वाराणसी। भारत में 12 नवंबर 2025, बुधवार को कालाष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यह तिथि अगहन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ती है, जिसे काल भैरव जयंती के रूप में जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप ‘काल भैरव’ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
इस बार की कालाष्टमी पर शिववास योग समेत कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन शुभ योगों में पूजा करने से साधक को न केवल मनचाही सफलता मिलती है, बल्कि आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होती है। इस दिन भक्तगण उपवास और रात्रि जागरण कर भगवान भैरव की आराधना करते हैं।
📍काल भैरव की पूजा का महत्व :
📌 धार्मिक मान्यता के अनुसार, काल भैरव देव की आराधना करने से साधक के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के कष्टों का नाश होता है।
📌 यह पूजा व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों, भय, असफलता और आर्थिक संकट से मुक्ति दिलाती है।
📌 भगवान भैरव की कृपा से व्यक्ति का जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाता है।

📍कालाष्टमी पर व्रत और पूजन विधि :
📌 कालाष्टमी के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर भगवान शिव और काल भैरव की पूजा करते हैं।
📌 पूजा में काला तिल, काला वस्त्र, तेल का दीपक और इमरती का भोग विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
📌 भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात्रि में भैरव स्तोत्र का पाठ करते हैं।
📍कालाष्टमी पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप :
📌 ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
📌 ओम कालभैरवाय नम:
📌 ओम भ्रां कालभैरवाय फट्
📌 धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्। द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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