खड़गपुर | 9 फरवरी 2026: पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर महकमा अस्पताल में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक प्रसूता महिला के परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जोरदार हंगामा किया।
गुस्साए लोगों ने वॉर्ड मास्टर के कार्यालय में घुसकर फर्नीचर और सरकारी दस्तावेजों में तोड़फोड़ की, जिससे अस्पताल का कामकाज कुछ समय के लिए ठप हो गया।
12 दिन तक अस्पताल में रखने का आरोप
जानकारी के अनुसार, सोनामुखी इलाके की निवासी पायल राय को प्रसव पीड़ा के बाद 26 जनवरी को खड़गपुर महकमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 27 जनवरी को सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया।

परिजनों का आरोप है कि सामान्य परिस्थितियों में सिजेरियन के बाद 4–5 दिनों में मरीज को छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन पायल राय को करीब 12 दिनों तक अस्पताल में रोके रखा गया।
समय पर जानकारी नहीं देने का आरोप
परिजनों ने दावा किया कि ऑपरेशन के बाद पायल राय के टांकों में गंभीर संक्रमण हो गया था, जिसकी जानकारी उन्हें समय रहते नहीं दी गई। इलाज में देरी और डॉक्टरों व प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी न मिलने से नाराजगी बढ़ती गई और रविवार शाम को यह गुस्सा हंगामे में बदल गया।
पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
स्थिति बिगड़ते देख खड़गपुर टाउन थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। हंगामे के दौरान पुलिस को सख्ती भी बरतनी पड़ी। फिलहाल अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात है ताकि दोबारा कोई अप्रिय स्थिति न बने।
रोगी कल्याण समिति ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर रोगी कल्याण समिति की अध्यक्ष हेमा चौबे ने कहा कि मरीज को संक्रमण के चलते चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया था और उसका इलाज लगातार चल रहा था। उन्होंने साफ कहा कि बिना किसी सूचना के सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है।
पुलिस में दर्ज हुई शिकायत
अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीज के पति राहुल राय सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ खड़गपुर टाउन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अस्पताल कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
CMOH ने लापरवाही के आरोपों को नकारा
वहीं, जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (CMOH) डॉ. सौम्यशंकर षड़ंगी ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला मरीज के परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच संवाद की कमी का नतीजा है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और दोष पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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