कोलकाता हिन्दी न्यूज | 01 सितम्बर 2026: जादवपुर विश्वविद्यालय पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक और वैचारिक विवादों के केंद्र में है। कैंपस की दीवारों पर कथित ‘देशविरोधी’ नारे लिखे जाने को लेकर विवाद के बाद अब विश्वविद्यालय परिसर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से ‘राष्ट्रवाद सम्मेलन’ आयोजित करने की तैयारी है। यह सम्मेलन आगामी 4 सितंबर को जादवपुर विश्वविद्यालय के त्रिगुणा सेन मंच पर आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता और पार्टी नेता जिष्णु बसु समेत कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है।
विश्वविद्यालय परिसर में हालिया राजनीतिक तनाव और दीवार लेखन को लेकर हुए विवाद के बीच भाजपा का यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दीवार लेखन विवाद के बाद अब कैंपस में राष्ट्रवाद सम्मेलन
जादवपुर विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से दीवारों पर लिखे गए कुछ कथित विवादित नारों को लेकर बहस छिड़ी हुई थी। इनमें ‘रेड सैल्यूट किशनजी’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ और ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे शामिल होने का दावा किया गया था।
इन दीवार लेखनों को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन्हें हटाया गया।
इसी पृष्ठभूमि में अब भाजपा ने विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रवाद सम्मेलन आयोजित करने का फैसला किया है। इससे एक बार फिर जादवपुर विश्वविद्यालय में राजनीतिक गतिविधियों और वैचारिक टकराव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि जादवपुर विश्वविद्यालय लंबे समय से वामपंथी राजनीति का मजबूत केंद्र रहा है।
पार्टी की ओर से कैंपस में कथित ‘देशविरोधी’ गतिविधियों और नारों को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय के सभी छात्र राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होते और बड़ी संख्या में विद्यार्थी केवल पढ़ाई के लिए कैंपस आते हैं।
SFI और ABVP के बीच भी हो चुका है विवाद
अगस्त के मध्य में जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में वामपंथी छात्र संगठन SFI और RSS से जुड़े छात्र संगठन ABVP के बीच विवाद के बाद तनाव की स्थिति बनी थी। दोनों संगठनों की ओर से अलग-अलग जुलूस और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।
जनरल बॉडी (GB) बैठक को लेकर भी कैंपस में तनाव की स्थिति बनी थी। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन का दौर चला। इस दौरान कैंपस के भीतर रात के समय कथित हमले को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए।
इन घटनाओं ने जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
‘रेड सैल्यूट किशनजी’ से लेकर ‘कश्मीर मांगे आजादी’ तक
जादवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर लिखे गए कुछ नारों को लेकर भाजपा ने तीखी आपत्ति जताई थी। पार्टी नेताओं की ओर से सोशल मीडिया पर कथित विवादित दीवार लेखन के वीडियो भी साझा किए गए थे।
भाजपा नेतृत्व का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थान में ऐसे नारों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पार्टी की ओर से कैंपस में राष्ट्रवादी विचारों को मजबूत करने की बात कही जा रही है।
इसी क्रम में अब 4 सितंबर को राष्ट्रवाद सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए इसे केवल एक सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम के बजाय वैचारिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भाजपा के कार्यक्रम से बढ़ सकती है राजनीतिक सरगर्मी
जादवपुर विश्वविद्यालय को लंबे समय से पश्चिम बंगाल की छात्र राजनीति में एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। वामपंथी छात्र राजनीति का यहां मजबूत प्रभाव रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ABVP समेत अन्य छात्र संगठनों ने भी कैंपस में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।
ऐसे समय में भाजपा का सीधे विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रवाद सम्मेलन आयोजित करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी नेताओं की मौजूदगी में सम्मेलन से जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों और कैंपस की राजनीति को लेकर भाजपा की रणनीति का संकेत भी मिलने की संभावना है।
राजनीतिक जानकारों का एक वर्ग इसे भाजपा की उस कोशिश के रूप में देख रहा है, जिसके तहत वह जादवपुर जैसे पारंपरिक वामपंथी प्रभाव वाले कैंपस में राष्ट्रवाद और अपनी वैचारिक राजनीति को प्रमुखता देना चाहती है।
हालांकि, विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। 4 सितंबर को होने वाले सम्मेलन के बाद कैंपस की राजनीति में नए सिरे से राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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