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कजरी तीज आज

वाराणसी। वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत को किया जाता है।

कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त : वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 12 जुलाई को सुबह 08 बजकर 40 मिनट पर होगा। ऐसे में कजरी तीज का व्रत 12 अगस्त को किया जाएगा।

कजरी तीज व्रत  का महत्व : इस व्रत को कुंवारी लड़कियां और सुहागिन महिलाएं विधिपूर्वक करती हैं। धार्मिक मान्यता मान्यता के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए की थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कजरी तीज के व्रत को करने से पति को लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है। साथ ही मनचाहे वर की प्राप्ति होती है।

कजरी तीज के दिन इन बातों का रखें ध्यान : इस व्रत को बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि व्रत को निर्जला किया जाता है। शाम को पूजा-अर्चना कर चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। व्रत के दौरान किसी से वाद-विवाद न करें। काले रंग का वस्त्र धारण न करें। घर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।

कजरी तीज की पूजन सामग्री : कजरी तीज का व्रत रखने वालों को एक दिन पहले कुछ खास सामग्री की व्यवस्था कर लेनी चाहिए. इसकी पूजा में एक दीपक, घी, तेल, कपूर, अगरबत्ती, कच्चा सूता, नए वस्त्र, केला के पत्ते, बेलपत्र, शमी के पत्ते, जनेऊ, जटा नारियल, सुपारी, कलश, भांग, धतूरा, दूर्वा घास, पीला वस्त्र, हल्दी, चंदन, श्रीफल, गाय का दूध, गंगाजल, दही, मिश्री, शहद और पंचामृत जैसी सामग्री की आवश्यकता रहती है।

कजरी तीज शुभ योग : कजरी तीज पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होने जा रहा है जो सुबह 11 बजकर 52 मिनट से लेकर 13 अगस्त की सुबह 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप मां पार्वती का पूजन कर सकते हैं।

कजरी तीज पूजन विधि : इस दिन महिलाएं कठोर व्रत भी रखती हैं, जिसे कजरी तीज व्रत के रूप में जाना जाता है। कजरी तीज के दिन महिलाएं देवी पार्वती की पूजा करती हैं और उनसे सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मांगती हैं। शाम के समय महिलाएं पूजा के लिए इकट्ठा होती हैं। महिलाएं नीम के पेड़ की कुमकुम, चावल, हल्दी और मेहंदी से पूजा करती हैं और फल व मिठाई भी चढ़ाती हैं।

ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848

पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री

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