कोलकाता हिन्दी न्यूज | 14 सितम्बर 2026: कालीघाट मंदिर के प्रबंधन, संपत्तियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। परिषद के सचिव देबर्षि रायचौधरी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र भेजकर पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है।
परिषद ने पत्र में कहा है कि यदि CBI जांच संभव नहीं हो तो हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।
इसके साथ ही मंदिर के संचालन में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नई प्रबंधन समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
CBI जांच या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में SIT की मांग
सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद की ओर से भेजे गए पत्र में कालीघाट मंदिर से जुड़ी कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। परिषद का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच किसी निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी या न्यायिक निगरानी में होनी चाहिए।
प्रस्तावित नई प्रबंधन समिति में जिला जज, केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधि, सबर्ण परिवार के दो सदस्य तथा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। परिषद के अनुसार, इससे मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
जिला जज को शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
परिषद के सचिव देबर्षि रायचौधरी ने कहा कि मामले को लेकर पहले दक्षिण 24 परगना के जिला जज के समक्ष शिकायत की गई थी, लेकिन वहां से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजना पड़ा।
उनके अनुसार, यदि इस स्तर पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है तो परिषद जनहित याचिका दायर करने पर विचार करेगी। परिषद का आरोप है कि लंबे समय से मंदिर प्रशासन में एकतरफा निर्णय लेने की स्थिति बनी हुई है, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गर्भगृह में फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी आपत्ति
पत्र में सबर्ण रायचौधरी परिवार ने कालीघाट मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा करने के दौरान फोटो और वीडियो बनाए जाने की शिकायत भी की है। परिषद का कहना है कि ऐसी गतिविधियों से मंदिर की धार्मिक गरिमा और परंपरागत वातावरण प्रभावित हो रहा है।
परिषद ने मंदिर के धार्मिक अनुशासन, पूजा-पद्धति और ऐतिहासिक परंपराओं के संरक्षण के लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
2006 में भी सामने आया था संपत्ति और प्रणामी से जुड़ा विवाद
कालीघाट मंदिर की संपत्तियों और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2006 में भी मामला कलकत्ता हाई कोर्ट तक पहुंचा था। उस समय आरोप लगाया गया था कि भक्तों से प्राप्त प्रणामी की पूरी राशि निर्धारित स्थान पर जमा नहीं हो रही है।
उस समय मंदिर प्रबंधन से जुड़े तत्कालीन अध्यक्ष और जिला जज ने भी इस मामले पर असंतोष व्यक्त किया था। अब लगभग दो दशक बाद सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने एक बार फिर मंदिर की संपत्तियों, आभूषणों और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
दक्षिणाकाली के आभूषणों और बैंक लॉकर की चाबी को लेकर गंभीर सवाल
परिषद का दावा है कि कालीघाट मंदिर की दक्षिणाकाली के आभूषण सरकारी बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखे गए हैं। हालांकि, आरोप के अनुसार वर्ष 1980 से उस लॉकर की चाबी उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में लॉकर के भीतर वास्तव में कौन-कौन से आभूषण और संपत्तियां मौजूद हैं तथा उनकी स्थिति पहले जैसी है या नहीं, इसे लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
परिषद ने इस मामले में लॉकर की जांच कराने और उसमें रखे आभूषणों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही संपत्तियों के संरक्षण और सत्यापन के लिए स्वतंत्र प्रक्रिया अपनाने की अपील की गई है।
2014 के बाद मंदिर प्रबंधन समिति का चुनाव नहीं होने का आरोप
मंदिर की संपत्तियों और आभूषणों की देखरेख के लिए गठित संरक्षण समिति की अवधि समाप्त होने का मुद्दा भी पत्र में उठाया गया है। बताया गया है कि समिति में पांच सेवायतों के अलावा मंदिर की दैनिक गतिविधियों से सीधे जुड़े नहीं रहने वाले छह बाहरी सदस्य शामिल थे।
जिला जज इस समिति के अध्यक्ष होते हैं। परिषद के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत समिति का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित है।
आरोप है कि वर्ष 2014 के बाद मंदिर प्रबंधन समिति का चुनाव नहीं हुआ। इसके चलते मंदिर की संपत्तियों और आभूषणों की नियमित निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
दक्षिण 24 परगना के जिला जज से FIR दर्ज कराने की मांग
सबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने दक्षिण 24 परगना के जिला जज से मामले में FIR दर्ज कराने का निर्देश देने की मांग की है। परिषद ने बैंक लॉकर में रखे आभूषणों और अन्य संपत्तियों की विस्तृत सूची उपलब्ध कराने की भी अपील की है।
जिला स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजे जाने से मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित प्राधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
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