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बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद खुलने लगे पुराने राज?
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कटवा के माजीग्राम में TMC कार्यालय से बरामद हुए सरकारी योजनाओं के आवेदन पत्रों के बोरे
खड़गपुर ब्यूरो | 15 मई 2026: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई जिलों से राजनीतिक तनाव, कब्जे और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। इसी बीच पूर्व बर्धमान जिले के कटवा के माजिग्राम इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीति में सनसनी फैला दी है।
यहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक पुराने पार्टी कार्यालय से कथित तौर पर सरकारी योजनाओं के हजारों आवेदन पत्र बरामद हुए हैं। आरोप है कि ये फॉर्म वर्षों से जमा कराए गए थे, लेकिन उन्हें कभी सरकारी दफ्तरों तक पहुंचाया ही नहीं गया।
घटना के बाद बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस पर गरीब लोगों को सरकारी योजनाओं के नाम पर “धोखा” देने का आरोप लगाया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर यह मामला अब राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना कटवा के माजिग्राम बस स्टैंड इलाके की है। यहां जिस भवन में तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय चल रहा था, वह मूल रूप से स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता अनूप चौधरी की दुकान बताई जा रही है।
अनूप चौधरी का दावा है कि करीब 30 साल पहले उन्होंने यह जमीन खरीदी थी और वहां जूते, कपड़े समेत अन्य सामान की दुकान चलाते थे। दुकान के भीतर ही उनका रहने का इंतजाम भी था।
अनूप चौधरी ने बताया:
“2013 में मेरे बड़े भाई की दुर्घटना में मौत हो गई थी। कुछ दिनों के लिए मैं घर चला गया। उसी दौरान तृणमूल के लोगों ने मेरी दुकान तोड़कर जबरन पार्टी कार्यालय बना लिया। मैंने बहुत अनुरोध किया, लेकिन मेरी जगह वापस नहीं की गई।”
चुनाव नतीजों के बाद बदला माहौल
हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद इलाके का राजनीतिक माहौल बदल गया। आरोप है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद TMC कार्यालय पर ताला लग गया। अगले दिन स्थानीय ग्रामीणों और बीजेपी समर्थकों ने वहां पहुंचकर ताला तोड़ दिया और नया ताला लगाकर चाबी अनूप चौधरी को सौंप दी।
जब अनूप चौधरी अपने पुराने परिसर की सफाई करने पहुंचे, तब वहां से कई बोरे बरामद हुए। इन बोरों को खोलने पर सभी हैरान रह गए।
पांच बोरे भरकर मिले सरकारी योजनाओं के फॉर्म
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बरामद बोरों में सरकारी सहायता योजनाओं से जुड़े हजारों आवेदन पत्र भरे हुए थे। इनमें वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग सहायता योजना समेत कई सामाजिक योजनाओं के फॉर्म शामिल थे।
बताया जा रहा है कि अधिकांश आवेदन पत्र 2020-21 के दौरान ग्रामीणों से भरवाए गए थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल के स्थानीय नेताओं ने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से फॉर्म जमा करवाए, लेकिन उन्हें संबंधित सरकारी कार्यालयों में जमा नहीं किया। इसके बजाय वे वर्षों तक पार्टी कार्यालय में ही पड़े रहे।
बीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप
बीजेपी के मंगलकोट 3 नंबर मंडल के महासचिव सौमेन मुखोपाध्याय ने इस मामले को “गरीब लोगों के साथ बड़ा धोखा” बताया।
उन्होंने कहा:
“पांच बोरे भरकर वृद्धावस्था भत्ता, विधवा भत्ता, दिव्यांग पेंशन और अन्य योजनाओं के फॉर्म मिले हैं। लोगों से वोट के लिए झूठे वादे करके ये फॉर्म लिए गए थे। लेकिन उन्हें सरकारी दफ्तरों में जमा नहीं किया गया।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया:
“संभव है कि योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे भी लिए गए हों। चुनाव परिणाम आने के बाद कई दस्तावेज जलाने की भी कोशिश की गई।”
TMC नेताओं की चुप्पी
घटना सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि, स्थानीय तृणमूल नेताओं की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव परिणाम के बाद से कई TMC नेता इलाके में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सवालों के घेरे में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता
इस घटना ने सरकारी योजनाओं के संचालन और लाभार्थियों तक पहुंचने वाली प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल राजनीतिक मामला नहीं रहेगा बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और योजनाओं के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है।
पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक योजनाओं को लेकर बड़े पैमाने पर राजनीतिक प्रचार हुआ है। ऐसे में हजारों आवेदन पत्रों का पार्टी कार्यालय में पड़े रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सरकारी सहायता की उम्मीद में आवेदन किए थे। कई जरूरतमंद परिवार आज भी वृद्धावस्था पेंशन, विधवा भत्ता या दिव्यांग सहायता का इंतजार कर रहे हैं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा:
“हमने सोचा था सरकार से मदद मिलेगी। लेकिन अगर हमारे फॉर्म कभी जमा ही नहीं हुए, तो यह हमारे साथ धोखा है।”
राजनीतिक माहौल गरम
सत्ता परिवर्तन के बाद बंगाल में पुराने मामलों को लेकर लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। बीजेपी इस घटना को “तृणमूल के भ्रष्ट राजनीतिक मॉडल” का उदाहरण बता रही है, जबकि तृणमूल की ओर से अभी तक औपचारिक जवाब नहीं आया है।
अगर मामले की आधिकारिक जांच होती है, तो यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

