कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अंर्तकलह से जूझ रही भाजपा के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। प्रदेश में जूट उद्योग के संकट के चलते लगभग एक दर्जन जूट मिलें बंद होने से हजारों श्रमिक सड़क पर आ गए हैं। जिसे लेकर सांसद व राज्य भाजपा इकाई के उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह ने अपनी ही केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कच्चे माल की अनुपलब्धता और कच्चे जूट की कीमत को लेकर उन्होंने जूट आयुक्त कार्यालय (जेसीओ) के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है। हालांकि उन्होंने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में लौटने की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।

अर्जुन सिंह बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां 20 से अधिक जूट मिलें स्थित हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी सांसद लॉकेट चटर्जी ने पिछले साल 13 दिसंबर को जेसीओ अधिकारियों के साथ-साथ केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की थी। उन्होंने इस दौरान जूट उद्योग की मांगों से भी अधिकारियों और केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया था। सिंह ने कहा कि अगर संकट का समाधान नहीं हुआ तो 10 और मिलें बंद हो जाएंगी और हजारों मजदूर काम से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने जेसीओ अधिकारियों पर मिल श्रमिकों और जूट किसानों सहित दो करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान करने वाले जूट उद्योग को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है।

सांसद ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री गोयल को एक पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि केंद्रीय मंत्री को गुमराह किया जा रहा है। वह कहते हैं कि कच्चे जूट की कीमत जेसीओ द्वारा तय की जाती है और यह 6,500 डॉलर प्रति क्विंटल है। अर्जुन सिंह ने कहा कि तैयार उत्पादों का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र द्वारा खाद्यान्न और कृषि उत्पादों की पैकेजिंग के लिए खरीदा जाता है। हालांकि राज्य में जूट मिलें बंद हो रही हैं और मिल प्रबंधन कह रहे हैं कि उन्हें कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सिंह ने कहा कि बीते 13 दिसंबर को हुई बैठक का कार्यवृत्त भी सार्वजनिक नहीं किया गया।

भाजपा सांसद ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की और सभी ट्रेड यूनियनों से मिलों को बंद करने की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरने का आग्रह किया है। इस बीच जूट आयुक्त मोलॉय चक्रवर्ती ने हाल ही में पत्रकारों से कहा कि जेसीओ ने किसानों के हितों की रक्षा करना जारी रखा है, लेकिन मूल्य सीमा में संशोधन करके उद्योग में खिलाड़ियों के एक वर्ग के लिए नाजायज लाभ की अनुमति नहीं दिया जा सकता है।

बता दें कि राज्य के सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ट्रेड यूनियन विंग, इंडियन नेशन तृणमूल ट्रेड यूनियन ने 4 मई को एक विरोध बैठक की घोषणा की है। इस महीने की शुरुआत में टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे और इंडियन जूट मिल एसोसिएशन ने इस मामले पर केंद्र के अधिकारियों, गोयल और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखा था। राज्य में लगभग 60 जूट मिलें हैं और उनमें से ज्यादातर हुगली जिले और उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर उप-मंडल में, हुगली के दो किनारों के दोनों ओर स्थित हैं।

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