- ‘टेक नेक’ और गलत पोस्चर से युवाओं में तेजी से बढ़ रही रीढ़ की समस्याएं
हेल्थ डेस्क, कोलकाता | 30 दिसंबर 2025: डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी ज़िंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी बढ़ती निर्भरता अब सेहत के लिए गंभीर खतरे की घंटी बनती जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने की आदत से गर्दन, कंधे और कमर दर्द के साथ-साथ स्पॉन्डिलाइटिस जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
क्या है ‘टेक नेक’ या स्मार्टफोन सिंड्रोम?
चिकित्सकों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक झुककर मोबाइल फोन देखता है, तो रीढ़ की हड्डी पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है। इसी स्थिति को टेक नेक या स्मार्टफोन सिंड्रोम कहा जाता है।

इससे गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों में सूजन और समय के साथ रीढ़ से जुड़ी स्थायी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहा स्पॉन्डिलाइटिस
स्पॉन्डिलाइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में सूजन आ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल फोन का लगातार और गलत मुद्रा में इस्तेमाल इस बीमारी को बढ़ावा दे रहा है।
खासकर युवा और किशोर वर्ग, जो घंटों मोबाइल पर गेम खेलते हैं, वीडियो देखते हैं या सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, वे इस खतरे की जद में सबसे ज़्यादा हैं।
आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) आंखों की रेटिना को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखना, सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
इसके अलावा, लगातार नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया की तुलना और ऑनलाइन दबाव तनाव, चिंता और नींद की कमी का कारण बन रहे हैं, जो अंततः शारीरिक थकान और मांसपेशियों की रिकवरी को प्रभावित करते हैं।

कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
विशेषज्ञों की सलाह है कि—
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मोबाइल स्क्रीन को आंखों की सीध में रखें
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हर 30–40 मिनट में ब्रेक और स्ट्रेचिंग करें
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बैठते समय पीठ सीधी और कंधे ढीले रखें
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नीली रोशनी कम करने वाले स्क्रीन फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल करें
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सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल से दूरी बनाएं
डॉक्टरों का मानना है कि सही पोस्चर और संतुलित स्क्रीन टाइम अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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