Yogi Adityanath

भारत के हर राज्य को यूपी नज़ूल संपत्ति अध्यादेश 2024 मॉडल का संज्ञान लेना जरूरी परंतु क्रियान्वयन में संशय!

सख़्त नज़ूल बिल भूमाफियाओं, राजनीतिक रसूखदारों, नौकरशाहों नेताओं, अपराधियों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का महत्वपूर्ण कदम
उत्तर प्रदेश नज़ूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन व उपयोग) अध्यादेश 2024 को सख़्ती से लागू करने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है- एड. के.एस. भावनानी

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक स्तर पर दुनियां के हर देश में एक संविधान बना होता है और अपना केंद्रीय कानून नियमों विनियमों का एक सेट बना होता है तथा उस देश के हर राज्यों में भी लोकल स्तर पर अपने कानून नियम विनियम बने होते हैं, जिसके आधार पर वे शासन प्रशासन के नियंत्रण से सत्ता को चलाया जाता है। आज हम इन कानूनो की बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में 29 जुलाई से 2 अगस्त 2024 तक चले मानसून सत्र में विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिबंध (संशोधन) विधेयक 2024, उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक 2024 व उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लाभ प्रयोजनार्थ प्रबंधन व उपयोग) अध्यादेश 2024 विधानसभा से तो पारित हुए परंतु, सबसे बड़ी बात इनमें से नजूल संपत्ति विधेयक 2024 विधान परिषद में पार्टी का बहुमत होने के बावजूद गिर गया! जिस पर पूरी दुनिया को हैरानी हुई।

बता दें हालांकि नजूल संपत्ति अधिनियम करीब-करीब सभी राज्यों में अपने-अपने अनुसार बनाए गए हैं, परंतु इस बार यूपी में इसे संशोधित कर सख्त कर दिया गया था, जो शायद राजनीतिक रसूखदारों, नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा हितधारकों को पसंद नहीं आया होगा। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि यह तो होना ही था। अगर हम पूरे भारत के किसी भी शहर या यू कहे किसी भी ग्राम पंचायत स्तर पर भी देखें तो हमें नजूल की जमीन पर किसी रसूखदार नेताओं, कार्यकर्ताओं, भूमाफियाओं, अपराधिक प्रवृत्तिवालों नौकरशाहों का कब्जा मिलेगा! तथा करीब-करीब अधिकतम 30 वर्षों की लीज वाली जमीनों पर शर्तों का उल्लंघन ही मिलेगा, जिसमें डोमेस्टिक उद्देश्य के लिए गई जमीन कमर्शियल, होटल लाइन, लॉजिंग बोर्डिंग सहित अनेको अन्य प्रयोगों के लिए प्रयुक्त ही होती हुई मिलेगी।

यहां तक कि हमारी छोटी राइस सिटी गोंदिया नगरी में भी यही हाल है, तो मेट्रो सिटी से लेकर गांव तक भी यही स्थिति होगी। हालांकि यह अध्यादेश उन पर नकेल कसने के लिए पूरा फिट है तथा सभी राज्यों को इस अध्यादेश का अनुसरण कर अपने नजूल अधिनियमों में संशोधन सहित नजूल कानून बनाना चाहिए। परंतु यह पूर्ण क्रियान्वयन होगा इस पर संशय है! या फिर इसे लागू करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा, क्योंकि इस कानून के घेरे में साधारण आदमी से लेकर भूमाफिया व नेतागिरी का रसूक रखने वाला भी आएगा याने यह कानून लागू नहीं हो पाएगा। चूंकि सख़्त नजूल बिल में भूमाफियाओं, राजनीतिक रसूखदारों, नौकरशाहों, नेताओं, आपराधिक प्रवृत्ति वालों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का महत्वपूर्ण कदम है तथा भारत में हर राज्य यूपी नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन व उपयोग) अध्यादेश 2024 मॉडल का संज्ञान ले तो लें, परंतु क्रियान्वयन कर पाएंगे, इसमें संशय है! इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनॉर्थ प्रबंधन व उपयोग) अध्यादेश 2024 को सख़्ती से लागू करने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है?

