कोलकाता। केंद्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, बहरमपुर (नराकास अध्यक्ष कार्यालय) द्वारा सदस्य कार्यालयों हेतु आयोजित हिंदी कार्यशाला सह जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ। “राजभाषा नीति एवं निर्देशों का अनुपालन तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण” विषय पर दिनांक 20.06.2025 को केंद्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, बहरमपुर (नराकास अध्यक्ष कार्यालय) द्वारा हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में व्याख्यान देने हेतु विशेषज्ञ के रूप में जगतदल श्री हरि उच्च विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक डॉ. कार्तिक कुमार साव को आमंत्रित किया गया। कार्यशाला के प्रारंभ में संस्थान के निदेशक डॉ. एम. महेश्वरी ने मुख्य अतिथि सहित उपस्थित डॉ. के. राहुल, एल. येल्लप्पा राव, खुसरो आलम तथा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का स्वागत किया।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि नियमित कार्यशाला के आयोजन से महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा-परिचर्चा, विचार-विमर्श द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन को गति मिलती है, साथ ही सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को विषय पर नवीनतम एवं ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त होती है। उन्होंने सभी कार्मिकों से अपील किया कि कार्यशाला में पूर्ण सहयोग एवं इससे प्रेरणा प्राप्त करते हुए कार्यालय में राजभाषा के प्रगामी प्रयोग को गति प्रदान करें।
उक्त हिंदी कार्यशाला सह जागरूकता कार्यक्रम में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बहरमपुर के सदस्य कार्यालयों यथा पी.एम. श्री केंद्रीय विद्यालय, पंजाब नेशनल बैंक, नेशनल इंस्योरेंस कोर्पोरेशन ऑफ इंडिया एवं केंद्रीय जल आयोग, बहरमपुर की प्रतिभागिता सराहनीय रही है।
डॉ. कार्तिक कुमार साव ने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संदर्भित विषय राजभाषा नीति एवं निर्देशों का अनुपालन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि पूरे भारत राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने के लिए सर्वाधिक व्यवहारपरक भाषा “हिंदी” ही हो सकती थी।
अतः संविधान सभा द्वारा 26 जनवरी, 1950 को हिंदी को संघ की राजभाषा एवं इसकी लिपि देवनागरी को अंगीकार किया गया। उन्होंने बताया कि संविधान लागू होने के दिन से 15 वर्ष तक अंग्रेजी भाषा यथावत हिंदी के प्रयाय रूप में सरकारी कामकाज में व्यवहार में रहेंगी, जब तक कि हिंदी पूर्ण विकसित भाषा के रूप में अपने आप को स्थापित नहीं कर लेती है।
तथापि 15 वर्ष के पश्चात राजभाषा के प्रावधानों में विविध संशोधन किए गए यथा राजभाषा अधिनियम 1963 जिसे 26 जनवरी,1965 से प्रभाव में लाया गया। इसी क्रम में राजभाषा अधिनियम 1976 को लागू किया गया, जिसमें कुल 12 प्रावधान बनाए गए।
यथा संक्षिप्त नाम एवं पदनाम, हिंदी ज्ञान का स्तर, कार्यालय को राजभाषा के अंतर्गत अधिसूचित किया जाना एवं राजभाषा अनुपालन का उत्तरदायित्व आदि का उल्लेख मिलता है। उन्होंने विषय से संदर्भित “हिंदी वर्तनी के मानकीकरण” पर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अभ्यास के द्वारा मानक वर्तनी की रूप-रेखा पर प्रकाश डाला।
अंत में डॉ. के. राहुल द्वारा अतिथि वक्ता डॉ. कार्तिक कुमार साव एवं निदेशक डॉ. एम. माहेश्वरी सहित उपस्थित एल. येल्लप्पा राव, डॉ. खुसरो आलम, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बहरमपुर के सदस्य कार्यालय से उपस्थित सह कर्मियों तथा केरेउअवप्रसं.
बहरमपुर के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग एवं महेश साव द्वारा मंच संचालन के कार्य से हिंदी कार्यशाला सह जागरूकता कार्यक्रम को सफलता पूर्वक सम्पन्न की गई।
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