कोलकाता हिन्दी न्यूज | 20 अगस्त 2026: हावड़ा स्टेशन से सटे होटल और लॉज लगभग जतुगृह में तब्दील हो चुके हैं। कई जगहों पर रिहायशी मकानों का इस्तेमाल होटल के रूप में किया जा रहा है। संकरे कमरों में बाहर से आने वाले मेहमानों को ठहरने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
पुराने मकानों में जगह-जगह बिजली के कटे-फटे तार लटक रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
दमकल विभाग के अग्निशमन कानूनों की खुलेआम अनदेखी करते हुए हावड़ा स्टेशन के आसपास स्थित होटलों में धड़ल्ले से कारोबार चल रहा है। यहां छोटे-बड़े मिलाकर करीब 200 होटल हैं।
नियमों की अवहेलना
स्टेशन से सटे डब्सन लेन की एक पांच मंजिला इमारत की प्रत्येक मंजिल पर अलग-अलग लॉज या होटल संचालित हो रहे हैं। पहले यह रिहायशी मकान था, अब पूरी इमारत होटल बन चुकी है।
नियम बनाम हकीकत:
- सीढ़ियों की चौड़ाई नियम में 2.50 मीटर होनी चाहिए, लेकिन यहां एक मीटर भी नहीं है।
- पांच मंजिला इमारत में कम से कम दो निकास जरूरी, लेकिन यहां सिर्फ एक ही सीढ़ी है।
- छत पर 10,000 लीटर पानी का टैंक या अंडरग्राउंड रिजर्वायर होना चाहिए – यहां व्यवस्था नहीं।
- स्प्रिंकलर, होज पाइप और फायर अलार्म सिस्टम गायब।
कई छोटे लॉज और होटलों के पास दमकल विभाग का लाइसेंस तक नहीं है।
क्या कहता है दमकल विभाग?
दमकल विभाग का दावा है कि इन होटलों को समय-समय पर नोटिस दिया जाता है और जांच भी होती है। वहीं होटल कर्मचारियों का कहना है कि दमकलकर्मी निरीक्षण के लिए आते ही नहीं हैं।
तारापीठ और कोलकाता के होटलों में आग लगने की घटनाओं में कई लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में यदि हावड़ा स्टेशन से सटे होटलों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता है।
निष्कर्ष: हावड़ा स्टेशन के आसपास के होटल अग्निशमन सुरक्षा के मामले में बेहद असुरक्षित हैं। प्रशासन को तत्काल सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, वरना कोई बड़ा हादसा होने से पहले हालात नहीं सुधरेंगे।
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