तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। झाड़ग्राम के जामबनी ब्लॉक के धरसा ग्राम पंचायत अंतर्गत बसे छोटे से गाँव “जामडहड़ी” में आज स्वास्थ्य का नया सूर्योदय हुआ। पूर्वाशा क्लब के स्नेह-संवर्धन और ट्रॉपिकल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंटल रिसर्च (TIEER) के सहयोग से आरंभ हुआ यह नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर गाँव के जीवन में जैसे नई ऊर्जा का संचार कर गया।
ग्रामवासियों के साथ-साथ आस-पास के पाँच गाँवों और झारखंड सीमा के दो अन्य गाँवों के लोग भी पुलकित मन से इस सेवा महायज्ञ में सम्मिलित हुए। झाड़ग्राम शहर से पधारे दस विद्वान चिकित्सकों ने तपस्वी भाव से अपनी निःस्वार्थ सेवा दी।
कोई सर्वसाधारण रोगों का चिकित्सक, कोई दंत चिकित्सक, तो कोई स्त्री रोग, शिशु रोग, नेत्र व शल्य विषयों के ज्ञाता। उनके साथ छह कुशल तकनीशियन थे, जिन्होंने रक्त में शर्करा से लेकर नेत्रों की दृष्टि तक सबका परीक्षण किया।

यह केवल रोग निदान का केंद्र नहीं था, बल्कि औषधि और आशा दोनों का वितरण स्थल भी बना। मुनियाड़ा, डुमुरिया, कानिमौली, जगन्नाथपुर जैसे गाँवों से उमड़ी जनसमूह ने इस शिविर को रंगमंच बना दिया, जहाँ करुणा और कर्तव्य का नाटक एक साथ खेला गया।
पूर्वाशा क्लब के कार्यकारी अध्यक्ष एवं TIEER के सचिव प्रो. प्रणब साहू ने कहा- “हमने इस प्रयास को संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, 2030 के तीसरे लक्ष्य – “गुड हेल्थ एंड वेलबीइंग” की दिशा में एक छोटा पर दृढ़ कदम माना है।”
उन्होंने स्मरण कराया कि कोविड-19 महामारी के कठिन दिनों में वर्ष 2020 में इस गाँव को TIEER ने गोद लिया था ताकि इसे आत्मनिर्भरता, गरीबी उन्मूलन और शून्य भूख जैसे लक्ष्यों की मिसाल बनाया जा सके।
पर्यावरण की सुषमा और ग्राम्य जीवन की पवित्रता से ओत-प्रोत इस धरती पर 27 सितम्बर 2024 को जामडहड़ी ने ‘ग्राम पर्यटन केंद्र’ के रूप में आत्मप्रकाश किया था। आज वही भूमि स्वास्थ्य और सौहार्द के पुष्पों से फिर खिल उठी है।
चिकित्सक प्रसून घोष ने कहा कि “यह सेवा एक दिन की नहीं, यह निरंतर बहने वाली नदी है।” वहीं प्रसिद्ध चिकित्सिका सुदेष्णा घोष ने कहा कि “जामडहड़ी की निर्मल हवा और आर्थिक प्रगति इसे एक आदर्श ग्राम की राह पर ले जा रही है।”
ग्रामवासी जैसे प्रकृति की गोद में खिलखिलाते बच्चे हों, हर चेहरे पर आभार की रेखाएँ और विश्वास की चमक थीं। गाँव के स्वेच्छासेवक, लगभग बीस की संख्या में, इस आयोजन में प्राणवत बने।
गाँव के कलाकार संतू महतो ने जंगलमहल की कला को उपहार के रूप में चिकित्सकों के हाथों में अर्पित कर दिया। यह धन्यवाद का सजीव प्रतीक था।
ग्राम पंचायत सदस्य बिमलेन्दु महतो और ग्रामवासी दिलीप मांडी ने एक स्वर में कहा कि “यह शिविर हमारे लिये वरदान है, जिसने शरीर के साथ मन को भी स्वस्थ कर दिया है।”
गाँव की श्रावणी मांडी बोलीं कि “हमारी माताओं और बेटियों को डॉक्टर से मिलने का अवसर मिला, यह दिन हमारे जीवन की स्मृतियों में अंकित रहेगा।”
झाड़ग्राम से 35 किलोमीटर दूर बसे इस सीमावर्ती गाँव में हुआ यह आयोजन केवल एक स्वास्थ्य शिविर नहीं, बल्कि मानवता का महोत्सव था। जहाँ औषधि के साथ आत्मा भी उपचारित हुई।
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