तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। भगवती देवी पीटीटीआई कैंपस में सांस्कृतिक विवेक की एक नयी ज्योति के रूप में सिने क्लब का दीप प्रज्वलित हुआ। खड़गपुर की धरती पर शिक्षा के इस मन्दिर में, जहां ज्ञान के वृक्ष सदियों से पल्लवित हो रहे हैं, वहां नए सिनेमा के पुष्प खिल उठे।
इस पावन अवसर पर, मेदिनीपुर फिल्म सोसाइटी के सिद्धार्थ सांत्रा, सत्यज्योति अधिकारी, पराग कांती दत्ता, और तनुश्री भट्टाचार्य जैसे कला के दिग्गजों ने तटस्थ और सुकुन देने वाली पवन की भांति अपने शब्दों से विद्यार्थियों के मनों में सांस्कृतिक चेतना और रचनात्मकता को एक सशक्त आधार दिया।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सिद्धार्थ शंकर मिश्र ने विद्यार्थियों को जगाया कि चलचित्र कला मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की बारीकियों को छूने वाला सशक्त माध्यम है, जो समाज के प्रतिबिंब और चेतना का दर्पण है।

उन्होंने युवाओं को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से सोचने, नए सृजनात्मक विचारों को लिखित आकार देने का आह्वान किया, जैसे कि वे अपनी कल्पना की चाबी से नयी दुनियाओं के द्वार खोल रहे हों।
सिद्धार्थ सांत्रा ने इंटरनेट के युग में लेखन की दुर्लभता पर चिंतन करते हुए युवाओं को कहा कि मोबाइल की जंजीरों से मुक्त होकर, वे लघु फिल्मों के माध्यम से अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता को नयी उचाई पर ले जाएं।
फिल्मों के बीच में जैसे “समाप्ति” ने सामाजिक परतों की गहराई से पर्दा उठाया, वैसे ही चार्ली चैपलिन की कहानियाँ विद्यार्थियों के भीतर अनछुए कवितायें जगाने का माध्यम बनीं।
यह समागम कलाकारों के मिलन, कलाकारों की आत्मा और विद्यार्थियों की बातों में पल्लवित हुआ जिसमें सांस्कृतिक विरासत व आधुनिकता के संगम से नये नवेले गीत गढ़े गए।
अपने संबोधन व्यवस्थाओं ने कहा कि इस सिने क्लब की स्थापना एक दीप की तरह है, जो अज्ञान के अंधकार में नयी दिशा की किरण बनकर चमकेगी, युवाओं के मन में सृजनात्मकता और सामाजिक चेतना को हरियाली देगी।
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