अमितेश कुमार ओझा, खड़गपुर। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के अवसर पर ग्रिफिन्स इंटरनेशनल स्कूल में भक्ति, भारतीय संस्कृति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यार्थियों ने नृत्य, नाट्य, बांसुरी वादन और दही-हांडी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल कृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत किया, बल्कि भारतीय परंपरा और जीवन-मूल्यों का सुंदर संदेश भी दिया।
समारोह में कीर्तन आनंद प्रभुजी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। नीलाद्रि हाजरा और सुप्रिया हाजरा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। विद्यालय के प्राचार्य प्रदीप कुमार सामल, प्रधानाध्यापिका सोनाली महानंदा, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी समारोह के साक्षी बने।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत में उन्हें पौधे भेंट करने के साथ हुई। स्वागत का यह अंदाज केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दे रहा था। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
समारोह का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत श्रीकृष्ण जन्म की नाट्य प्रस्तुति रही। अभिनय के माध्यम से कंस के अत्याचार, भगवान कृष्ण के जन्म और उनके अवतरण के उद्देश्य को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि अत्याचार और अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
इसके बाद विद्यार्थियों ने कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। पारंपरिक भाव-भंगिमाओं और उत्साह से भरी प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को कृष्णमय बना दिया। दर्शकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की।
समारोह में तीन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत बांसुरी वादन भी विशेष आकर्षण रहा। बांसुरी की मधुर धुनों ने भगवान कृष्ण की पारंपरिक छवि को मानो मंच पर साकार कर दिया और कुछ देर के लिए पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं संगीतमय हो उठा।
जन्माष्टमी के उत्साह को चरम पर पहुंचाया दही-हांडी प्रतियोगिता ने। लड़कों की टीम ने शक्ति, संतुलन और सामूहिक प्रयास का प्रदर्शन किया, वहीं लड़कियों की टीम ने भी अपनी फुर्ती, आत्मविश्वास और बेहतर तालमेल से सभी का ध्यान खींचा। दही-हांडी ने विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ-साथ टीम भावना, आपसी विश्वास, धैर्य और लक्ष्य प्राप्ति के लिए मिलकर प्रयास करने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथि कीर्तन आनंद प्रभुजी ने अपने संबोधन में भारतीय वैदिक संस्कृति और मूल्य आधारित शिक्षा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवद्गीता की शिक्षाएं आज के दौर में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मअनुशासन, स्पष्ट सोच और नैतिक मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विशेष रूप से मन पर नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अनुशासित मन मनुष्य का सबसे बड़ा सहयोगी बन सकता है और इसके लिए निरंतर अभ्यास, धैर्य और सजग प्रयास आवश्यक है।
ग्रिफिन्स इंटरनेशनल स्कूल का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा। विद्यार्थियों ने जहां अपनी कला और प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों को करीब से समझने का अवसर भी मिला।
पूरे कार्यक्रम में भक्ति के साथ रचनात्मकता, संस्कृति के साथ शिक्षा और उत्सव के साथ जीवन-मूल्यों का सुंदर मेल देखने को मिला। जन्माष्टमी के बहाने विद्यार्थियों को सत्य, अनुशासन, सहयोग, करुणा और जिम्मेदार जीवन का जो संदेश मिला, वही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
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