निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता : भारत में सोलर मैन्युफैक्चरिंग का माहौल इन दिनों अजीब तरह की दो आवाज़ें सुन रहा है. एक तरफ जश्न, क्योंकि देश ने पहली बार polysilicon और wafer जैसे मुश्किल हिस्सों में भी वास्तविक क्षमता खड़ी करना शुरू किया है.
दूसरी तरफ एक चिंता, क्योंकि ये क्षमता अभी अपनी पूरी ताकत से चल ही नहीं पा रही. यह दोहरी तस्वीर सामने रखी है IEEFA (Institute for Energy Economics and Financial Analysis) और JMK Research की नई संयुक्त रिपोर्ट ने, जिसे आज जारी किया गया.
PLI स्कीम ने दी रफ़्तार
रिपोर्ट के अनुसार सरकार की Production Linked Incentive (PLI) स्कीम ने सोलर उद्योग को नई ऊर्जा दी है।

- 2021 में 4,500 करोड़ रुपये
- 2022 में 19,500 करोड़ रुपये
- कुल मिलाकर 24,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन ने उद्योग को लंबे समय बाद मजबूत आधार दिया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि— PLI के तहत घोषित क्षमता का केवल आधा हिस्सा ही अभी ऑपरेशनल है।
रिपोर्ट कहती है कि सरकार की Production Linked Incentive यानी PLI स्कीम ने सोलर सेक्टर को नई गति ज़रूर दी है. 2021 के 4,500 करोड़ रुपये से शुरू होकर, 2022 में 19,500 करोड़ रुपये और फिर कुल 24,000 करोड़ के पैकेज ने उद्योग को लंबे समय बाद ऐसा प्रोत्साहन दिया, जिसकी कमी बरसों से महसूस हो रही थी. लेकिन जमीन पर तस्वीर उतनी सरल नहीं.
PLI में जितनी क्षमता का दावा किया गया था, उसका आधा हिस्सा ही अभी ऑपरेशनल है. रिपोर्ट के मुताबिक जून 2025 तक देश ने 3.3 GW polysilicon, 5.3 GW wafer, 29 GW solar cell और करीब 120 GW module क्षमता खड़ी कर ली है.
📊 जून 2025 तक भारत की सोलर क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार देश ने अब तक—
- 3.3 GW polysilicon
- 5.3 GW wafer
- 29 GW solar cell
- 120 GW module क्षमता
स्थापित कर ली है। यह पहली बार है जब भारत ने upstream वैल्यू चेन में इतनी बड़ी छलांग लगाई है। लेकिन समस्या यह है कि—
- घोषित 65 GW मॉड्यूल क्षमता के मुकाबले
- केवल 31 GW ही चालू है।
पहली बार upstream वैल्यू चेन में ये प्रगति नोट करने लायक है. पर IEEFA–JMK Research साफ कहती है कि यह उपलब्धि अपनी पूरी ताकत में तब बदलेगी जब घोषित 65 GW मॉड्यूल क्षमता के मुकाबले महज़ 31 GW की चालू क्षमता जैसी खाइयों को भरा जाएगा. निवेश के लक्ष्य और वास्तविक निवेश के बीच का फर्क भी बड़ा है. अनुमानित 94,000 करोड़ के मुकाबले अब तक 48,120 करोड़ रुपये ही लगे हैं.
यह रिपोर्ट, जिसे लिखा है आईईईएफ़ए की विभूति गर्ग और जेएमके रिसर्च के प्रभाकर शर्मा, चिराग तेवानी और अमन गुप्ता ने, यह भी चेतावनी देती है कि अगर विस्तार समय पर नहीं हुआ तो कंपनियाँ 41,834 करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान झेल सकती हैं. रिपोर्ट के लेखकों का तर्क स्पष्ट है.
💰 निवेश का लक्ष्य और वास्तविक निवेश में बड़ा अंतर
रिपोर्ट बताती है कि— अनुमानित निवेश: 94,000 करोड़ रुपये
- अब तक वास्तविक निवेश: 48,120 करोड़ रुपये यानी लगभग आधा निवेश अभी भी लंबित है। अगर विस्तार समय पर नहीं हुआ, तो कंपनियों को 41,834 करोड़ रुपये तक का संभावित नुकसान हो सकता है।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती upstream से आ रही है, जहाँ polysilicon और wafer जैसे हिस्सों के लिए देश अब भी लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर है. global कीमतों में तेज गिरावट भारतीय निर्माताओं की लागत-प्रतिस्पर्धा को और मुश्किल बनाती है. ऊपर से तकनीकी उपकरणों और skilled मनपावर की कमी तस्वीर को और जटिल बनाती है.
⚠️ सबसे बड़ी चुनौती:
रिपोर्ट के लेखकों— विभूति गर्ग (IEEFA), प्रभाकर शर्मा, चिराग तेवानी और अमन गुप्ता (JMK Research)—का कहना है कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती upstream में है।
प्रमुख समस्याएँ:
- polysilicon और wafer के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भरता
- global कीमतों में गिरावट से भारतीय निर्माताओं की लागत-प्रतिस्पर्धा कमजोर
- तकनीकी उपकरणों की कमी
- skilled manpower की कमी
ये सभी कारक भारत की सोलर सप्लाई चेन को जटिल बनाते हैं।
IEEFA और JMK Research का आकलन है कि भारत ने दिशा सही पकड़ ली है, पर रास्ता आसान नहीं. दुनिया की सोलर सप्लाई चेन जिस तेज़ी से बदल रही है, उसमें भारत के पास मौका भी है और चुनौती भी. मौका इस बात का कि वह वैश्विक खिलाड़ी बन सके.
🌍 भारत के सामने मौका भी, चुनौती भी
IEEFA–JMK Research का आकलन है कि—
- भारत ने सही दिशा पकड़ ली है
- लेकिन वैश्विक सोलर सप्लाई चेन जिस तेज़ी से बदल रही है, उसमें तेज़ और समन्वित सुधार जरूरी हैं
भारत तभी वैश्विक खिलाड़ी बन सकता है जब— upstream, downstream, तकनीक, वित्त और नीति—सभी स्तंभ एकसाथ मजबूत हों।
चुनौती इस बात की कि ऐसा तभी होगा जब upstream, downstream, तकनीक, वित्त और नीति—सभी स्तंभ एकसाथ मजबूत हों. रिपोर्ट का निचोड़ यही कहता है कि PLI ने दरवाज़ा खोल दिया है, पर कमरे को रोशन करने के लिए अभी काफी काम बाकी है.
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।



