खड़गपुर ब्यूरो | 04 मई 2026: अप्रैल-मई के दौरान आने वाली ‘कालबैशाखी’ (Nor’westers) इस बार पश्चिम बंगाल के फूल किसानों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं साबित हुई है। प्रचंड तूफानी हवाओं और मूसलाधार बारिश ने राज्य के प्रमुख फूल उत्पादक जिलों में खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक झटके में खिलते हुए बाग वीरान हो गए हैं और किसानों की साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई है।
प्रमुख जिलों में व्यापक तबाही
मौसम के इस रौद्र रूप का सबसे ज्यादा असर पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और हावड़ा जैसे जिलों में देखने को मिला है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रजनीगंधा, गेंदा (Marigold), ग्लेडियोलस और चंद्रमल्लिका की खेती की जाती है।
तेज हवाओं के कारण इन फूलों की नाजुक डंठलें और शाखाएं टूटकर जमीन पर गिर गईं। खेत में तैयार खड़ी फसल के लहूलुहान होने से किसानों को लाखों रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है।
गेंदा की फसल सड़ने की कगार पर
फूल उत्पादकों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण गेंदा के खेतों में पानी भर गया है, जिससे फूलों में सड़न शुरू हो गई है। फूलों की पंखुड़ियों पर गहरे दाग पड़ गए हैं, जिसके कारण बाजार में इनकी न तो अच्छी कीमत मिल पाएगी और न ही ये मंडियों में बिकने योग्य रह गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तबाही का सीधा असर आने वाले दिनों में बाजार पर दिखेगा। फूलों की भारी कमी के कारण आने वाले समय में इनकी कीमतों में बेतहाशा उछाल आने की पूरी संभावना है।
मुआवजा की मांग
संकट की इस घड़ी में ‘सारा बांग्ला फूल उत्पादक एवं फूल व्यापारी समिति’ किसानों के समर्थन में उतर आई है। समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों का तत्काल सर्वेक्षण कराकर उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है, “किसान पहले ही लागत बढ़ने से परेशान थे, अब कुदरत की मार ने उन्हें कर्ज के जाल में ढकेल दिया है। अगर सरकार ने जल्द आर्थिक सहायता नहीं दी, तो किसानों के लिए दोबारा खेती शुरू करना नामुमकिन हो जाएगा।”
बाजार और आम उपभोक्ता पर असर
स्थानीय मंडियों से मिली जानकारी के मुताबिक, फूलों की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। शादियों और अन्य आयोजनों के लिए फूलों की मांग बनी रहती है, लेकिन आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों को अब अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति का आकलन कर रहे हैं और जल्द ही नुकसान की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी ताकि जरूरतमंद किसानों को राहत पहुंचाई जा सके।
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