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होम क्रेडिट के हाऊ इंडिया बॉरोज 2021 सर्वे से दिखी कंज्यूमर बॉरोइंग सेक्टर में सुधार की तस्वीर

  • एचआईबी सर्वे में घर की जरूरतें पूरी करने के लिए लोन में तेज गिरावट दिखी, 2020 के 85 प्रतिशत की तुलना में 2021 में यह मात्र 4 प्रतिशत रहा, जो ‘जरूरत पूरी करने के लिए कर्ज’ से ‘इच्छा पूरी करने के लिए कर्ज’ लेने की ओर बढ़ते रुझान की झलक दिखाता है
  • महामारी के बाद से कारोबारी जरूरत व सेट-अप, हाउस रेनोवेशन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीद के लिए लोन लेने के मामलों में तेजी देखी गई
  • लोन लेने वालों में करीब 40 प्रतिशत युवा हैं, जो भविष्य में लोन लेने के पारंपरिक ऑफलाइन चैनल के बजाय ऑनलाइन लोन के तरीकों को अपनाने के इच्छुक हैं
  • बेंगलुरु (67 प्रतिशत) और हैदराबाद (49 प्रतिशत) जैसे शहरों में सबसे ज्यादा लिया जा रहा है कर्ज, इनके बाद दिल्ली (42 प्रतिशत) और जयपुर (39 प्रतिशत) का स्थान

कोलकाता : यूरोप और एशिया में परिचालन कर रही अंतरराष्ट्रीय कंज्यूमर फाइनेंस प्रदाता की स्थानीय शाखा और भारत में वित्तीय समावेशन के लिए प्रतिबद्ध होम क्रेडिट इंडिया ने आज अपना वार्षिक सर्वेक्षण ‘हाऊ इंडिया बॉरोज’ (एचआईबी) जारी किया। एचआईबी 2021 में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बाद इस साल की तस्वीर को आंका गया है, जिसमें कंज्यूमर बॉरोइंग के मामले में सकारात्मक बदलाव दिखा है, जिससे यह पता चलता है कि स्थिति सामान्य हो रही है।

उपभोक्ताओं की अवधारणा सकारात्मक है और आर्थिक मोर्चे पर स्थिति बहाल होने का भरोसा है। इस अध्ययन में भारत में कर्ज लेने के पैटर्न और कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान व उसके बाद व्यक्तिगत स्तर पर लोगों के कर्ज लेने के कारणों को लेकर अहम जानकारी मिली है।

एचआईबी अध्ययन नौ शहरों दिल्ली, जयपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, भोपाल, मुंबई, कोलकाता, पटना और रांची में किया गया। इसका सैंपल साइज 1200 से ज्यादा प्रतिभागियों (होम क्रेडिट के ग्राहक) का था, जिनकी उम्र 21 से 45 साल और आय 30 हजार रुपये मासिक से कम थी।

इस शोध रिपोर्ट में सामने आया कि घर की जरूरतें पूरी करने के लिए लिया जाने वाला कर्ज पिछले साल के 85 प्रतिशत की तुलना में 2021 में मात्र 4 प्रतिशत रहा, जो ‘बहुत जरूरत पड़ने पर कर्ज’ से ‘कोई इच्छा पूरी करने के लिए कर्ज’ लेने की ओर लोगों के रुझान में आए तेज बदलाव की झलक दिखाता है। कारोबार सेट-अप करने या विस्तार करने के लिए कर्ज लेने के मामले में तेज उछाल (28 प्रतिशत) आया है। इसके बाद कुल कर्ज में 26 प्रतिशत के साथ कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए छोटे लोन या क्रेडिट के मामले हैं।

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अन्य में हाउस रेनोवेशन/नया कंस्ट्रक्शन (13 प्रतिशत), मेडिकल इमरजेंसी (2 प्रतिशत), वाहन लोन (9 प्रतिशत), शादी (3 प्रतिशत), शिक्षा लोन (2 प्रतिशत), निवेश और पुराना लोन चुकाने के लिए (1 प्रतिशत) लिए गए लोन शामिल रहे। सर्वेक्षण में 2020 की तुलना में कर्ज में 50 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई, हालांकि घर चलाने के लिए लोन में गिरावट आई।

डिजिटल सशक्तीकरण को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखा। एचआईबी रिपोर्ट में सामने आया कि करीब 40 प्रतिशत कर्जदार पारंपरिक ऑफलाइन तरीके से लोन के बजाय लोन लेने का डिजिटल तरीका अपनाने के इच्छुक हैं। अभी 15 प्रतिशत से कुछ ज्यादा लोग ऑनलाइन तरीके से लोन ले रहे हैं। टेक्नोलॉजी मददगार साबित हुई है। सर्वे के मुताबिक, डिजिटल ट्रेंड, चैटबोट को लेकर सहजता और इन पर भरोसा बढ़ा है। इस मामले में युवा ग्राहक आगे हैं।

