कोलकाता हिन्दी न्यूज | 27 जुलाई 2026: भारत में हेड एंड नेक कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञों ने इलाज के बाद भी सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया है। विश्व हेड एंड नेक कैंसर दिवस के अवसर पर एसएसओ हॉस्पिटल के हेड एंड नेक कैंसर सर्जन डॉ. अमित चक्रवर्ती ने बताया कि इलाज करा चुके मरीजों में कैंसर दोबारा होने की आशंका बनी रहती है, इसलिए नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है।
दोबारा होने का खतरा
डॉ. अमित चक्रवर्ती कहते हैं: “हेड एंड नेक कैंसर का इलाज करा चुके हर 100 मरीजों में से 20 से 40 मरीजों में कैंसर दोबारा हो सकता है। लेकिन समय पर पहचान और नियमित फॉलो-अप से इसका सफल इलाज संभव है।”
मरीजों के अनुभव
43 वर्षीय मिहिर जोबनपुत्रा और 70 वर्षीय दिनकर आढाव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय पर जांच और सर्जरी के कारण वे आज स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
दोनों ने लोगों से तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहने तथा मुंह में अल्सर, सफेद दाग या किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील की।
प्रमुख कारण और अस्पताल की पहल
विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू, गुटखा, सुपारी, शराब और एचपीवी संक्रमण हेड एंड नेक कैंसर के प्रमुख कारण हैं।
एसएसओ हॉस्पिटल जल्द ही हेड एंड नेक कैंसर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने जा रहा है, जहां जांच, सर्जरी, रिकंस्ट्रक्टिव उपचार, रेडिएशन, पुनर्वास और फॉलो-अप जैसी सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
निष्कर्ष: हेड एंड नेक कैंसर के इलाज के बाद भी नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। तंबाकू और गुटखा जैसे जोखिम कारकों से दूर रहकर तथा शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देकर इस बीमारी से बचाव संभव है।


