Iran Crisis

खामेनेई ने प्रदर्शनों में मौतों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार

तेहरान, 17 जनवरी 2026: ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने शनिवार को दिए एक भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे जिम्मेदार ठहराया है।

खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों, नुकसान और देश की बदनामी के लिए ट्रंप और उनके समर्थक जिम्मेदार हैं। उन्होंने माना कि प्रदर्शनों में हजारों लोग मारे गए हैं, लेकिन मौतों के लिए “दंगा फैलाने वाले” और विदेशी ताकतें भी जिम्मेदार हैं।

खामेनेई का तीखा हमला

खामेनेई ने भाषण में कहा कि प्रदर्शनकारियों को भड़काने और हिंसा फैलाने का काम अमेरिका और उसके सहयोगियों ने किया।

उन्होंने ट्रंप के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने को कहा और ईरानी सरकार पर सैन्य दखल की धमकी दी थी।

खामेनेई ने इसे “घृणित विदेशी हस्तक्षेप” करार दिया और कहा कि ईरान इस तरह की साजिशों के सामने कभी नहीं झुकेगा।

प्रदर्शनों में कितने मारे गए?

ईरान में 28 दिसंबर को शुरू हुए ये प्रदर्शन पहले आर्थिक संकट और ईरानी रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ थे, लेकिन जल्द ही ये पूरे देश में फैल गए और सरकार विरोधी नारे लगने लगे।

अमेरिका स्थित ईरानी ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (एचआरएएनए) के अनुसार, अब तक प्रदर्शनों में 3090 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया है, लेकिन खामेनई ने भाषण में “हजारों मौतें” होने की बात स्वीकार की।

प्रदर्शनों का कारण 

प्रदर्शन की शुरुआत तेहरान में स्थानीय व्यापारियों द्वारा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल की बड़ी गिरावट के विरोध से हुई थी।

जल्द ही ये विरोध पूरे ईरान में फैल गया और लोग महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

कई शहरों में हिंसा भड़की, सरकारी इमारतों पर हमले हुए और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर ईरानी सरकार हिंसा करती है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

ईरान ने इसे “आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप” बताया और संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई। खामेनेई के भाषण के बाद तनाव और बढ़ने की आशंका है।

ईरान में ये प्रदर्शन 2017-18 के बाद सबसे बड़े और हिंसक हैं। क्या ये आंदोलन सरकार को झुकने पर मजबूर करेगा या दब जाएगा? दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं।

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