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संसद में खुलासा : देश में 5,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र नहीं

नई दिल्ली/कोलकाता | 18 दिसंबर 2025 : देश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। 2024-25 सत्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूरे भारत में 5,149 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है। ये जानकारी संसद में पेश की गई रिपोर्ट से सामने आई है।

देशभर में कुल 10.13 लाख सरकारी स्कूलों के मुकाबले यह संख्या भले ही प्रतिशत में कम दिखे, लेकिन शिक्षा नीति और स्कूल संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा खाली स्कूल

इन 5,149 खाली स्कूलों में से 70 प्रतिशत से अधिक सिर्फ दो राज्यों—तेलंगाना और पश्चिम बंगाल—में स्थित हैं। यानी हर 10 खाली सरकारी स्कूलों में से 7 से ज्यादा इन्हीं दो राज्यों में हैं।

यह आंकड़ा कई अहम सवालों को जन्म देता है—

  • क्या स्थानीय स्तर पर पढ़ाई का ढांचा प्रभावी नहीं है?
  • क्या अभिभावक सरकारी स्कूलों से भरोसा खो चुके हैं?
  • या फिर स्कूल मर्जर (विलय) प्रक्रिया की वजह से कई स्कूल सिर्फ कागजों पर रह गए हैं?

राज्यवार खाली स्कूलों के आंकड़े

राज्य जीरो एनरोलमेंट स्कूलों की संख्या देश में हिस्सा
तेलंगाना 2,081 ~40%
पश्चिम बंगाल 1,571 ~30%
अन्य राज्य शेष ~30%
कुल 5,149 100%
  • जिलेवार हाइलाइट: तेलंगाना के नलगोंडा जिले में सबसे ज्यादा 315 खाली स्कूल (देश में नंबर 1)। महबूबाबाद (167) और वारंगल (135)। पश्चिम बंगाल में कोलकाता में 211 खाली स्कूल (देश में दूसरा सबसे ज्यादा)।
  • ट्रेंड: 2022-23 में कम एनरोलमेंट (<10 स्टूडेंट) वाले स्कूल 52,309 थे, जो 2024-25 में बढ़कर 65,054 हो गए – 24% की बढ़ोतरी। इनमें 1.44 लाख टीचर्स तैनात हैं।

 

आंकड़े समस्या दिखाते हैं, वजह नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े समस्या की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इसके पीछे की सटीक वजह साफ नहीं करते। कई मामलों में स्कूल भवन मौजूद हैं, शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन छात्र नहीं हैं—जो नीति और जमीनी हकीकत के बीच खाई को दर्शाता है।

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संसद में पेश हुआ डेटा

ये आंकड़े 1 दिसंबर 2025 को लोकसभा में तारांकित प्रश्न संख्या 15 के जवाब में पेश किए गए। यह सवाल सांसद कार्ति पी. चिदंबरम और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने उठाया था।

शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि टीचर डिप्लॉयमेंट राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। लेकिन इन खाली स्कूलों में टीचर्स की तैनाती संसाधनों के दुरुपयोग का संकेत देती है।

अब बड़ा सवाल यह है कि

👉 क्या ये स्कूल वास्तव में ग्राउंड पर फंक्शनल हैं?
👉 या फिर ये सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद इकाइयाँ बनकर रह गए हैं?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि खाली स्कूलों की पहचान के बाद री-मैपिंग, मर्जर की समीक्षा और स्थानीय जरूरतों के अनुसार सुधार जरूरी है, ताकि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को दोबारा भरोसेमंद बनाया जा सके।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

  • विपक्ष: कांग्रेस और भाजपा ने सरकार पर हमला बोला। “यह शिक्षा व्यवस्था की विफलता है।”
  • सरकार का पक्ष: मंत्रालय ने कहा कि डेटा सफाई और रेशनलाइजेशन का हिस्सा है। कई राज्य स्कूल मर्ज कर रहे हैं।

यह स्थिति सरकारी शिक्षा की चुनौतियों को उजागर करती है। क्या ये स्कूल बंद होंगे या रिवाइव किए जाएंगे? अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए। इस आंकड़े पर आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं – सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए क्या करें?

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