भारत में बुजुर्गों का तिरस्कार कब खत्म होगा? – राम शर्मिंदा है, अयोध्या में संभावित परिजनों द्वारा माँ को सड़क पर फेक भाग निकले- मां दम तोड़ गई
अयोध्या में परिवार द्वारा सड़क पर फेंकी गई 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत- सीसीटीवी वीडियो देखकर देश का दिल पसीज़ा- मैं भी रो पड़ा
अधिवक्ता किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र। वैश्विक स्तर पर पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा संस्कारी सभ्यता का प्रतीक सर्वधर्म समभाव महा मानवों का देश है जहां, माता-पिता बड़े बुजुर्गों की आज्ञा को ऊपरवाले का आदेश मानने वालों का यह देश आज पाश्चात्य वैचारिकता की ओर बढ़ गया है। जब तीन दिन पहले प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग माँ के परिजनों द्वारा उसे सड़क के कोने में फेंक कर भागने व 25 जुलाई 2025 को उन्हें अस्पताल में बचाने की काफी कोशिशों के बावजूद उसकी मृत्यु हो गई। मां को फेंक भागने का वीडियो देखकर भारत के संस्कारी लोगों का दिल पसीज गया। मैं भी सीसीटीवी वीडियो देखकर रो पड़ा।
फेंकने वाले संभ्रात परिवार के दो महिला व एक पुरुष दिखाई दे रहे हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक ऑटो से आए थे, बुजुर्ग मां को एक ने दोनों हाथो व दूसरे ने दोनों पैरों से पड़कर रोड किनारे फेक कर उसको चादर डालकर भाग गए। मेरा मानना है यह सीसीटीवी वीडियो देखकर सबका खून खौल उठा होगा। संसद का मानसून सत्र चल रहा है, जो 21 अगस्त 2025 तक चलेगा। इस आर्टिकल के माध्यम से मैं केंद्र सरकार व सभी पार्टीयों के राज्यसभा व लोकसभा सांसदों से हृदय पूर्वक मार्मिक अपील करना चाहता हूं कि, ताबतोड़ इसी हफ्ते संसद में माता-पिता सीनियर सिटीजन (अत्याचार अपमान व दुर्व्यवहार निवारण) विधायक 2025 बनाकर पेश करें, व सभी मिलकर लोकसभा में 543/0 व राज्यसभा में 245/0 के रिकॉर्ड तोड़ समर्थन से यह बिल पारित कर पूरे विश्व में एक उदाहरण पेश करें, तो भारत सहित पूरी दुनिया खुश हो जाएगी।
मैं युवाओं से कहना चाहूंगा कि आज भारत भले ही युवा राष्ट्र है, परंतु एक रिपोर्ट के अनुसार 25 वर्षों के बाद भारत में 60 प्लस की संख्या अधिक होगी, जिसमें आज के सभी युवा शामिल होंगे। आज बुजुर्गों की स्थिति यह है कि 77 प्रतिशत बुजुर्गों के साथ भावनात्मक मौखिक दुर्व्यवहार, 24 प्रतिशत से शारीरिक दुर्व्यवहार होता है, तो 27 प्रतिशत आर्थिक शोषण व 50 प्रतिशत की उपेक्षा होती है। आज वर्तमान कानून माता-पिता वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण (संशोधित) अधिनियम 2019 व 2007 में बनाए गए माता-पिता तथा वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण अधिनियम नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं। क्योंकि आज करीब 12 प्रतिशत बुजुर्गों को ही इन कानूनों के बारे में जानकारी है, ऐसी रिपोर्ट कहती है।
मेरी अपील है कि मेरे द्वारा सुझाए गए उपरोक्त विधेयक में हत्या, सामूहिक रेप व देशद्रोह की धाराओं के समतुल्य सजा का प्रावधान करना जरूरी हो गया है। अयोध्या एसपी का इंटरव्यू मैंने देखा तो पता चला पूरी तेज रफ्तार से जांच जारी है। महिला का फोटो जारी कर आरोपियों का पता बनाने बताने वालों के लिए इनाम की घोषणा की गई है। 25 किलोमीटर के दायरे में सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं अनेक पुलिस टीमें बनाई गई है, परंतु मेरा मानना है, आरोपी पकड़े जाने के बाद भी कानून की खामियों से शीघ्र ही जमानत व केस ट्रायल होने के बाद पूरी तरह छूट जाने की संभावना है! जिसका संज्ञान माननीय सभी सांसदों को लेना चाहिए व सभी राज्यों को भी अपने-अपने स्तर पर एक सख्त कानून बनाने की जरूरत है।
चूँकि श्रीराम नगरी अयोध्या में शर्मसार हुई मानवता, 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को संभावित परिवार वालों ने लावारिस फेंककर भागा, सीसीटीवी में कैद हुई हृदय विधायक घटना। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आलेख के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत में बुजुर्गों का तिरस्कार कब खत्म होगा? राम जी हम शर्मिंदा है, अयोध्या में संभावित परिवार जनों द्वारा सड़क पर माँ को फेंक कर भाग निकलना, माँ दम तोड़ गई।
साथियों बात अगर हम 24 जुलाई 2025 को 1.50am पर अयोध्या में सड़क पर माँ को लावारिस फेंक भागने की घटना की करें तो, आज पूरे देश में अयोध्या की चर्चा हो रही है। लेकिन आज अयोध्या की चर्चा भगवान राम के लिए नहीं बल्कि एक बुजुर्ग महिला की वजह से हो रही है, जिसे कुछ लोगों ने अयोध्या में लावारिस छोड़ दिया और कुछ ही घंटे बाद उसकी मौत हो गई। ये घटना 23 जुलाई की देर रात 1 बजकर 50 मिनट की है। जब अयोध्या के दर्शन नगर मेडिकल कॉलेज के पास रात के अंधेरे में संभवतः परिवार वाले 80 वर्ष की इस बुज़ुर्ग महिला को लेकर आए और उसे सड़क किनारे फेंककर चले गए।
