IIM उदयपुर में डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट और ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट में एक वर्षीय पूर्णकालिक MBA के 2022-23 बैचों का उद्घाटन

उदयपुर । भारतीय प्रबंधन संस्थान, उदयपुर ने शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए अपने एक वर्षीय एमबीए – ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट (जीएससीएम) कार्यक्रम के दसवें बैच और एक वर्षीय एमबीए – डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट (डीईएम) के तीसरे बैच की शुरुआत की है। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आईआईएम उदयपुर के डायरेक्टर प्रो. जनत शाह और एक वर्षीय एमबीए प्रोग्राम कमेटी के चेयरपर्सन प्रो. राजेश अग्रवाल ने की। कामेश मुल्लापुडी, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेलॉइट कंसल्टिंग (यूएस-इंडिया) और सी.पी. गुरनानी, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेक महिंद्रा उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने स्वागत भाषण में डायरेक्टर प्रो. जनत शाह ने कहा, ”कोविड से उपजे हालात के बाद दो साल में पहली बार मैं इस साल ऑफ़लाइन सत्रों में आप सभी का स्वागत कर रहा हूं। फिर से ऑफ़लाइन सत्रों की शुरुआत होना हमारे लिए और विद्यार्थी समुदाय के लिए वाकई खुशी की बात है। हमारे जैसे प्रमुख प्रबंधन संस्थान के लिए आमने-सामने के ऑफ़लाइन सत्रों के जरिये शिक्षा प्रदान करना हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।” उन्होंने आगे कहा, ”आईआईएम उदयपुर ने अपनी परिवर्तनकारी यात्रा के दस साल पूरे कर लिए हैं। शुरुआत से ही, हमने उच्च स्तर की निष्ठा, पारदर्शिता, वैश्विक मान्यता, अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, निरंतरता और उत्कृष्टता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ वैश्विक ख्याति प्राप्त संस्थान की कल्पना की है।

आईआईएमयू के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है इसका रिसर्च पर फोकस करने का प्रयास। एक अकादमिक संस्थान के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य की दुनिया रिसर्च के आधार पर ही संचालित होगी। हम, एक संस्थान के रूप में, एकेडमिक रिसर्च के क्षेत्र में सबसे आगे रहना चाहते हैं। हमने भारतीय बिजनेस स्कूलों से संबंधित यूटी डलास बिजनेस स्कूल रिसर्च रैंकिंग में, तीन वर्षों तक लगातार चौथे स्थान पर रहकर रिसर्च के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। हमारे पास एक महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ है, जहां हम यूटी डलास शीर्ष 100 रैंकिंग में स्थान हासिल करना चाहते हैं, जहां वर्तमान में हमारे देश से कोई संस्थान नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, ”आईआईएमयू ने एक विशिष्ट संस्थान होने पर ध्यान केंद्रित किया है, और डिजिटल एंटरप्राइज मैनेजमेंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ-साथ एमबीए-डीईएम प्रोग्राम ने हमारे इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हम एक भविष्यवादी शैक्षणिक संस्थान की पहचान हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और भविष्य के लिए अग्रणी लोगों को तैयार करने के काम में जुटे हैं।”

नए बैच को संबोधित करते हुए जीएससीएम प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि कामेश मुल्लापुडी, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेलॉइट कंसल्टिंग (यूएस-इंडिया) ने संगठनों में सप्लाई चेन्स का प्रबंधन करते हुए ग्राहकों के दृष्टिकोण को समझाया। उन्होंने कहा, ”मैनेजमेंट स्टडीज में डिजिटल और टैक्नोलॉजी की शुरूआत समय की आवश्यकता है और खुशी की बात है कि आईआईएम उदयपुर इसमें सबसे आगे रहा है। हाल ही में कोविड महामारी ने दुनियाभर में सप्लाई चेन के मैनेजमेंट और मेंटिनेंस के क्षेत्र में मौजूद जटिलताओं को हमारे सामने रखा। यहां तक कि हालिया रूस-यूक्रेन युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावट जैसे हालात ने सप्लाई चेन से जुड़े पेशेवरों को उनकी भूमिका के बारे में सोचने के लिए बाध्य किया है। दरअसल वर्तमान दौर में कार्य संचालन का डिजिटलीकरण और एनालिटिक्स अब बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।”

उन्होंने इस सवाल के साथ अपना वक्तव्य समाप्त किया, ”भविष्य के प्रबंधक को क्या चाहिए?” और इसका उत्तर इस प्रकार दिया- ”उसमें सीखने की क्षमता का होना बेहद जरूरी है। इसका अर्थ यह हुआ कि उसे सीखने की कला पर ध्यान केंद्रित करना होगा, साथ ही उसे बदलते वक्त के अनुसार अपने आपको बदलने के लिए भी तैयार रहना होगा, तभी वह न्यू नॉर्मल के अनुसार सफलतापूर्वक संगठनों को चला सकेगा और उसमें इस काम को मानवीय स्पर्श के साथ सहानुभूतिपूर्वक पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए।”

डीईएम प्रोग्राम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि सी.पी. गुरनानी, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, टेक महिंद्रा ने कहा, ”आज जबकि आप भविष्य के डिजिटल मैनेजर और अग्रणी बनने के लिए यहां हैं, तो मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि आईआईएम उदयपुर ने पाठ्यक्रम की दिशा में भी इनोवेशन की शुरुआत की और इसी दिशा में कदम उठाते हुए संस्थान में डिजिटल उद्यम के लिए एक केंद्र स्थापित किया। ग्लोबल सप्लाई चेन मैनेजमेंट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दुनिया में आए बदलावों को समझते हुए आईआईएम उदयपुर ने उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को अकादमिक शिक्षा के साथ जोड़ा है और यह प्रयास अपने आप में अभूतपूर्व है। मेरा मानना है कि डिजिटल और व्यावसायिक परिवर्तन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”

उन्होंने कहा, ”आप जो कुछ सीखते हैं, असली महत्व उसका है, न कि आपकी डिग्री का। नई चीजों को अपनाने के लिए आप किस हद तक तैयार रहते हैं, यह बात मायने रखती है, न कि आपकी उम्र। अगर हम भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगा सकें, और यह जान सके कि वह क्या है जो भविष्य में भी प्रासंगिक बना रहेगा, तो हममें से हर कोई सफल हो सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग, वेब 3.0, मेटावर्स या ब्लॉकचेन इन सबके भविष्य के बारे में पूर्वानुमान लगाना आज बेहद महत्वपूर्ण है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी तकनीक व्यवसाय की समस्या का समाधान करती है, बल्कि यह तथ्य है कि आप व्यवसाय की समस्याओं को डिजिटल रूप से हल करने की संभावना तलाशना सीखते हैं।”

आईआईएम उदयपुर भारत का एकमात्र प्रबंधन संस्थान है जिसने डीईएम में पूर्णकालिक एमबीए प्रोग्राम शुरू किया है। जीएससीएम में पूर्णकालिक एक वर्षीय एमबीए करने वाला भी यह एकमात्र आईआईएम है। डीईएम और जीएससीएम कार्यक्रम किसी भी विषय में स्नातकों के लिए किसी भी क्षेत्र में 3+ वर्ष के अनुभव के साथ 1 वर्षीय पूर्णकालिक आवासीय एमबीए प्रोग्राम हैं।

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