अमितेश कुमार ओझा, खड़गपुर। तपेदिक यानी टीबी का नाम सुनते ही आज भी समाज के एक हिस्से में भय और दूरी का भाव पैदा हो जाता है। लेकिन जागरूकता, समय पर जांच, नियमित उपचार और पौष्टिक आहार के सहारे इस बीमारी को हराया जा सकता है। इसी संदेश के साथ रश्मि समूह ने टीबी से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
केंद्र और राज्य सरकार के ‘जन भागीदारी’ अभियान के अनुरूप रश्मि समूह की ओर से रविवार को खड़गपुर स्थित होटल इवेंट व्यू में विशेष सामाजिक पहल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान टीबी प्रभावित परिवारों को आवश्यक पौष्टिक खाद्य सामग्री की टोकरी प्रदान की गई। इस पहल का उद्देश्य केवल पोषण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि बीमारी से जूझ रहे लोगों में भरोसा और हौसला पैदा करना भी रहा।
कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि विपणन तथा पशु संसाधन विकास विभाग के प्रभारी मंत्री दिलीप घोष, मेदिनीपुर विधानसभा के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुच्छैत, नारायणगढ़ विधानसभा के विधायक राम प्रसाद गिरी, खड़गपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. बुशारा बानो, आईपीएस, पश्चिम मेदिनीपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सौम्य शंकर सारंगी तथा खड़गपुर के अनुमंडल अधिकारी ज्योति घोष, डब्ल्यूबीसीएस (कार्यपालक) सहित प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. देबांजन मन्ना, खड़गपुर के डिप्टी मजिस्ट्रेट राज कुमार विश्वास, खड़गपुर-1 के बीडीओ एमडी. सरिफुल इस्लाम, डब्ल्यूबीसीएस (कार्यपालक), हिजली ग्रामीण अस्पताल के बीएमओएच डॉ. अतनु पात्रा, एनटीईपी के डब्ल्यूएचओ सलाहकार डॉ. अभिजीत डे, खड़गपुर लोकल थाना के प्रभारी अधिकारी चिन्मय प्रामाणिक तथा सदतपुर के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज तपन कुमार माइती समेत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और रश्मि समूह के अधिकारी मौजूद थे।
कार्यक्रम में टीबी की रोकथाम, समय पर जांच, नियमित दवा लेने और मरीजों को उपचार के दौरान पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार पूरा करने और नियमित रूप से दवा लेने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
‘निक्षय मित्र, जन भागीदारी’ पहल के तहत उपस्थित अतिथियों और रश्मि समूह के प्रमोटर संजीब कुमार पटवारी एवं संजय कुमार पटवारी ने 10 टीबी प्रभावित परिवारों को पौष्टिक खाद्य सामग्री की टोकरी प्रदान की।
बताया गया कि रश्मि समूह इससे पहले भी 200 टीबी मरीजों को ‘निक्षय मित्र’ के रूप में गोद ले चुका है। समूह की ओर से यह पहल टीबी मरीजों को उपचार की अवधि में पोषण और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने टीबी मरीजों के प्रति समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने रश्मि समूह की इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी प्रयासों से पूरी नहीं हो सकती, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
पश्चिम मेदिनीपुर के सीएमओएच डॉ. सौम्य शंकर सारंगी ने जिले में टीबी मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, विशेष एक्स-रे सेवाओं और समय पर बीमारी की पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित उपचार, चिकित्सकीय सलाह का पालन और पर्याप्त पोषण टीबी से पूरी तरह उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रश्मि समूह के कार्यकारी निदेशक भास्कर चौधरी ने कहा कि सरकार का ‘जन भागीदारी’ अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम बनकर नहीं रहना चाहिए। समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही ऐसे अभियानों को वास्तविक सफलता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों के साथ खड़ा होना और जरूरत के समय सहयोग देना रश्मि समूह की सामाजिक प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दिया – टीबी मरीजों से दूरी बीमारी का समाधान नहीं है। जागरूकता, संवेदना, उपचार और सहयोग के माध्यम से ही टीबी मुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
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