कोलकाता हिन्दी न्यूज | 02 अक्टूबर 2026: भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125 साल पूरे होने के मौके पर कोलकाता की संस्था “सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन” और गुरुग्राम की संस्था “द परफॉर्मिंग आर्ट ट्राइब” की ओर से सत्यजित राय सभागार में देश की पहली ग्रामोफोन लेडी गौहर जान की स्मृति में एक अनोखा डांस ड्रामा “तवायफ़नामा” प्रस्तुत किया गया।
इस आयोजन ने स्त्री सशक्तिकरण तथा राष्ट्र निर्माण में भूली-बिसरी गायिकाओं के योगदान को जीवंत कर दिया।
ग्रामोफोन की पहली रिकॉर्डिंग
गौरतलब है कि देश में ग्रामोफोन की पहली रिकॉर्डिंग 11 नवंबर 1902 को कोलकाता में हुई थी और गौहर जान की रिकॉर्डिंग हुई थी। इस तरह अब इस संगीत यात्रा का 125वां वर्ष शुरू हो रहा है।
पुस्तक पर आधारित डांस ड्रामा
दिल्ली के “रजा फाउंडेशन”, भारतीय विद्या भवन कोलकाता तथा “स्त्री दर्पण” के सहयोग से हिंदी के वरिष्ठ कवि-पत्रकार अरविंद कुमार उर्फ़ विमल कुमार की कविताओं की पुस्तक “तवायफ़नामा” पर आधारित यह डांस ड्रामा पेश किया गया, जिसमें 33 भूली-बिसरी गायिकाओं का जिक्र है।
वक्ताओं ने क्या कहा?
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि यह हम सबके लिए प्रसन्नता की बात है कि हम लोग इस समारोह के बहाने गौहर जान, जद्दन बाई और अख्तरी बाई जैसी महान गायिकाओं को याद कर रहे हैं, जिन्होंने संगीत के इतिहास में ही नहीं, स्त्री सशक्तिकरण की एक मिसाल कायम की हैं।
कोलकाता, बनारस और लखनऊ की तरह देश का सांस्कृतिक-साहित्यिक केंद्र था। नई पीढ़ी को इस विरासत से अवगत कराने में मदद मिली।
निर्देशन और कलाकार
सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के प्रमुख संजय जायसवाल और स्त्री लेखा पत्रिका के संपादक अरविंद कुमार द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बीते जमाने की मशहूर अदाकारा मधुबाला की समकालीन वनमाला की शिष्य सोमा बनर्जी के निर्देशन में एक घंटे का यह शो हुआ, जिसमें बारह महिला कलाकारों ने भाग लिया।
गौहर जान, जद्दन बाई, बेगम अख्तर जैसी अनेक गायिकाओं पर केंद्रित इस डांस ड्रामे में आजादी की लड़ाई एवं समाज सेवा में इन गायिकाओं के योगदान को दिखाया गया।
अरविंद कुमार ने कहा कि “तवायफ़नामा” किताब में कोठे की 33 भूली-बिसरी गायिकाओं के दर्द, जीवन संघर्ष और संगीत में उनकी उपलब्धियों को कविताओं में दर्ज किया गया है,
क्योंकि इतिहास में इन गायिकाओं को जगह नहीं दी गई, जबकि इन्होंने आजादी की लड़ाई में गांधी जी और क्रांतिकारियों की मदद की थी। इन्होंने हिंदुस्तानी मौसिकी का इतिहास रचा है और उसकी विरासत को बचाया है।
स्मारिका और पत्रिका लोकार्पण
समारोह में स्त्री लेखा का नया अंक भी लोकार्पित हुआ, जो गौहर जान की याद में निकला है। इस अवसर पर भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125 साल पर एक स्मारिका भी जारी की गई।
वक्ताओं की उपस्थिति
समारोह में भारतीय भाषा परिषद के निदेशक एवं प्रसिद्ध आलोचक शंभुनाथ, भारतीय रेलवे के महाप्रबंधक एवं चर्चित लेखक यतीश कुमार, आलोचक गीता दूबे एवं अल्पना नायक ने विचार व्यक्त किए और चिंता व्यक्त की कि इतिहास में इन गायिकाओं को जगह नहीं मिली।
निर्देशक का बयान
डांस ड्रामा की निदेशक सोमा बनर्जी का कहना है कि वे इतिहास में भूली-बिसरी इन नायिकाओं के राष्ट्र निर्माण और संस्कृति के निर्माण में योगदान से लोगों को परिचित कराने के लिए यह शो कर रही हैं।
उन्होंने अब तक दिल्ली में दो शो तथा गुरुग्राम में एक शो किया है, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा। हम नृत्य के जरिये इन गायिकाओं का एक इतिहास लिखने का काम कर रहे हैं।
मुख्य भूमिकाएं
डांस ड्रामा में मुख्य पात्र गौहर जान की भूमिका द लिटिल थेप्सियन की प्रमुख उमा झुंझुनवाला की रंगकर्मी पुत्री गुंजन अजहर ने की।
कोलकाता की सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पारमिता मैत्रा की पुत्री एवं बिरजू महाराज की शिष्य निलोपा मोइत्रा ने अपने नृत्य से तवायफ़नामा नृत्य नाटिका का शुभारंभ किया।
अन्य कलाकारों ने बेगम अख्तर, रसूलन बाई, जद्दन बाई, विद्याधरी, असगरी बाई आदि की भूमिका निभाई।
गौहर जान का कोलकाता से नाता
गौहर जान का जन्म आजमगढ़ में हुआ था, पर वह बनारस के बाद कोलकाता में बस गई थीं।
नर्गिस की मां जद्दन बाई भी गौहर जान की सोहबत के लिए बनारस से कोलकाता आईं तथा बेगम अख्तर की मां मशरुती बाई भी अपनी बेटी को गौहर जान से मौसिकी की तालीम दिलाने कोलकाता आई थीं। कोलकाता हिंदुस्तानी मौसिकी का बड़ा केंद्र था।
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