तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। प्राचीन नदियों के किनारे बसे जीवन के रंगमंच पर, समय ने इतिहास के सुवर्ण अक्षर पंजीकृत किए। नदियाँ मानव सभ्यता की जननी, संस्कृति की निधि और रहस्यों की गोद हैं, जिनके जल में समाए हैं अनकहे कथा-सागर। किस्सों के मोती, मिथकों की माला, और अतीत की धूमिल परतों के भीतर छुपी घटनाएँ, नदियों के किनारे अंकित हैं।
ऐसे ही जंगल महल के मालभूमि क्षेत्र में, डुलुंग नदी की छाती पर उभरा रोहिणी नामक वह ऐतिहासिक गढ़, राजा और जमींदारों के गौरव और काल के साक्षी के रूप में खुद को प्रतिष्ठित करता है। यहाँ के जमींदार लक्ष्मीनारायण षाड़ंगी की कथाएँ अतीत की धूप-छाँव में जीवित हो उठती हैं। उनकी कृतियाँ जैसे इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों से उकेरी गई हों।
चैताली कुंडु नायक की कलम से निकला ‘गढ़ रोहिणी देवोत्तर एस्टेट’ इस प्राचीन गढ़ के अमिट इतिहास को उजागर करता है, जैसे नदी की प्रवाहमान धाराएं खोई हुई सदियों की यादों को फिर से जीवंत कर दें। यह शोध ग्रंथ उस कालखंड की अनदेखी परतों को खोले, जहां धर्म, आस्था और शाही शीलमंडल की छाया साथ-साथ चलती थी।

प्रकाशक अरिंदम और अंतरराष्ट्रीय कवि विप्लव माज़ी द्वारा इस अमूल्य रचना का भव्य लोकार्पण समारोह, साहित्य, इतिहास और संस्कृति के संगम का साक्षी बना। विद्वानों और विश्लेषकों ने इस ग्रंथ में छिपी ऐतिहासिकता, लोकजीवन की गहराई, और क्षेत्रीय संस्कृति के रंगों को संजीवनी बूटी की तरह विभूषित किया।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक, जैसे पुरानी नदियों के तरंगों पर झिलमिलाते तिलस्मी प्रतिबिंब, इतिहास की ज्वालामुखी को शांत गंभीरता से उजागर करती है, और हमें याद दिलाती है कि हर नदी का प्रवाह उन कथाओं से भरा हुआ है, जो सुनने वाले के मन में नवगीतों की तरह गूंजते रहते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. मधुप दे (प्राबंधिक एवं आंचलिक इतिहास शोधकर्ता सभा के अध्यक्ष), प्रो. रंजीत कुमार नायक (प्राबंधिक), अमीता नायक (पूर्व प्रधान शिक्षिका), अतनुनंदन माईति (आंचलिक इतिहास शोधकर्ता), डॉ. प्रसून कुमार पढ़िया (कवि, प्राबंधिक, मौपाल देशप्राण विद्यालय के प्रधान शिक्षक)
अतनु मित्र (प्राबंधिक, इतिहास शोधकर्ता एवं शिक्षक), मिताली जाना (छायाकार), रमेला सिंह राय (शिक्षिका), प्रो. जयकांत सरकार (अध्यापक), अर्पिता कुंडु (शिक्षिका), भास्करव्रत पात्र (आंचलिक संस्कृति शोधकर्ता)
सुदीप कुमार खाड़ा (शिक्षक एवं समाजसेवी), सुमन विकास मंडल (क्षेत्र सर्वेक्षक), आनंदरूप नायक (कवि, शिक्षक और ग्रंथ के संपादक), अरिंदम भौमिक (प्रकाशक), रिंकी भौमिक आदि शामिल रहे।
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