कोलकाता न्यूज डेस्क | 2 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की अल्पसंख्यक बहुल भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी का नाम बदल दिया है। चुनाव आयोग ने उनके प्रस्तावित दल के नाम को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्हें यह फैसला लेना पड़ा।
क्या था पुराना नाम और क्यों खारिज हुआ?
कबीर ने शुरुआत में अपनी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) रखा था। निर्वाचन आयोग ने इस नाम को स्वीकार नहीं किया। आयोग का कहना था कि इस नाम से पहले ही एक राजनीतिक दल पंजीकृत है।
इसके बाद कबीर ने दिल्ली जाकर नए नाम का प्रस्ताव दिया और अब पार्टी का नाम ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (एजेयूपी) घोषित किया है।

मुख्य बातें – एक नजर में:
- पुराना नाम: जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) – खारिज
- नया नाम: आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) – स्वीकृत
- निलंबन की वजह: बेलडांगा मस्जिद शिलान्यास पर विवादित बयान
- पार्टी गठन: 22 दिसंबर 2025
- चुनावी लक्ष्य: 2026 विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना
- गठबंधन अपील: बीजेपी और टीएमसी के खिलाफ
हुमायूं कबीर ने क्या कहा?
सोमवार को विस्तार से जानकारी देते हुए कबीर ने बताया: “पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने पिछले हफ्ते हमारे पुराने नाम (जेयूपी) की सिफारिश दिल्ली भेजी थी। लेकिन दिल्ली मुख्यालय ने सूचित किया कि यह नाम पहले से किसी और के पास है। हम खुद दिल्ली गए और नया नाम ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ का प्रस्ताव दिया, जो स्वीकार कर लिया गया है।”
TMC से निलंबन की वजह क्या थी?
हुमायूं कबीर के निलंबन की कहानी काफी चर्चित रही। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें बेलडांगा में एक मस्जिद के शिलान्यास की घोषणा के बाद पार्टी से निलंबित कर दिया था।
कबीर ने कहा था कि वह इस मस्जिद को अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को ढहाई गई बाबरी मस्जिद के डिजाइन जैसा बनाएंगे। इस बयान से विवाद बढ़ा और पार्टी ने उन पर कार्रवाई की।
नई पार्टी का एलान और चुनावी तैयारी
निलंबन के बाद 22 दिसंबर 2025 को कबीर ने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था। उन्होंने पार्टी के मुख्य पदाधिकारियों के नामों की घोषणा भी कर दी। कबीर इस साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लड़ने के लिए दूसरे दलों से गठबंधन करने की अपील भी की है।
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