प्रयागराज | 26 अगस्त 2025 — भाद्रपद शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर हरतालिका तीज का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। संगम नगरी प्रयागराज में सुहागिन महिलाओं ने ब्रह्म मुहूर्त से ही गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई और निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
- 🌸 व्रत की महत्ता
हरतालिका तीज व्रत को अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और रात्रि में प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
📍 संगम पर दृश्य
- सुबह 4 बजे से ही संगम तट पर महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी
- पारंपरिक परिधान, सोलह श्रृंगार और पूजा की थालियों के साथ महिलाएं गंगा स्नान के लिए पहुंचीं
- स्नान के बाद महिलाओं ने गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक किया और फल-फूल अर्पित किए
- कई महिलाओं ने तेज गीतों और भजन के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं
स्थानीय निवासी विनिता पांडे ने बताया, “हरतालिका तीज का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन गंगा स्नान करने से पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।”
🧘♀️ चार दिवसीय उपवास का आरंभ
इस वर्ष हरतालिका तीज के साथ ही चार दिवसीय धार्मिक उपवास श्रृंखला शुरू हुई है:
- 25 अगस्त: सोमवार व्रत
- 26 अगस्त: हरतालिका तीज
- 27 अगस्त: गणेश चतुर्थी
- 28 अगस्त: ऋषि पंचमी
वहीं, अर्चना श्रीवास्तव ने कहा, “आज मैंने भोले बाबा और गंगा मईया से अपने पति, परिवार और अखंड सुहाग की प्रार्थना की। इस दिन का विशेष महत्व है, और गंगा स्नान से मन को शांति मिलती है।”
यह क्रम महिलाओं की धार्मिक शक्ति, धैर्य और समर्पण का प्रतीक बन गया है।
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