साथियों बात अगर हम संशोधित नजूल संपत्ति अध्यादेश 2024 को बनाने के कारणों की करें तो,1993 में नजूल संपत्ति को लेकर बने बोहरा कमिशन ने अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें राजनेता, अपराधी, भूमि माफिया और नौकरशाह के इसी संगठित गिरोह पर चिंता जताई गई थी। इस रिपोर्ट में यह कहा गया था कि बड़े शहरों में आय का मुख्य स्रोत अचल संपत्ति से संबंधित भूमि और भवनों पर जबरन कब्जा करना है, मौजूदा निवासियों किराएदारों को बाहर निकालकर सस्ते दामों पर ऐसी संपत्तियों को खरीदना, बेचना है जो व्यवसाय का रूप ले चुका है, यही नहीं इस रिपोर्ट में राजनेता, माफिया, अफसरों और अपराधियों के नेक्सस पर भी चिंता जताई गई थी।

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प्रस्तावित नजूल कानून गवर्नमेंट ग्रान्ट एक्ट 1895 रिपील हो जाने के फलस्वरूप समस्त नजूल नीतियां स्थगित होने के दृष्टिगत व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए दृष्टिगत राज्य सरकार को नजूल भूमि को संरक्षित करना चाहिए। इसके लिए सरकार ने उत्तर प्रदेश नजूल सम्पत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंध और उपयोग) अध्यादेश, 2024 लागू किया। नियमानुसार इसी को कानून बनाने के लिए विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया गया था। प्रस्तावित कानून में कहीं भी किसी निवासरत व्यक्ति को बेदखल करने की बात नहीं है, बल्कि यह कानून गरीब तबके के पुनर्वास के लिए कानून बनाने और उन्हें पुनर्वासित करने का अधिकार भी सरकार को देता है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में करीब 72 से 75 हज़ार एकड़ नजूल की जमीन है जिसकी बाजार की कीमत 2 लाख करोड़ से ज्यादा है। नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कर लेना, अगर किसी के नाम बेशकीमती नजूल की जमीन की लीज़ है और वो अगर कमजोर है या आसान शिकार है तो उसे हड़प लेना, भू-माफिया द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार कर कौड़ियों के भाव में अपने पक्ष में फ्री होल्ड करा लेने का खेल लंबे वक्त से चल रहा है? अंग्रेजों के वक्त की लीज़ की हुई जमीन का अगर कोई वारिस नहीं है तो शहर के बड़े भू-माफिया और अपराधी पहले उस पर अवैध कब्जा करते हैं और फिर फर्जी फ्री होल्ड कराने का गोरखधंधा चलता है, जिसमें अफसरों से लेकर भूमाफियाओं और नेताओं की मिली भगत होती है और लीज की उस ज़मीन पर बड़े-बड़े मार्केट कंपलेक्स और व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र बनाकर सैकड़ों हजार करोड़ का कारोबार फलता फूलता है।

यूपी सरकार ने कई बड़े माफिया पर कार्रवाई की, एक प्रयागराज के सबसे बड़े माफिया और भू माफिया के तौर पर जाना जाता था, जिसने प्रयागराज के सिविल लाइन से लेकर लखनऊ के हजरतगंज तक न जाने कितने नजूल की जमीनों पर कब्जे किए और ऐसे ही कारोबार की मदद से हजारों करोड़ की संपत्ति बना ली गई। राजनीतिक रसूख भी इन पैसों से मिलता है, अन्यों ने भी लखनऊ सहित दूसरे कई बड़े शहरों में नजूल की संपत्तियां कब्जा की और अपने जमीन व्यवसाय का बड़ा कारोबार खड़ा कर लिया।

साथियों बात अगर हम संशोधित नज़ुल संपत्ति अधिनियम 2024 के मुख्य बिंदुओं की करें तो, नजूल भूमि विधेयक के संबंध में महत्वपूर्ण बिंदु।
(1) इस एक्ट के प्रभावी होने के बाद से उत्तर प्रदेश में किसी भी नजूल भूमि कोकिसी प्राइवेट व्यक्ति अथवा प्राइवेट एंटिटी के पक्ष में फ्री होल्ड नहीं किया जाएगा। नजूल भूमि केवल पब्लिक एंटिटी, राज्य अथवा केंद्र सरकार के विभागों अथवा स्वास्थ्य, शिक्षा या सामाजिक सहयोग से संबंधित सरकारी संस्थानों को ग्रांट किया जाएगा।
(2) खाली पड़ी नजूल भूमि जिसकी लीज़ अवधि समाप्त हो रही है, उसे फ्री होल्ड न करके सार्वजनिक हित की परियोजनाओं जैसे अस्पताल विद्यालय सरकारी कार्यालय आदि के लिए उपयोग किया जाएगा।

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(3) ऐसे पट्टाधारक जिन्होंने 27, जुलाई 2020 तक फ्री होल्ड के लिए आवेदन कर दिया है और निर्धारित शुल्क जमा कर दिया है, उनके पास यह विकल्प होगा कि वह लीज अवधि समाप्त होने के बाद अगले 30 वर्ष की अवधि के नवीनीकरण करा सकें। बशर्ते, उनके द्वारा मूल लीज़ डीड का उल्लंघन न किया गया हो।
(4) ऐसी किसी भी भूमि पर जहां कि आबादी निवासरत है,अथवा जिसका व्यापक जनहित में उपयोग किया जा रहा है, उसे नहीं हटाया जाएगा। वर्तमान में उपयोग लाई जा रही भूमि से किसी की बेदखली नहीं की जाएगी।

