In 2012, Manmohan Singh reduced the price of cancer medicine, taking such a bold step.

2012 में मनमोहन सिंह ने घटाई थी कैंसर की दवा की कीमत, उठाया ऐसा साहसिक कदम

कोलकाता | 26 दिसंबर 2025: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवा Nexavar (Sorafenib Tosylate) की ऊंची कीमत को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज़ है। जर्मनी की कंपनी Bayer द्वारा बनाई जाने वाली इस दवा की एक महीने की कीमत पहले करीब ₹2.8 लाख थी।

2012 में तत्कालीन UPA सरकार ने इस दवा पर “Compulsory Licence” जारी कर एक ऐतिहासिक फैसला लिया था, जिससे इसकी कीमत ₹2.8 लाख से घटकर ₹8,800 प्रति माह रह गई थी।

📉 क्या था 2012 का फैसला?

  • दवा निर्माता: जर्मन कंपनी Bayer
  • भारतीय कंपनी: Natco Pharma को लाइसेंस दिया गया
  • कानूनी आधार: भारतीय पेटेंट कानून की धारा 84
  • परिणाम: कीमत में 97% की कटौती, हजारों मरीजों को राहत

इस फैसले को WHO और WTO ने जनहित में वैध बताया। भारत को तब “Pharmacy of the Developing World” की उपाधि भी मिली थी।

🔹 कीमत में 97% तक कमी

सरकार के इस फैसले के बाद Nexavar की कीमत ₹2.8 लाख से घटकर ₹8,800 प्रति माह रह गई। इससे कैंसर के हजारों मरीजों को इलाज का नया अवसर मिला। यह पहली बार था जब भारत ने किसी विदेशी दवा कंपनी के पेटेंट के खिलाफ इस तरह का कदम उठाया था।

📜 क्या है Compulsory Licence?

भारतीय पेटेंट कानून, 1970 की धारा 84 के तहत सरकार किसी कंपनी को यह अधिकार दे सकती है कि अगर कोई दवा बहुत महंगी है या पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है, तो दूसरी कंपनी को सरकारी अनुमति से वही दवा बनाने की इजाजत दी जा सकती है।

🛑 2014 के बाद से कोई नया लाइसेंस क्यों नहीं?

2014 में नई सरकार के आने के बाद अब तक किसी भी दवा पर Compulsory Licence जारी नहीं किया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि उसने इसके बदले “जन औषधि योजना”, “मेक इन इंडिया”, और “NPPA (National Pharmaceutical Pricing Authority)” जैसे कदम उठाए हैं ताकि दवाएं सस्ती हों। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पेटेंट वाली महंगी दवाओं के मामले में इन योजनाओं का असर सीमित रहा है।

🔹 विशेषज्ञों की राय

दवा नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास अभी भी Compulsory Licence देने का अधिकार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और व्यापारिक समझौतों की वजह से सरकारें ऐसा कदम उठाने से बचती हैं।

“Nexavar केस ने यह साबित किया था कि भारत जरूरत पड़ने पर मानव जीवन को पेटेंट से ऊपर रख सकता है,” दिल्ली स्थित एक स्वास्थ्य नीति विश्लेषक ने कहा। “लेकिन पिछले एक दशक में सरकारों ने वही साहस नहीं दिखाया।”

📊 तुलना एक नज़र में

सरकार वर्ष लाइसेंस जारी दवा परिणाम
मनमोहन सिंह (UPA) 2012 हाँ Nexavar (Bayer) कीमत 97% कम
नरेंद्र मोदी (NDA) 2014–2025 नहीं कोई नया लाइसेंस नहीं

❓ सवाल अब भी बाकी

भारत में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाएं आज भी कई मरीजों की पहुंच से बाहर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार फिर से Compulsory Licence नीति को सक्रिय करे, तो लाखों गरीब मरीजों को राहत मिल सकती है।

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