JADAVPUR COVER

जादवपुर विश्वविद्यालय में फिर मिटाई गई कार्ल मार्क्स की उक्ति, सियासी विवाद के बीच उठे सवाल

कोलकाता हिन्दी न्यूज | 02 सितम्बर 2026: जादवपुर विश्वविद्यालय में दीवार लिखावट को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। परिसर में कथित विवादित नारों और ग्राफिटी को मिटाए जाने के बाद अब मंगलवार देर रात ओपन एयर थिएटर की दीवार पर लिखी कार्ल मार्क्स की उक्ति भी सफेद रंग से ढक दी गई।

बुधवार को जब यह मामला सामने आया तो विश्वविद्यालय परिसर में एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्ल मार्क्स की उक्ति को आखिर क्यों मिटाया गया और इसे किसने हटाया? फिलहाल इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। यही वजह है कि मामले को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

पहले विवादित नारों और ग्राफिटी को लेकर शुरू हुआ था विवाद

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में दीवार लिखावट को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है। परिसर की कुछ दीवारों पर लिखे नारों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कई जगहों पर लिखावट और ग्राफिटी को सफेद रंग से ढक दिया गया।

कुछ राजनीतिक संगठनों ने इन दीवार लिखावटों को लेकर आपत्ति जताई थी। वहीं, वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से इसका विरोध किया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विश्वविद्यालय परिसर में दीवार लिखावट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।

अब कार्ल मार्क्स की उक्ति भी सफेद रंग से ढकी

इसी विवाद के बीच जादवपुर विश्वविद्यालय के ओपन एयर थिएटर की दीवार पर लिखी कार्ल मार्क्स की उक्ति को मंगलवार देर रात मिटा दिया गया। बुधवार को दीवार के उस हिस्से पर सफेद रंग दिखाई दिया, जहां पहले कार्ल मार्क्स की चार पंक्तियों वाली उक्ति लिखी थी।

यह भी पढ़ें:  ‘खेला होबे दिवस’ : ममता बनर्जी को बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी की उम्मीद

इसके बाद सवाल उठने लगा कि आखिर इस लिखावट को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। खासकर इसलिए क्योंकि कार्ल मार्क्स की उक्त पंक्तियों को सीधे तौर पर उन नारों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जिन्हें लेकर हाल में देशविरोधी होने का आरोप लगाया गया था।

किसने मिटाई लिखावट, अब भी साफ नहीं

कार्ल मार्क्स की उक्ति मिटाए जाने के बाद एक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है—क्या इसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने हटाया या किसी अन्य व्यक्ति अथवा संगठन ने?

फिलहाल इस बारे में आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यदि इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण सामने आता है, तभी तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

इससे पहले भी परिसर में विवादित दीवार लिखावट हटाए जाने के बाद अलग-अलग छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे।

एक ओर जहां दक्षिणपंथी छात्र संगठन इसे वामपंथी या नक्सल समर्थक गतिविधि बता रहे थे, वहीं वामपंथी छात्र संगठनों ने दीवार लिखावट हटाने के कदम का विरोध किया था।

दोबारा लिखी गई थी कार्ल मार्क्स की उक्ति

गौरतलब है कि परिसर में पहले की गई सफेदी के बाद उसी जगह पर किसी ने कार्ल मार्क्स की उक्ति की चार पंक्तियां लिख दी थीं। यह माना जा रहा था कि इसके पीछे वामपंथी विचारधारा से जुड़े छात्र हो सकते हैं। हालांकि, इसे किसने लिखा, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।

वहीं, छात्र संगठनों के बीच इसको लेकर भी मतभेद सामने आए। एक तरफ कुछ संगठनों ने इसे वैचारिक अभिव्यक्ति बताया, तो दूसरी तरफ इसे विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बताया गया।

कुलपति ने भी जताई थी चिंता

इस पूरे विवाद के बीच विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से भी परिसर में अनधिकृत तरीके से दीवार लिखावट, ग्राफिटी और पोस्टर लगाने से बचने की अपील की गई थी।

यह भी पढ़ें:  नीति आयोग की रिपोर्ट में 'ऐतिहासिक' चूक: बंगाल को बताया बिहार, राजनीतिक बवाल

उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों, अधिकारियों और कर्मचारियों से परिसर की दीवारों का मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं करने का आग्रह किया था।

ऐसे में कुलपति की अपील के बाद ही कार्ल मार्क्स की उक्ति को मिटाए जाने की घटना हुई है या नहीं, इसे लेकर भी परिसर में चर्चा चल रही है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध होने की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

जादवपुर विश्वविद्यालय में बढ़ता राजनीतिक तनाव

जादवपुर विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्र राजनीति और वैचारिक बहस के लिए जाना जाता है। ऐसे में परिसर की दीवारों पर लिखे नारे और ग्राफिटी भी अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। हाल के घटनाक्रम ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

एक तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठनों के बीच वैचारिक अभिव्यक्ति और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

फिलहाल कार्ल मार्क्स की उक्ति को मिटाने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

Kolkata News Desk Avatar

Kolkata News Desk

News Editor MA
यह भी पढ़ें:  एचसीजी ईकेओ कैंसर सेंटर कोलकाता ने मेगा साइक्लोथॉन, स्वास्थ्य शिविर और विभिन्न अन्य जागरूकता पहल का आयोजन किया

कोलकाता और पश्चिम बंगाल की ब्रेकिंग न्यूज, स्थानीय घटनाओं, खेल, राजनीति और सामाजिक मुद्दों की खबरों को कवर करता है। हमारी डेस्क टीम 24×7 सक्रिय रहकर पाठकों को ताज़ा और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराती है।

Areas of Expertise: Sports, Politics & West Bengal
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

14 − 12 =