Autism

हावड़ा में ऑटिज्म जागरूकता शिविर, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. इंदु सुराणा ने दी जानकारी

कोलकाता न्यूज डेस्क | 13 अप्रैल 2026: ऑटिज्म को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हावड़ा के एक निजी स्कूल में विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. इंदु सुराणा ने ऑटिज्म के बारे में विस्तार से जानकारी दी और आम गलतफहमियों को दूर करने पर जोर दिया।

ऑटिज्म क्या है?

डॉ. सुराणा ने बताया कि ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल विकार है। इसकी प्रमुख विशेषताएं सामाजिक संचार और पारस्परिक व्यवहार में कमी के रूप में सामने आती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोलने में देरी (speech delay) ऑटिज्म का सिर्फ एक लक्षण है, न कि पूरा विकार। कई माता-पिता इसी एक लक्षण को देखकर बच्चे को केवल “स्पीच प्रॉब्लम” मान लेते हैं, जो एक बड़ी गलतफहमी है।

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डॉ. सुराणा ने कहा, “ऑटिज्म में सामाजिक जुड़ाव, आँखों से संपर्क, नाम लेने पर प्रतिक्रिया न देना, दोहराव वाले व्यवहार और संवेदी संवेदनशीलता जैसे कई सूक्ष्म संकेत होते हैं। ये संकेत अक्सर 2 से 3 वर्ष की आयु से पहले दिखने लगते हैं, लेकिन माता-पिता इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।”

शुरुआती पहचान और हस्तक्षेप जरूरी

डॉ. सुराणा ने जोर देकर कहा कि अगर ऑटिज्म के शुरुआती संकेतों की पहचान 2-3 वर्ष की आयु से पहले कर ली जाए और बच्चे को न्यूरोडेवलपमेंटल पीडियाट्रिशियन के पास भेजा जाए, तो शुरुआती हस्तक्षेप (Early Intervention) से बच्चे के विकास में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

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उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों से अपील की कि वे शिशुओं के सामान्य विकासात्मक पड़ावों (milestones) के बारे में जागरूक रहें और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।

कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग

यह जागरूकता कार्यक्रम हावड़ा एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स और IAP चैप्टर ऑफ न्यूरोडेवलपमेंटल पेडियाट्रिक्स के बैनर तले आयोजित किया गया। मौके पर रामकृष्ण मिशन के स्वामी कृपाकरनानंद महाराज, शिक्षक, अभिभावक और क्षेत्र के कई चिकित्सक उपस्थित थे।

Autism Awareness Camp

डॉ. समीर दलवाई का योगदान

कार्यक्रम में डॉ. समीर दलवाई को विशेष रूप से सराहा गया, जिन्होंने ऑटिज्म और न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है।

मुख्य संदेश

डॉ. इंदु सुराणा ने अंत में कहा, “ऑटिज्म को केवल बोलने की समस्या मानने की बजाय उसके व्यापक पहलुओं को समझना और समय रहते कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। जागरूकता ही इस विकार से जुड़ी चुनौतियों का सबसे बड़ा हल है।”

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राज कुमार गुप्त पिछले 12+ वर्षों से सब-एडिटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन में काम कर रहे हैं। वे खबरों को सटीक और संतुलित रूप देने में विशेषज्ञ हैं। कोलकाता के स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ है।

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