कोलकाता/मुर्शिदाबाद, 24 दिसंबर 2025: तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (JUP) की घोषणा के मात्र 24 घंटे के अंदर बड़ा यू-टर्न लिया है। उन्होंने कोलकाता की बालीगंज विधानसभा सीट से हिंदू उम्मीदवार निशा चटर्जी (निशा चट्टोपाध्याय) का नाम वापस ले लिया।
हुमायूं ने इसका कारण निशा के सोशल मीडिया पर “खुले कपड़ों” वाली तस्वीरें और “अनुचित अंग-भंगिमा” बताया, जो पार्टी की छवि के लिए ठीक नहीं हैं।
सोमवार को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में नई पार्टी लॉन्च करते हुए हुमायूं ने 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी, जिसमें बालीगंज से निशा चटर्जी का नाम शामिल था। मंच पर निशा उनके साथ मौजूद थीं और दोनों की तस्वीरें भी वायरल हुईं।

लेकिन मंगलवार को सोशल मीडिया पर निशा की पुरानी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद हुमायूं ने फैसला बदल दिया।
हुमायूं कबीर का बयान
हुमायूं ने कहा, “मैं जानता था कि वह एक सेलिब्रिटी हैं। लेकिन उनके बार में ड्रिंक करते हुए या अन्य तस्वीरें सामने आने के बाद व्यक्तिगत जीवन और चाल-चलन पर सवाल उठ रहे हैं। मैं यह सब नहीं जानता था। ब्राह्मण की बेटी होने की वजह से उन्हें उम्मीदवार बनाया था, लेकिन 24 घंटे में बदल दिया। अब बालीगंज से मुस्लिम उम्मीदवार उतारा जाएगा, 7 दिनों में नाम घोषित करूंगा।”
निशा चटर्जी की प्रतिक्रिया
निशा ने इस फैसले पर गुस्सा जताया और आरोप लगाया कि असल वजह उनका हिंदू होना है, सोशल मीडिया पोस्ट्स सिर्फ बहाना हैं। उन्होंने कहा, “मंच पर खड़ा करके नाम घोषित किया, तब मेरे बारे में जांच क्यों नहीं की? हुमायूं चाचा ने खुद मुझे राजनीति में आने को कहा था।
अब अचानक वीडियो का बहाना देकर मुझे सामाजिक रूप से अपमानित किया जा रहा है। हिंदू-ब्राह्मण होने की वजह से ही नाम काटा गया। अगर सचमुच धर्मनिरपेक्ष होते तो ऐसा नहीं करते।”
निशा ने खुद को राजनीति में नया बताया और कहा कि वह सामाजिक सेवा करती रही हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
- हुमायूं कबीर को टीएमसी ने बाबरी मस्जिद स्टाइल की मस्जिद की नींव रखने और सांप्रदायिक बयानों के लिए निलंबित किया था।
- नई पार्टी मुख्य रूप से अल्पसंख्यक वोटों पर फोकस कर रही है, लेकिन शुरुआत में हिंदू उम्मीदवारों को भी जगह दी गई थी।
- बालीगंज सीट अल्पसंख्यक बहुल है, जहां 2022 उपचुनाव में टीएमसी के बाबुल सुप्रियो जीते थे।
- यह विवाद 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हुमायूं की पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है, जहां सांप्रदायिक और व्यक्तिगत आरोपों की बहस तेज हो गई है।
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