निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: दिल्ली में रात भर पंखा चलता है, कर्नाटक में सोलर पार्क चमक रहे हैं, बिहार स्मार्ट मीटर लगा रहा है – राजस्थान ग्रीन टैरिफ सस्ता कर रहा है।
भारत की बिजली कहानी अब एक जैसी नहीं रही। यह 21 राज्यों की अलग-अलग रफ्तार वाली कहानी बन चुकी है।
नई रिपोर्ट में 21 राज्यों का आकलन Institute for Energy Economics and Financial Analysis (IEEFA) और Ember की संयुक्त रिपोर्ट ‘Indian States’ Electricity Transition 2026’ ने देश की 95% बिजली मांग वाले 21 राज्यों का विश्लेषण किया है।

रिपोर्ट में तीन मुख्य पैमानों पर राज्यों को परखा गया:
- डीकार्बनाइजेशन (नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा और उत्सर्जन तीव्रता)
- पावर इकोसिस्टम की तैयारी (डिस्कॉम की स्थिति, सप्लाई विश्वसनीयता, रूफटॉप सोलर)
- मार्केट एनएबलर्स (ईवी, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन टैरिफ, ऊर्जा भंडारण)
शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य
डीकार्बनाइजेशन में कर्नाटक पहले नंबर पर। हिमाचल प्रदेश और केरल भी मजबूत। पावर इकोसिस्टम में दिल्ली और हरियाणा आगे। बिहार ने स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन में तेजी दिखाई (78% स्वीकृत मीटर लगे)। छत्तीसगढ़ में बिजली कमी सिर्फ 0.07%।
मार्केट एनएबलर्स में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान मजबूत। दिल्ली में ईवी अपनाने की दर 11.6% (सबसे ज्यादा), असम 11%, बिहार 8.2%।
कुछ राज्यों में अभी शुरुआती चरण
पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और झारखंड अभी शुरुआती दौर में हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों को संस्थागत क्षमता निर्माण, डिस्कॉम वित्त सुधार और स्पष्ट दीर्घकालिक नीति संकेतों की जरूरत है।
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की राय
EEFA की साउथ एशिया निदेशक विभूति गर्ग ने कहा: “राज्यों के बीच अंतर स्वाभाविक है। संसाधन, वित्तीय स्थिति, ऐतिहासिक ढांचा और संस्थागत क्षमता अलग-अलग है। आगे की रणनीति राज्य-विशेष अंतर को समझकर बनानी होगी।”
Ember की ऊर्जा विश्लेषक रुचिता शाह ने कहा: “भारत की बिजली यात्रा अब मल्टी-स्पीड ट्रांजिशन बन चुकी है। हर राज्य अलग क्षेत्र में नेतृत्व कर रहा है। इसलिए नीतियां भी लक्ष्यित होनी चाहिए।”
मुख्य निष्कर्ष
- भारत की बिजली व्यवस्था अब एक लकीर नहीं – कई रेखाएं हैं।
- कहीं सोलर तेज, कहीं डिस्कॉम सुधर रहे, कहीं ईवी सड़कों पर बढ़ रहे।
- बदलाव हो रहा है, बस रफ्तार हर राज्य में अलग है।
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