कार्यक्रम खादी और ग्रामोद्योग आयोग, भारत सरकार एवं रामकृष्ण मिशन आवासीय महाविद्यालय, नरेन्द्रपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया था
हिंदी समावेशी और संवादधर्मी भाषा है – डॉ. बिक्रम कुमार साव
कोलकाता। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में खादी और ग्रामोद्योग आयोग, भारत सरकार एवं हिंदी विभाग, रामकृष्ण मिशन रेसिडेंशियल कॉलेज, नरेंद्रपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक 23 सितंबर, 2026 को विद्यार्थियों के लिए ‘हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता’ और परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि विकसित करना, काव्य-पाठ की अभिव्यक्ति-कला को प्रोत्साहित करना तथा उनकी रचनात्मक एवं भाषिक प्रतिभा को मंच प्रदान करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ| स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य स्वामी एकचित्तानंद महाराज ने भाषा के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को भाषाई संवेदनशीलता पर सम्यक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न कवियों की रचनाओं के साथ-साथ अपनी स्वरचित कविताओं का भी प्रभावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया। कविता-पाठ के दौरान विद्यार्थियों ने स्वर, लय, भावाभिव्यक्ति तथा उच्चारण के माध्यम से प्रस्तुत रचनाओं के भाव-पक्ष को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के दूसरे भाग में अतिथि वक्ता के रूप में बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेन्द्रनाथ कॉलेज, हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बिक्रम कुमार साव ने “वर्तमान परिदृश्य और हिंदी की प्रकृति” विषय पर अपना सारगर्भित वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि, “हिंदी सभी भारतीय भाषाओं के लिए सेतु का कार्य करती है। हिंदी का किसी भाषा के साथ बैर नहीं है बल्कि हिंदी सभी भाषाओं को आत्मसात कर उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
”वर्तमान परिदृश्य में हिंदी केवल भाव नहीं, बाजार, तकनीक और रोजगार की भाषा बन गई है। इसकी प्रकृति समावेशी, लचीली और संवादधर्मी है। यह संस्कृत की गरिमा, उर्दू की नजाकत और लोक की मिठास को साथ लेकर चलती है। इसलिए हिंदी संघर्ष नहीं, समन्वय की भाषा है। वैश्वीकरण के दौर में भी यह अपनी जड़ों से जुड़ी रहकर भारतीय संस्कृति की वाहक बनी हुई है।
इसके अतिरिक्त वे काव्य-पाठ प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका में रहें। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के राजभाषा अधिकारी प्रभु प्रसाद यादव ने ‘कार्यालयीन हिंदी’ पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। उन्होंने कार्यालयीन हिंदी और आम जन मानस की हिंदी के बीच की खाई को दूर करने का सुझाव देते हुए कहा कि- “जहां तक हो सके सामान्य बोलचाल वाली हिंदी में भी कार्यालयीन हिंदी का कार्य हो सकता है जिससे कार्यालयीन हिंदी को और अधिक संप्रेषणीय बनाया जा सके|”
महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरदीप साव ने कार्यक्रम का सुचारू रूप से संचालन किया। हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि, “हिंदी दिवस केवल हिंदी भाषा के उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि भाषाई विविधता, भारतीय संस्कृति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्त्व को समझने का अवसर है।”
कार्यक्रम में लाइफ साइंस विभाग के अध्यक्ष डॉ. उत्तम कुमार माजी ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम में अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतिभागियों के अतिरिक्त स्किल इन्हान्समेंट कोर्स (स्पोकन हिंदी) और एबिलिटी एनहांसमेंट कोर्स (हिंदी) के विद्यार्थी दर्शक दीर्घा में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के तीसरे भाग में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से आए प्रभु प्रसाद यादव ने सेवा दिवस के अवसर पर स्वच्छता-शपथ दिलाया जिसमें सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसके साथ ही स्वच्छता के लिए श्रम दान के महत्व पर अपने विचार रखा।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान खिलेश कुमार नुरेटी, द्वितीय स्थान- वेदांत चट्टोपाध्याय, एवं तृतीय स्थान-श्याम सुन्दर दास अधिकारी ने प्राप्त किया। सभी विजेताओं को महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अतिथि गणमान्यों द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् गीत के गायन से हुआ।
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