खड़गपुर। मंगलवार को खड़गपुर में चैती छठ पूजा का उल्लास और श्रद्धा का अपूर्व माहौल छाया रहा। लोक आस्था के इस महापर्व के तीसरे दिन, विभिन्न जलाशयों, तालाबों और नदी तटों पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्रतधारी महिलाएं और पुरुष कमर भर पानी में खड़े होकर डूबते हुए भगवान सूर्य को प्रथम ‘अर्घ्य’ अर्पित करने पहुंचे।
पारंपरिक छठ गीतों और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया, मानो सूर्यदेव स्वयं उपस्थित हों। चैती छठ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला कठिन व्रत है, जो परिवार की सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और स्वास्थ्य लाभ की कामना के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
व्रतियों ने ठंडे पानी में घंटों खड़े रहकर फल-फूल, ठेकुआ और प्रसाद के साथ सूर्य भगवान की आराधना की। घाटों पर सजावट, दूधिया अर्घ्य और भजन-कीर्तन की मनमोहक ध्वनियां सुनाई दे रही थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बार मौसम के बावजूद भक्तों की संख्या अभूतपूर्व रही।
चैती छठ का महत्व : यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। चैती छठ को ‘नववर्ष छठ’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह चैत्र नवरात्रि के समय आता है। व्रत में 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा जाता है, जो सूर्य उपासना की कठोर साधना का प्रतीक है। खड़गपुर जैसे शहरों में यह पर्व प्रवासी बिहारी समुदाय के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी लोकप्रिय हो चुका है।
बुधवार को समापन : बुधवार सुबह उगते सूर्य को द्वितीय अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही यह चार दिवसीय महापर्व समाप्त हो जाएगा। उसके बाद व्रत का पारण होगा और प्रसाद वितरण किया जाएगा। प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि भक्तों को कोई असुविधा न हो। चैती छठ की यह भव्यता आस्था की अटूट शक्ति को दर्शाती है।
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