हिंदी हमारी रोज़मर्रा की भाषा है, लेकिन लिखते समय हम अक्सर ऐसी छोटी-छोटी गलतियाँ कर बैठते हैं जो लेख की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित करती हैं। अख़बार, वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट या सरकारी पत्र—हर जगह ये गलतियाँ दिख जाती हैं।
इस लेख में हम हिंदी लेखन की 10 सबसे आम गलतियों को उदाहरणों के साथ समझेंगे, ताकि अगली बार आप इन्हें आसानी से सुधार सकें।
1️⃣ कृपया / कृप्या की गलती
❌ कृप्या ध्यान दें
✅ कृपया ध्यान दें

- सही शब्द: कृपया
- “कृप्या” शब्द हिंदी में मान्य नहीं है, लेकिन बोलचाल के असर से यह लिख दिया जाता है।
2️⃣ वजह से / के कारण का गलत प्रयोग
❌ बारिश के कारण से मैच रद्द हुआ
✅ बारिश के कारण मैच रद्द हुआ
✅ बारिश की वजह से मैच रद्द हुआ
- “कारण” और “वजह” दोनों के साथ ‘से’ एक साथ नहीं आता।
3️⃣ ही / हीं / हीँ की उलझन
❌ वहीँ बात खत्म हो गई
✅ वहीं बात खत्म हो गई
-
ही → ज़ोर देने के लिए
-
हीं / हीँ → अलग शब्द नहीं, ग़लत प्रयोग
4️⃣ है / हैं का गलत इस्तेमाल
❌ लोग परेशान है
✅ लोग परेशान हैं
-
एकवचन → है
-
बहुवचन → हैं
यह गलती ख़ासकर खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट में बहुत दिखती है।
5️⃣ में / मैं का भ्रम
❌ मैं दिल्ली में रहता हूँ (✔ सही)
❌ इस खबर मैं बताया गया है (❌)
✅ इस खबर में बताया गया है
“में” स्थान या स्थिति बताता है
“मैं” स्वयं के लिए होता है
6️⃣ विराम चिह्नों की अनदेखी
❌ क्या आप आएंगे
✅ क्या आप आएंगे?
❌ यह बहुत जरूरी है ध्यान दें
✅ यह बहुत ज़रूरी है, ध्यान दें।
गलत या न होने वाले विराम चिह्न लेख को अधूरा और भ्रमित बनाते हैं।
7️⃣ अंग्रेज़ी शब्दों का अनावश्यक प्रयोग
❌ सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया
✅ सरकार ने एक अधिसूचना जारी की
हर जगह अंग्रेज़ी शब्द डालना न तो लेख को आधुनिक बनाता है, न प्रभावी।
8️⃣ कठिन संस्कृतनिष्ठ शब्दों की भरमार
❌ उक्त विषयक प्रकरण के संदर्भ में अवगत कराना है
✅ इस विषय के संबंध में जानकारी देना है
सरल हिंदी ज़्यादा पाठक-अनुकूल होती है।
9️⃣ मुहावरों का ग़लत अर्थ में प्रयोग
❌ उसने आग में घी डालकर मामला शांत किया
✅ उसने आग में घी डालकर मामला बिगाड़ दिया
मुहावरे अर्थ के साथ आते हैं, मनमाने ढंग से नहीं।
🔟 एक ही बात को बार-बार दोहराना
❌ यह घटना बहुत गंभीर है। यह घटना सच में गंभीर है।
✅ यह घटना बेहद गंभीर है।
दोहराव लेख को लंबा तो बनाता है, लेकिन असर कम कर देता है।
✍️ निष्कर्ष
अच्छा हिंदी लेखन कठिन नियमों से नहीं, सजग अभ्यास से आता है। अगर हम इन आम गलतियों पर ध्यान दें, तो हमारी भाषा ज़्यादा स्पष्ट, भरोसेमंद और प्रभावशाली बन सकती है।
यह लेख हिंदी भाषा और पत्रकारिता में रुचि रखने वाले लेखक द्वारा तैयार किया गया है, जो सरल और शुद्ध हिंदी के प्रचार को आवश्यक मानते हैं।
👉 इसी तरह के लेख पढ़ने के लिए “हिंदी की पाठशाला” श्रेणी देखते रहें।
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