निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: भारत इस समय दोहरी मार झेल रहा है — दिन की भीषण गर्मी और रात की उमस भरी गर्म हवा। उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री तक पहुंच चुका है, लेकिन असली चिंता अब रातों को लेकर है।
कई शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री के करीब पहुंच रहा है, जिससे लोग पसीने में सो रहे हैं और सुबह उठते ही थकान महसूस कर रहे हैं।
क्लाइमेट ट्रेंड्स की नई रिपोर्ट “Why India’s heatwaves feel more brutal than before” ने साफ चेतावनी दी है कि भारत की गर्मी अब सिर्फ “हॉट” नहीं रही, बल्कि “अनएस्केपेबल” (जिससे बचना मुश्किल) होती जा रही है।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
- भारत के कोर हीटवेव ज़ोन (राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र) में हीटवेव की आवृत्ति और अवधि दोनों बढ़ रही हैं।
- 1961 से अब तक इन इलाकों में हीटवेव की आवृत्ति हर दशक 0.1 दिन बढ़ी है, जबकि अवधि 0.44 दिन प्रति दशक बढ़ी है।
- 2010-2024 के बीच देश में औसत न्यूनतम तापमान (रात का तापमान) 0.21 डिग्री प्रति दशक बढ़ा है।
- 36 में से 35 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रातें गर्म हो रही हैं।
- 2015-2019 के मुकाबले 2020-2024 के बीच औसत आर्द्रता (नमी) 67.1% से बढ़कर 71.2% हो गई है।
क्यों बढ़ रही है रात की गर्मी?
मौसम विज्ञानी महेश पलावत (स्काईमेट) कहते हैं कि राजस्थान और पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से आने वाली गर्म, सूखी हवाएं उत्तर और मध्य भारत को प्रभावित कर रही हैं। दिन गर्म हो तो रातें भी ठंडी नहीं हो पातीं।
इसके अलावा:
- बढ़ती नमी शरीर के पसीने को सूखने नहीं देती, जिससे ठंडक महसूस नहीं होती।
- शहरीकरण (कंक्रीट, डामर, कम पेड़) शहरों को हीट ट्रैप बना रहा है। कई शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों से 2 से 10 डिग्री ज्यादा गर्म हैं।
- सूखी मिट्टी सूरज की ऊर्जा को हवा को गर्म करने में इस्तेमाल करती है।
स्वास्थ्य और जीवन पर असर
WHO के अनुसार घर के अंदर तापमान 24 डिग्री से ऊपर नहीं होना चाहिए। लेकिन भारत के कई हिस्सों में रात का तापमान इससे कहीं ज्यादा है। इससे नींद नहीं आती, थकान बढ़ती है, दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं और मजदूरों की कार्यक्षमता घट रही है।
आरती खोसला (क्लाइमेट ट्रेंड्स) कहती हैं:
“भारत की हीटवेव अब सिर्फ तापमान से नहीं बन रही। बढ़ती नमी, गर्म रातें, शहरीकरण और क्लाइमेट चेंज मिलकर इसे ज्यादा लंबा, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा थकाने वाला बना रहे हैं।”
निष्कर्ष
यह गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं रही। यह शहरों की डिजाइन, पानी, मिट्टी, जंगलों, आर्थिक असमानता और जलवायु परिवर्तन की पूरी कहानी है। लोग अब सिर्फ पूछ नहीं रहे कि “पारा कितना गया?” — वे पूछ रहे हैं, “रात में भी इतनी गर्मी क्यों है?”
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