कुमारटुली घाट पर तबला उस्ताद तन्मय बोस और पद्मश्री गोकुल ढाकी के नेतृत्व में आयोजित एक अनोखे ढाकी उत्सव ने परंपरा और नवाचार को एक धागे में पिरोया
कोलकाता। दुर्गा पूजा, बंगाल का सबसे भव्य त्योहार, ढाक की गूंजती तालों के बिना अधूरा है। ढाकी, जो बंगाल के पारंपरिक वादक और पूजा के उत्सव की लय व हृदय के संरक्षक हैं, हर पंडाल में जान भरते हैं, फिर भी उनकी कला अक्सर अनदेखी रह जाती है। इस वर्ष आईटीसी सनराइज ने इस परंपरा को बदलने की दिशा में एक अनोखी पहल की है। सनराइज ढाकी उत्सव एक अद्वितीय सांस्कृतिक पहल है, जो ढाकियों को दुर्गा पूजा के हृदय के रूप में सम्मानित करती है और ब्रांड के बंगाल के लोगों के साथ गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करती है।
महालय के शुभ दिन पर सनराइज ने कुमार्टुली घाट पर ऐतिहासिक सनराइज ढाकी उत्सव के साथ दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत की, जहां अनेक ढाकी एक साथ मिलकर तालमेल के साथ अपनी कला प्रस्तुत किए। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व विश्वप्रसिद्ध तालवादक तन्मय बोस ने किया, जिनके साथ पद्मश्री गोकुल ढाकी भी शामिल थे। दोनों ने मिलकर विशेष रूप से रचित सनराइज दुर्गा पूजा एंथम प्रस्तुत किया, जो बंगाल के सबसे प्रिय त्योहार को समर्पित हार्दिक सम्मान है।
कुमारटुली घाट का माहौल धरतीकंपित ढाक की तालों से गूंज उठा और पूरा नदी किनारा ऊर्जा से भर गया। यह स्थान अपने आप में गहरा महत्व रखता है : कुमारटुली, जो प्रतिमा निर्माण की जन्मस्थली है, महालय के दिन तर्पण और चोख्खुदान जैसे पावन अनुष्ठानों का साक्षी बनता है, जो माँ दुर्गा के जागरण का प्रतीक है।
इसी भक्ति और कला से भरे वातावरण में ढाक की ताल केवल एक प्रस्तुति न रहकर उससे कहीं अधिक बन गई, वह उस परंपरा के प्रति एक सामूहिक नमन बन गई, जो पूजा की जीवंतता और परंपरा को संजोए रखती है।
अभियान पर टिप्पणी करते हुए आईटीसी स्पाइसेस के बिजनेस हेड, पीयूष मिश्रा ने कहा, “दुर्गा पूजा महोत्सव सिर्फ़ उत्सव नहीं है, यह लय और परंपरा से बुनी हुई एक भावना है। ढाकी उत्सव के जरिए सनराइज का उद्देश्य उन ढाकियों को केंद्र में लाना है जो इस उत्सव की ध्वनि-संस्कृति को परिभाषित करते हैं।
इतने सारे कलाकारों को एक साथ प्रदर्शन करते देखना एक ऐसी धरोहर है, जो आने वाले वर्षों तक इन उत्सवों में गूंजती रहेगी। इस प्रस्तुति ने सनराइज की इस प्रतिबद्धता को और मजबूत किया कि वह बंगाल की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखेगा और ढाक की अनंत लय को सम्मान और पहचान के प्रतीक के रूप में ऊँचाई देगा।”
विश्वविख्यात तालवादक तन्मय बोस ने कहा, “आईटीसी सनराइज के ढाकी उत्सव का हिस्सा बनना मेरे लिए वास्तव में एक विशेष अवसर है। इतने ढाकियों को एक साथ ताल में प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करना एक ऐसा अनुभव था जिसे मैं हमेशा संजो कर रखूँगा। जो मुझे सबसे अधिक खुशी देता है वह यह है कि इस पहल ने इन कलाकारों को वह मान्यता दी है जिसके वे लंबे समय से हकदार थे, और साथ ही एक ऐसा क्षण भी सृजित किया, जो बंगाल की पूजा के हृदयस्पंदन का उत्सव मनाता है।
पद्मश्री गोकुल ढाकी ने कहा, “हम ढाकियों के लिए पूजा जीवन है। अपनी कला को इस स्तर पर, इस पावन वातावरण में मनाए जाने को देखना शब्दों से परे सम्मान है। सनराइज की यह पहल सुनिश्चित करती है कि हमारी लय बंगाल की संस्कृति की धड़कन के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी।”
इस अनोखी पहल के साथ, सनराइज ने न केवल एक उत्सव एंथम रचा है, बल्कि एक नई सांस्कृतिक विरासत भी स्थापित की है, ऐसी विरासत जो परंपरा का उत्सव मनाती है, कलाकारों का सम्मान करती है और बंगाल की जीवंत उत्सव भावना को मजबूत करती है।
पिछले कुछ वर्षों में, सनराइज ने लगातार ऐसी पहलों का समर्थन किया है जो समावेशिता और सांस्कृतिक गर्व को मनाती हैं। बंगाल की पहली महिला पुरोहित को दुर्गा पूजा में भाग लेने का अवसर देने से लेकर, दुर्गातिनाशिनी अभियान के तहत महिलाओं को बुनियादी आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करने तक, ब्रांड ने पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए परंपरा का सम्मान करने के प्रयास किए हैं।
इस वर्ष, ऐतिहासिक ढाकी उत्सव के साथ, सनराइज ने एक और गौरवपूर्ण मुकाम हासिल किया – उन ढाकियों को प्रोत्साहित करना जिनकी तालें दुर्गा पूजा को जीवंत बना देती हैं। बंगाल से जन्मे एक ब्रांड के रूप में, सनराइज राज्य की समृद्ध विरासत और अनंत परंपराओं को संरक्षित और मनाने के लिए गहराई से प्रतिबद्ध है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि इस संस्कृति के धरोहर पालक हमेशा वह सम्मान और मान्यता पाएं, जिनके वे वास्तव में हकदार हैं।
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