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El Niño की आहट से डरा मानसून 2026, भारत के सामने सूखा, गर्मी और पानी संकट का खतरा

निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता: भारत इस समय सिर्फ दिन की गर्मी से नहीं, बल्कि रातों की उमस और बढ़ते जलवायु संकट से जूझ रहा है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि 2026-27 में दुनिया एक बहुत मजबूत एल नीनो की तरफ बढ़ रही है, जिसका सीधा असर भारत के मानसून, कृषि, पानी और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रह सकता है। अनुमान है कि बारिश Long Period Average (870 मिमी) का करीब 90 प्रतिशत (±4%) रह सकती है।

IMD के प्रॉबेबिलिटी फोरकास्ट में:

  • 60% संभावना “deficient rainfall” की
  • 24% संभावना “below normal rainfall” की

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एल नीनो क्या कर रहा है?

Global Energy Monitor और अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो रहा है। NOAA के मुताबिक मई-जुलाई 2026 के बीच एल नीनो बनने की संभावना 82% है, जबकि दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक यह 96% तक पहुंच सकती है।

GP Sharma (स्काईमेट वेदर) कहते हैं:

“2027 दुनिया का सबसे गर्म साल बन सकता है। महासागर रिकॉर्ड गर्मी सोख रहे हैं। एल नीनो अब सिर्फ प्राकृतिक घटना नहीं, ग्लोबल वार्मिंग की पृष्ठभूमि पर और खतरनाक बन रहा है।”

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भारत पर क्या असर होगा?

  • मानसून की अस्थिरता: बारिश आएगी, रुकेगी, फिर अचानक तेज होगी। लंबे “break monsoon” की संभावना बढ़ गई है।
  • रातें गर्म: कई शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री के करीब पहुंच रहा है। इससे नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
  • खाद्य सुरक्षा: देश की 52% खेती बारिश पर निर्भर है। कम बारिश का मतलब कम फसल, कम भूजल रिचार्ज और बढ़ता जल संकट।
  • शहरी गर्मी: कंक्रीट और कम पेड़ शहरों को “हीट ट्रैप” बना रहे हैं।
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आरती खोसला (क्लाइमेट ट्रेंड्स) कहती हैं:

“भारत की हीटवेव अब सिर्फ तापमान से नहीं बन रही। बढ़ती नमी, गर्म रातें, शहरीकरण और क्लाइमेट चेंज मिलकर इसे ज्यादा लंबा, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा थकाने वाला बना रहे हैं।”

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विशेषज्ञों की चिंता और सुझाव

  • Devender Sharma (खाद्य नीति विश्लेषक): “यह साल climate change और geopolitical uncertainty के बीच testing ground साबित हो सकता है।”
  • Dr. G.V. Ramanjaneyulu (Centre for Sustainable Agriculture): “असल समस्या dry spells की है। किसान धान जैसी पानी-खपत वाली फसलों से दूरी बनाएं, pulses, oilseeds और millets की तरफ बढ़ें।”
  • Anjal Prakash (IPCC योगदानकर्ता): “Integrated water management, rainwater harvesting, drip irrigation और treated wastewater reuse की जरूरत है।”

एक उम्मीद: Indian Ocean Dipole (IOD)

कई विशेषज्ञों का कहना है कि positive IOD एल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है। 2026 में इसके positive phase में जाने की संभावना बढ़ रही है।

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निष्कर्ष

यह गर्मी अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं रही। यह शहरों की डिजाइन, पानी, मिट्टी, जंगलों, आर्थिक असमानता और जलवायु परिवर्तन की पूरी कहानी है।

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लोग अब सिर्फ पूछ नहीं रहे कि “पारा कितना गया?” — वे पूछ रहे हैं, “रात में भी इतनी गर्मी क्यों है?”

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“निशांत जी जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर रिपोर्टिंग करते हैं। देश दुनिया में पर्यावरणीय मुद्दों, प्रदूषण, वन संरक्षण और जलवायु प्रभाव की ग्राउंड रिपोर्टिंग में विशेष रुचि रखते हैं।”

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