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‘हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष’ विषय पर राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन

कोलकाता, 10 फरवरी 2026: नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), कोलकाता के तत्वावधान में भारतीय खाद्य निगम, क्षेत्रीय कार्यालय, कोलकाता द्वारा ‘हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष’ विषय पर एक राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम 9 फरवरी 2026 को संपन्न हुआ और इसमें राजभाषा कार्यान्वयन से जुड़े विभिन्न कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट वक्ता

  • मुख्य अतिथि: डॉ. विचित्र सेनगुप्त, उप निदेशक (कार्यान्वयन), क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग उन्होंने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में उसके योगदान पर प्रकाश डाला तथा कहा कि “स्वतंत्रता का श्रेय अधिकतर पत्रकारों को भी दिया जाना चाहिए।”
  • विशिष्ट वक्ता: जीतेन्द्र जितांशु, संस्थापक एवं संपादक ‘सदीनामा’ उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक यात्रा, सामाजिक दायित्व और वर्तमान परिदृश्य पर विस्तृत विचार रखे। श्रोताओं को हिंदी पत्रकारिता के कई अनसुने पहलुओं से वाकिफ कराया और संभावित भविष्य पर सकारात्मक दृष्टि प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि “पत्रकारिता एक उत्कृष्ट नजरिए से हम सब के समक्ष उपस्थित होकर सामने आएगी।”

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

  • शुभारंभ: दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
  • महाप्रबंधक का संबोधन: महाप्रबंधक (क्षेत्र) श्री अमरेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए हिंदी पत्रकारिता के लोकतांत्रिक मूल्यों एवं जनसरोकारों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “पाठकों पर भरोसा है, यही पत्रकारिता की ताकत है।”
  • सदीनामा पत्रिका वितरण: श्री जीतेन्द्र जितांशु ने सभी प्रतिभागियों को ‘सदीनामा’ पत्रिका की प्रतियां स्मारिका के रूप में वितरित कीं।
  • खुले मंच पर प्रश्नोत्तरी: दूसरे सत्र में राजभाषा संबंधी प्रश्न श्री राजेश साव, प्रबंधक (राजभाषा), कोल इंडिया एवं सदस्य सह सचिव, नराकास द्वारा पूछे गए। इस सत्र ने प्रतिभागियों में विशेष रुचि और संवाद को प्रोत्साहित किया।
  • संचालन: पूरे कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन श्रीमती रीना पाण्डेय, प्रबंधक (राजभाषा) द्वारा किया गया।

आयोजन का महत्व

यह संगोष्ठी हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई थी। इसमें हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक, सामाजिक और वर्तमान योगदान पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इसे राजभाषा के प्रचार-प्रसार और जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

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