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इंडिया एनर्जी वीक 2026 में आइआइटी खड़गपुर ने ऑयल इंडिया के साथ किया अपशिष्ट-से-सम्पदा मॉडल हेतु समझौता

राष्ट्रीय मॉडल बनेगा अपशिष्ट-से-सम्पदा सृजन, अनुसंधान, नवाचार व व्यावहारिक क्रियान्वयन का होगा समन्वय

खड़गपुर। सतत शहरी विकास और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के दौरान कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर प्रो. ब्रजेश दुबे, डीन, कैंपस एवं सामुदायिक विकास, आईआईटी खड़गपुर तथा रंजन गोस्वामी, कार्यकारी निदेशक (व्यवसाय विकास), ऑयल इंडिया लिमिटेड ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ऑयल इंडिया लिमिटेड एवं उसकी हरित ऊर्जा इकाई ओआईएल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रो. ब्रजेश दुबे ने कहा कि इसका उद्देश्य आइआइटी खड़गपुर को परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं अपशिष्ट-से-सम्पदा सृजन का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है, जिसमें अनुसंधान, नवाचार और व्यावहारिक क्रियान्वयन का समन्वय किया जाएगा।

यह एक सतत प्रभाव हेतु द्वि-आयामी दृष्टिकोण है, जिसके तहत पर्यावरणीय एवं शहरी उपयोगिता में प्रस्तावित सीबीजी संयंत्र जैविक अपशिष्ट को स्वच्छ कंप्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित करेगा, जिसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जाएगा।

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साथ ही कृषि हेतु पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद भी उपलब्ध कराएगा। यह परियोजना अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और मृदा स्वास्थ्य जैसी शहरी चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है।

साथ ही शैक्षणिक, अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के तहत यह परियोजना एक “लिविंग लैबोरेटरी” के रूप में कार्य करेगी, जो अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास एवं उद्यमिता को बढ़ावा देगी।

भारत के ऊर्जा संक्रमण और नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के अनुरूप यह सहयोग आइआइटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती तथा ऑयल इंडिया के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक डॉ. रंजीत रथ की साझा दूरदृष्टि को प्रतिबिंबित करता है।

समझाैते पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि ऑयल इंडिया के साथ यह साझेदारी केवल एक कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र और विस्तार योग्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां अत्याधुनिक अनुसंधान, सततता व व्यावहारिक क्रियान्वयन एक साथ आते हैं।

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