सर्वेक्षण के बारे में होम क्रेडिट इंडिया के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर श्री विवेक कुमार सिन्हा ने कहा, ‘कंज्यूमर बॉरोइंग ट्रेंड को लेकर इन-हाउस वार्षिक अध्ययन हाऊ इंडिया बॉरोज 2021 में सकारात्मक संकेत दिखे हैं। लोग 2020 में महामारी के कारण हुए नुकसान से उबर रहे हैं। लोगों का यह जज्बा बिजनेस लोन, हाउस रेनोवेशन और अन्य सकारात्मक कारणों से कर्ज लेने के मामलों में वृद्धि से स्पष्ट रूप से दिख रहा है। 2020 में घर एवं परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए लोग ज्यादा लोन ले रहे थे।

महामारी के कारण डिजिटल तरीके से लोन लेने के मामले भी बढ़े हैं और बहुत से उपभोक्ता भविष्य में ऑनलाइन माध्यम से लोन लेने के इच्छुक हैं। इससे वित्तीय सेवाओं में डिजिटल सशक्तीकरण भी बढ़ा है, साथ ही वित्तीय साक्षरता भी बढ़ रही है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘होम क्रेडिट अपने सभी बाजारों, विशेष रूप से भारत में वित्तीय समावेशन और क्रेडिट की पहुंच बढ़ाते हुए लोगों के जीवन को सशक्त बनाने में विश्वास करती है और एचआईबी अध्ययन कर्ज लेने के मामले लोगों के व्यवहार में बदलाव को सामने लाता है, जिससे उन्हें सही तरह से सहयोग मिल पाता है।

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इससे क्रेडिट की पहुंच बढ़ती है, आय बढ़ाने के लिए वित्तीय कर्ज संभव होता है और जीवनस्तर सुधारने में मदद मिलती है।’ कई लोगों को नौकरी गंवाने या वेतन में कटौती जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है, जिससे इस साल कारोबार विस्तार की दिशा में कर्ज लेने के मामले बढ़े हैं। क्षेत्र के हिसाब से सर्वे में सामने आया कि बेंगलुरु और हैदराबाद महामारी से ज्यादा तेजी से बाहर आए हैं। हैदराबाद में 41 प्रतिशत लोगों ने कारोबार को पुन: गति देने और बेंगलुरु में 42 प्रतिशत लोगों ने कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लोन लिया है।

24 और 29 प्रतिशत के साथ क्रमश: बिहार एवं झारखंड में इंटरनेट प्रयोग करने वाले सबसे हैं। यहां मोबाइल फोन प्रयोग करने के आधार पर डिजिटल साक्षरता पटना व रांची में क्रमश: 64 और 65 प्रतिशत है। शोध में यह भी सामने आया कि जयपुर जैसे शहरों की तुलना में कोलकाता और दिल्ली में लोन लेने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। प्रतिभागियों ने माना कि आसान उपलब्धता और वित्तीय व डिजिटल साक्षरता को लेकर मार्गदर्शन से यह सुनिश्चित होगा कि लोन लेने की उनकी प्रक्रिया बिना मुश्किल के पूरी हो।

होम क्रेडिट इंडिया के बारे में :
होम क्रेडिट इंडिया फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड यूरोप और एशिया के देशों में परिचालन कर रही अंतरराष्ट्रीय कंज्यूमर फाइनेंस प्रदाता होम क्रेडिट की स्थानीय शाखा है, जो भारत में वित्तीय समावेशन बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ संचालित हो रही है। आसान, पारदर्शी और सबकी पहुंच में आने वाले वित्तीय समाधानों के जरिये क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने और वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए कंपनी प्रतिबद्ध है। होम क्रेडिट इंडिया के पास 7,000 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम है और 2012 में शुरुआत के समय से ही कंपनी लगातार अपने परिचालन में विस्तार कर रही है।

इस समय भारत के 625 से ज्यादा शहरों में कंपनी परिचालन कर रही है। कंपनी के पास करीब 53,000 पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) का मजबूत नेटवर्क है और इसका ग्राहक आधार करीब 1.32 करोड़ तक पहुंच चुका है। अहम बाजारों में देशभर में विस्तार, शानदार ग्राहक अनुभव के साथ विविधिकृत व इनोवेटिव प्रोडक्ट के जरिये कंपनी ने यह ग्राहक आधार बनाने में सफलता हासिल की है।

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