के मुताबिक नायक अर्पण बनर्जी और नायिका अर्पिता के ज्वलंत अभिनय ने दिलों को छू लिया, तो सह-अभिनेताओं अरुण बनर्जी, विप्लव चटर्जी, मृत्युंजय हाजरा व देविका मित्र की उपस्थिति ने इसे यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम मेदिनीपुर के मिनी इंडिया खड़गपुर को गर्व करने का एक और मौका मिला स्थानीय पत्रकार प्रलय सामंत के माध्यम से, जिन्होंने फ़िल्म में भी पत्रकार की भूमिका निभाकर मातृभूमि को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है।

बचपन से अभिनय का स्वप्न संजोए, मेगा सीरियलों से पथिक यात्रा कर वे पहुँचे बड़े पर्दे पर – सबके प्रिय मित्र अर्पण बनर्जी के आशीष से। यह क्षण उनके जीवन का वह दीपक है, जो अंधेरे को चीरकर प्रकाश बिखेर रहा है।
प्रलय की भावुक वाणी गूंजी : “मैं खड़गपुर की कोख से जन्मा पुत्र हूँ, यहीं की माटी ने मुझे सींचा है। पेशे से पत्रकार, किंतु हृदय में अभिनय का ज्वार सदा उफनता रहा। अर्पण व अर्पिता को कोटि-कोटि धन्यवाद इस अवसर के लिए, तथा “संवाद कोलकाता” के धुरंधर गौतम दत्त को भी।
मन से किया हर कर्म सफलता का मंगल गान गाता है – बांग्ला को अपनाएं, इसकी फिल्में देखें, जो जीवन की दिशा दिखाती हैं। आशीर्वाद दें, कि खड़गपुर का मान मैं सदा संभालूँ!” उनकी यह पुकार आंसुओं भरी आशाओं का सैलाब ला रही। नगरवासियों के हृदय प्रलय के अभिनय से पुलकित है, गर्व के सागर में डूबे; प्रलय उमड़ पड़े प्रशंसकों से मिलने।
प्रशंसकों के मुताबिक पत्रकारिता में निडर योद्धा, अभिनय में समर्पित साधक – प्रलय खड़गपुर की शान हैं जिनकी जीवटता एक जीवंत प्रेरणा और संघर्ष की ज्योति जलाती है।
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