(5) ऐसे सभी पट्टाधारक जिन्होंने लीज़ अवधि में लीज़ डीड का उल्लंघन नहीं किया है, उनका पट्टा नियमानुसार जारी रहेगा।
(6) कोई भी भवन जो कि नजूल की भूमि पर बनाई गई है और व्यापक जनहित में यदि उसे हटाया जाना आवश्यक होगा तो सरकार द्वारा प्रभावित व्यक्ति को भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के उपबंध के अनुसार ऐसे पट्टाधारक द्वारा की गयी उपरिसंरचना या बनाये गये भवन के लिये प्रतिकर दिया जायेगा।

(7) यह अधिनियम सरकार को अधिकार देती है कि वह नजूल की भूमि पर काबिज़ गरीब तबके के हितों को संरक्षण देते हुए उनके पक्ष में कानून बना सके एवं उन्हें पुनर्वासित कर सके।
(8) ऐसे सभी मामलों में जहां पूर्ण स्वामित्व विलेख पहले से ही निष्पादित हो गया है और यह पता चलता है कि ऐसा पूर्ण स्वामित्व विलेख कपट करके या तथ्यात्मक सूचनाओं को छुपाकर निष्पादित किया गया था जिसका ऐसा पूर्ण स्वामित्व स्वीकृत करने के सरकार के विनश्चय पर प्रभाव पड़ा था तो सरकार को ऐसे पूर्णस्वामित्व विलेख को निरस्त करने और भूमि और भवन को पुनः कब्जा करने की शक्ति होगी।

साथियों बात अगर हम नज़ूल संपत्तियों को समझने की करें तो, नजूल की जमीनें कभी भी किसी व्यक्ति विशेष की नहीं होती। आजादी के पहले और आजादी के बाद इन जमीनों के लीज और पट्टे लोगों को दिए गए, जो तब भी बेशकीमती थे और आज भी बेशकीमती है, क्योंकि नजूल जमीनों का बड़ा हिस्सा बड़े मुख्य शहरों के बीचो-बीच मौजूद है और इसके बंदर बांट का खेल अपराधियों भूमाफियाओं राजनेताओं और अफसर के मिली भगत से दशकों से चल रहा है। उत्तर प्रदेश पार्टी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है, ये अब कोई ढंकी छुपी बात नहीं है, पर इस हफ्ते की शुरुआत में ऐसा लगा था कि केंद्र के हस्तक्षेप से सब कुछ सुलझा लिया गया है, पर मर्ज की जितनी दवा हो रही है उतनी ही बढता जा रहा है। मामला इतना उलझ गया कि यूपी सरकार द्वारा पेश नजूल भूमि विधेयक को विधानसभा में पास होने के बाद विधान परिषद में रोक दिया गया। जब कि विधान परिषद में भी सरकार को पूर्ण बहुमत है। दरअसल सरकार यूपी की नजूल की जमीन को विकास योजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मंशा से यूपी नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन और उपयोग) विधेयक, 2024 लेकर आई थी।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी : संकलनकर्ता, लेखक, कवि, स्तंभकार, चिंतक, कानून लेखक, कर विशेषज्ञ

सीएम की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक से नजूल भूमि विधेयक बिल को मंजूरी दी गई। इसके बाद विधेयक को विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री ने पेश कर दिया। विधेयक पेश करते हुए सरकार ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत देने के लिए यह कानून लाया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि गरीबों से जमीन खाली करने का प्रावधान विधेयक में नहीं लाया गया है। सार्वजनिक महत्व की विकास योजनाओं के कारण भूमि की निरंतर और तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए यह कानून लाया जा रहा है, इसके बावजूद भी गरीबों के सिर से छत छिन जाएगी, की बात करके अचानक जिस तरह कानून को बनने से रोक दिया गया, वो निसंदेह पार्टी के लिए सही संदेश नहीं देता है। विधेयक को रोकना था तो आपस में बातचीत करके पहले ही रोक लिया गया होता, कम से कम विपक्ष को हमले करने का मौका तो नहीं मिलता।

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत के हर राज्य को यूपी नज़ूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन व उपयोग) अध्यादेश 2024 मॉडल का संज्ञान लेना जरूरी परंतु क्रियान्वयन में संशय? सख़्त नज़ूल बिल भूमाफियाओं राजनीतिक रसूखदारों नौकरशाहों नेताओं अपराधियों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का महत्वपूर्ण क़दम। उत्तर प्रदेश नज़ूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंधन व उपयोग) अध्यादेश 2024 को सख़्ती से लागू करने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ सकता है।

(स्पष्टीकरण : इस आलेख में दिए गए विचार लेखक के हैं और इसे ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है।)

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