ये पूरी घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दो महिलाएं और एक पुरुष बुजुर्ग महिला को ई-रिक्शा से उतारकर वहां से जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। अयोध्या के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नगर) ने कहा, अब तक की जांच में पता चला है कि बुजुर्ग महिला को उसके रिश्तेदार देर रात ई-रिक्शा में लाए थे और फिर उसे सड़क किनारे छोड़कर चले गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस महिला को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले गई, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
साथियों बात अगर हम सीसीटीवी कैमरों व पुलिस जांच की करें तो, सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि बुजुर्ग महिला को ई-रिक्शा में लाकर सड़क किनारे छोड़ दिया गया। ई-रिक्शा में सवार लोग उसके ऊपर कंबल डालकर तुरंत वहां से चले गए। एसपी ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। अभी तक करीब 25 किलोमीटर का दायरा सीसीटीवी के जरिए चेक कर लिया गया है। जल्द ही ई रिक्शा चालक और परिजन का पता लगा लिया जाएगा जिस इलाके में ये वारदात हुई वहा के स्थानीय लोगो का कहना है कि ये इलाका सुल्तानपुर, गोंडा, बहराइच और अम्बेडकर नगर को जोड़ता है ऐसे में संभावना है कि यह लोग इन जिलों से भी आए होंगे, स्थानीय लोगो ने इस पूरे वारदात की अत्यंत कड़ी निंदा की है।
साथियों बात अगर हम सूचीगत जातियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए अनुसूचित जाति व जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 2019 के समकक्ष माता-पिता बुजुर्गों के सम्मान के लिए कानून बनाने की करें तो जिस तरह सामाजिक सौहार्द पूर्णता समानता को कायम रखने के लिए स्ट्रासिटी (अमेंडेड) कानून 2019 बनाया गया है, जिसका डर हमेशा उपद्रवी लोगों में बना रहता है या फिर कभी नए फौजदारी अधिनियम 2023 में क्राइम को रोकने अनेक धाराओं का डर लोगों में बना हुआ है। उसी तर्ज पर मेरा सुझाव है कि संसद के 21 अगस्त 2025 तक चलने वाले मानसून सत्र में माता-पिता, बुजुर्गों के साथ होने वाली क्रूरता दुष्परिणाम, दुर्व्यवहार, अपमान व दुत्कार पर लगाम लगाने के लिए माता-पिता व वरिष्ठ नागरिक (अत्याचार अपमान दुर्व्यवहार व्यवहार व दुराचार) विधेयक 2024 बनाकर पेश किया जाए, जिसे सभी पार्टियों एक मत होकर 544/0 मतदान से पारित करेंगी ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।
साथियों बात अगर हम प्रस्तावित कानून में माता-पिता व वरिष्ठ नागरिक (अत्याचार अपमान दुर्व्यवहार निवारण) विधेयक 2024 की जरूरत की करें तो, हमारा देश महान संतानों की भूमि है,यहां बच्चों से अपने बुजुर्ग माता-पिता की उचित देखभाल करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन पीड़ादायक है कि नैतिक मूल्यों में इस कदर गिरावट आ गई है कि अपना सुख-चैन जिन बच्चों के लिए माता-पिता त्याग कर जीवन खत्म कर देते हैं, वही बच्चे उन्हें बुढ़ापे में दो जून की रोटी और मोहब्बत के लिए तरसा रहे हैं।
साथियों बात अगर हम माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण व कल्याण अधिनियम 2019 की करें तो, प्रावधान-धारा 2 डी के तहत इन्हें मिलेगा फायदा, जन्मदाता माता-पिता, दत्तक संतान ग्रहण करने वाले, सौतेले माता और पिता-धारा 2(जी) उनके लिए जिनके बच्चे नहीं- अधिनियम की ये धारा उनके लिए हैं, ऐसे में उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी वे संबंधी उठाएंगे जो उनकी संपत्ति के हकदार हैं।
साथियों बात अगर हम माता-पिता वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण (संशोधित) अधिनियम 2019 को बनाने की जरूरत की करें तो, अपने ही देश, समाज और घर परिवार में बेगाने होते जा रहे बुजुर्गों की स्थिति पर उच्चतम न्यायालय ने भी चिंता व्यक्त की है। शीर्ष अदालत ने दिसंबर, 2018 में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि बुजुर्गों के हितों की रक्षा के लिए 2007 में बनाए गए माता पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि राम नगरी अयोध्या में शर्मसार हुई मानवता- 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को संभवतः परिवार वाले लावारिस फेंककर भागे- सीसीटीवी में कैद, जोरदार छानबीन शुरू, भारत में बुजुर्गों का तिरस्कार कब खत्म होगा? राम जी हम शर्मिंदा है, अयोध्या में संभावित परिजनों द्वारा माँ को सड़क पर फेक भाग निकले- मां दम तोड़ गई, अयोध्या में परिवार द्वारा सड़क पर फेंकी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत- सीसीटीवी वीडियो देखकर देश का दिल पसीजा, मैं भी रो पड़ा।
(स्पष्टीकरण : इस आलेख में दिए गए विचार लेखक के हैं और इसे ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है।)
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