Humayun Kabir

हुमायूं कबीर ने किया नई पार्टी बनाने का ऐलान, ओवैसी के साथ मिलकर लड़ेंगे चुनाव

कोलकाता, 7 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल की सियासत में नया मोड़ आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने फिर दोहराया कि वे 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी लॉन्च करेंगे और 2026 विधानसभा चुनावों में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।

लेकिन सबसे बड़ा झटका यह है कि कबीर ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी से गठबंधन का संकेत दिया है, जो TMC के मुस्लिम वोटबैंक को चुनौती दे सकता है।

मुर्शिदाबाद जिले के बहुल मुस्लिम इलाके से विधायक कबीर, जो बाबरी मस्जिद की तर्ज पर नई मस्जिद के शिलान्यास को लेकर विवादों में हैं, ने कहा कि उनकी पार्टी “सामान्य लोगों के लिए” होगी।

उन्होंने TMC पर “आरएसएस की मदद” का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी को “पूर्व मुख्यमंत्री” करार दिया। ओवैसी से गठबंधन की बात पर कबीर ने कहा, “हम मुस्लिम वोटों को एकजुट करेंगे और TMC-BJP दोनों को चुनौती देंगे।”

यह ऐलान 6 दिसंबर को बेल्डंगा में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद के शिलान्यास के ठीक एक दिन बाद आया है, जहां 40,000 लोगों ने भाग लिया। कबीर ने दावा किया कि मस्जिद निर्माण के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट तैयार है, जिसमें स्कूल और अस्पताल भी शामिल होंगे।

घटना का पूरा विवरण

नई पार्टी का ऐलान: कबीर ने 4 दिसंबर को TMC निलंबन के तुरंत बाद कहा था कि वे 22 दिसंबर को पार्टी लॉन्च करेंगे। शनिवार को बेरहमपुर में रैली में उन्होंने दोहराया: “मैं विधायक पद से इस्तीफा दूंगा और 135 सीटों पर लड़ेंगे। TMC ने मुझे 12-13 साल तक इस्तेमाल किया, अब बदला लूंगा।”

ओवैसी से गठबंधन: न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, कबीर ओवैसी से हाथ मिलाने को तैयार हैं, ताकि मुस्लिम वोट TMC से खिसक जाएं। AIMIM पहले से बंगाल में सक्रिय है, और 2024 लोकसभा चुनावों में मुर्शिदाबाद में अच्छा प्रदर्शन किया था।

कबीर ने कहा, “ओवैसी भाई से बात चल रही है। हम मिलकर ममता दीदी को टेंशन देंगे।”

TMC का निलंबन: पार्टी ने कबीर को “सांप्रदायिक राजनीति” के आरोप में निलंबित किया। कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने कहा, “कबीर भाजपा की कठपुतली हैं। हमने उन्हें तीन बार चेतावनी दी थी।”

मस्जिद विवाद: 6 दिसंबर को शिलान्यास के दौरान 3,500 सुरक्षाबल तैनात थे। कैलकुटा हाईकोर्ट ने रोकने से इनकार किया, लेकिन राज्य सरकार पर जिम्मेदारी डाली। कबीर ने कहा, “हाईकोर्ट ने इसे संवैधानिक माना है।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

TMC का पक्ष: ममता बनर्जी ने बरहमपुर रैली में कहा, “मुर्शिदाबाद के लोग दंगे की राजनीति स्वीकार नहीं करेंगे। कबीर का यह ड्रामा भाजपा का है।” अभिषेक बनर्जी ने कहा, “हम मुस्लिम भाइयों के लिए हमेशा खड़े हैं।”

भाजपा का हमला: प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजुमदार ने कहा, “यह TMC की आंतरिक साजिश है। कबीर पहले हिंदुओं को धमकी देते थे, अब मुस्लिम वोट चुराने का खेल। ममता दीदी का राज खत्म हो चुका।” भाजपा ने इसे “बाबर राज स्थापित करने की कोशिश” बताया।

AISF का रुख: ऑल इंडिया सेकुलर फ्रंट (AISF) ने कबीर की नई पार्टी से सशर्त गठबंधन की पेशकश की, लेकिन शर्त रखी कि वे 2024 में हिंदुओं पर “भागीरथी में फेंकने” वाली धमकी वापस लें। विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा, “हम धर्म के आधार पर वोट नहीं बांटते। TMC राज में हिंदू-मुस्लिम दोनों असंतुष्ट हैं।”

ओवैसी का संकेत: AIMIM सूत्रों के अनुसार, ओवैसी मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में विस्तार चाहते हैं। गठबंधन पर औपचारिक बातचीत दिसंबर में शुरू हो सकती है।

बंगाल चुनावों पर असर

2026 विधानसभा चुनावों से पहले यह गठबंधन TMC के लिए बड़ा खतरा है, जहां मुस्लिम वोट (लगभग 27%) निर्णायक हैं। कबीर, जो पहले कांग्रेस और भाजपा से जुड़े थे, मुर्शिदाबाद में मजबूत पकड़ रखते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुस्लिम वोटों का विभाजन कर सकता है, जिससे BJP को फायदा हो। 2024 लोकसभा में AIMIM ने मुर्शिदाबाद में 1.5 लाख वोट पाए थे।

कबीर ने कहा, “ममता दीदी 2026 में सीएम नहीं रहेंगी। हमारी पार्टी आम आदमी की आवाज बनेगी।” क्या यह गठबंधन बंगाल की सियासत को नया रंग देगा? या TMC इसे कुचल देगी? विकास जारी है।

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