कोलकाता न्यूज डेस्क | 28 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले बस सेवाओं की भारी कमी ने आम जनता, दैनिक यात्रियों और प्रवासी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए बड़ी संख्या में बसों को चुनाव ड्यूटी में लगा दिए जाने के कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
भीषण गर्मी और उमस के बीच यात्रियों को बसों के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। भीड़ के कारण कई बसों में खड़े होने की जगह तक नहीं बची है।
यात्री संगठन का आरोप
बंगाल परिवहन यात्री कमिटी के सह-सचिव नारायण चंद्र नायक ने आरोप लगाया कि चुनाव के नाम पर कुछ बस मालिक और ठेकेदार मनमाना किराया वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा:
“वोट डालने घर लौट रहे लोगों से दोगुना-तिगुना किराया लिया जा रहा है। बसों में इतनी भीड़ है कि सफर करना मुश्किल हो गया है। इस भीषण गर्मी में लोग घंटों खड़े रहकर यात्रा करने को मजबूर हैं।”
नायक ने बताया कि समस्या केवल बसों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य सार्वजनिक वाहनों में भी अत्यधिक भीड़ देखी जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर निम्न आय वर्ग, दैनिक कामगारों और प्रवासी मजदूरों पर पड़ रहा है।
मोटरसाइकिल प्रतिबंध ने बढ़ाई परेशानी
निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार मोटरसाइकिल पर लगाए गए प्रतिबंध ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पॉयंटा, बड़ा बाजार, एसी मार्केट जैसे व्यस्त इलाकों में काम करने वाले सैकड़ों प्रवासी मजदूर अब पैदल चलने या अवैध सवारी का सहारा लेने को मजबूर हैं।
एक टोटो चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम जैसे छोटे वाहन चालकों की रोजी-रोटी पर बुरा असर पड़ा है। लोग भूखे-प्यासे सड़कों पर घंटों भटक रहे हैं।”
यात्री संगठनों की मांग
यात्री संगठनों और परिवहन संबंधी प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने निम्नलिखित अपील की है:
- बस सेवाओं को शीघ्र सामान्य किया जाए
- मनमाने किराए पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए
- वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए
हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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