अब मांगलिक कार्यों के लिए नहीं करना होगा इंतजार
वर्ष 2026 में कब-कब हैं विवाह के शुभ मुहूर्त, जानिए
वाराणसी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य तभी संपन्न किए जाते हैं, जब गुरु एवं शुक्र तारा उदित हों तथा शुभ मुहूर्त उपलब्ध हो। इस संबंध में शास्त्री ने बताया कि विवाह एवं अन्य शुभ संस्कारों के लिए गुरु और शुक्र तारा का उदित होना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में गुरु (तारा) 15 जुलाई को सायं 7:27 बजे पश्चिम दिशा में अस्त हुआ था तथा 9 रविवार अगस्त को रात्रि 9:54 बजे पूर्व दिशा में उदित होगा।
शास्त्री जी ने स्पष्ट किया कि गुरु एवं शुक्र के अस्त काल में सगाई (मंगनी) जैसे कार्यक्रम शुभ मुहूर्त में किए जा सकते हैं। इनमें किसी प्रकार का दोष नहीं माना जाता।
उन्होंने बताया कि “तारा डूबने” अथवा “तारा चढ़ने” का अर्थ खगोल शास्त्र की दृष्टि से ग्रह का अस्त अथवा उदित होना है। जैसे सूर्य का उदय और अस्त होता है, उसी प्रकार ग्रह भी दृष्टिगोचर अथवा अदृश्य होते हैं।
भारतीय ज्योतिष में गुरु एवं शुक्र को तारा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि गुरु एवं शुक्र के अस्त काल में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, शपथ ग्रहण, शिलान्यास, व्रत-उद्यापन, यज्ञोपवीत संस्कार तथा अन्य मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित माने गए हैं। स्वयंवर के लिए भी यह काल उपयुक्त नहीं माना जाता।
उन्होंने बताया कि पुनर्विवाह की स्थिति में गुरु-शुक्र अस्त, वेध, लग्न शुद्धि अथवा विवाह-विहित मास का दोष नहीं लगता। इसी प्रकार पुराने अथवा जीर्णोद्धार किए गए मकानों में गृहप्रवेश हेतु गुरु-शुक्र अस्त काल में प्रवेश करना भी निषिद्ध नहीं माना गया है।
📍वर्ष 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त :
देवशयन (चातुर्मास) के उपरांत जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में विवाह के शुभ मुहूर्त निम्नानुसार उपलब्ध रहेंगे।
अगस्त
13, 18, 20, 22, 23, 24, 25, 29 एवं 30 अगस्त।
सितंबर
3, 4, 5, 12, 13, 14 एवं 21 सितंबर।
📍शुक्र अस्त: 12 अक्टूबर से 29 अक्टूबर, 2026 तक।
नवंबर
2, 3, 10, 11, 12, 13, 21, 22, 23, 25 एवं 26 नवंबर।
दिसंबर
2, 3, 4, 5, 11 एवं 12 दिसंबर।
शास्त्री जी ने कहा कि विवाह के लिए केवल तिथि ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि वार, नक्षत्र, योग, करण एवं लग्न का भी विशेष महत्व होता है। इसलिए किसी भी तिथि का चयन करने से पूर्व वर-वधू की कुंडली का मिलान तथा उनकी व्यक्तिगत ग्रह-दशाओं का विचार अवश्य किया जाना चाहिए। इससे वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि एवं संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में अनेक लोग केवल सुविधा के अनुसार विवाह की तिथि निर्धारित कर लेते हैं, जबकि यदि विवाह संस्कार शास्त्र सम्मत शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव जीवनभर बना रहता है।
उन्होंने अभिभावकों एवं विवाह योग्य युवक-युवतियों से आग्रह किया कि वर्ष 2026 के शुभ विवाह मुहूर्तों की जानकारी समय रहते प्राप्त कर विधि-विधान से विवाह संस्कार संपन्न करें।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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