खड़गपुर। खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी पारा इस बार सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भाषाई और नैरेटिव की लड़ाई भी बन गया है। एक ओर विकास के दावे हैं, तो दूसरी ओर ‘एनकाउंटर’ जैसे तीखे और विवादित शब्दों ने माहौल को और गरमा दिया है।
शनिवार को तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दिलीप घोष चुनावी मंचों से गोलियां, एनकाउंटर और महिलाओं के विकास की बातें कर रहे हैं, जबकि खुद लंबे समय तक विधायक और सांसद रहने के बावजूद खड़गपुर के लिए ठोस विकास कार्य नहीं कर पाए।
प्रदीप सरकार ने तंज कसते हुए कहा कि अगर विकास में रेल अधिकारियों की बाधा है, तो क्या उनका भी ‘एनकाउंटर’ कर दिया जाए? इस बयान के जरिए उन्होंने बीजेपी की आक्रामक भाषा को उसी अंदाज में पलटने की कोशिश की।
सीट बदली क्यों? सवालों की बौछार : तृणमूल ने सिर्फ बयानबाजी ही नहीं, बल्कि बीजेपी की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए। दिलीप घोष को मेदिनीपुर से हटाकर बर्धमान-दुर्गापुर भेजे जाने और पूर्व विधायक हिरण चट्टोपाध्याय की सीट बदलने को लेकर पूछा गया – अगर ये नेता इतने सफल थे, तो उन्हें अपने क्षेत्र से हटाया क्यों गया?
‘स्थानीय बनाम बाहरी’ का नैरेटिव : इस चुनाव में तृणमूल ने स्पष्ट रूप से “स्थानीय बनाम बाहरी” का मुद्दा उछाला है। “बाहरी नहीं, स्थानीय को खड़गपुर का खेवनहार” जैसे नारों के साथ पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अब जनता ‘अपनों’ को प्राथमिकता दे।
महापौर कल्याणी घोष और कोर कमिटी सदस्य देवाशीष चौधुरी ने भी बीजेपी पर भाषा की मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग से कार्रवाई की मांग की। वहीं पूर्व महापौर जवाहरलाल पाल ने पिछली जीत का हवाला देकर इस बार जीत का अंतर दोगुना होने का दावा किया।
आंकड़ों से उम्मीद, माहौल से चुनौती : तृणमूल के सामने चुनौती भी कम नहीं है। पिछले चुनावों में 35 में से 31 वार्डों में बीजेपी की बढ़त रही थी। लेकिन पार्टी का दावा है कि इस बार संगठनात्मक एकजुटता से तस्वीर बदलेगी।
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