अशोक वर्मा, हुगली। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं और मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा की जा रही है।
इसी बीच कुछ ऐसे चेहरे भी सामने आ रहे हैं, जो योजनाओं से अधिक अपने जमीनी कार्य, आंदोलनों और जनता से सीधे जुड़ाव के कारण चर्चा में हैं। ऐसा ही एक नाम इन दिनों 187 विधानसभा क्षेत्र चांपदानी में लगातार सुर्खियों में है – हरि मिश्रा का।
क्षेत्र में सामाजिक और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर उनके द्वारा किए जा रहे आंदोलनों ने उन्हें आम जनता के बीच एक अलग पहचान दिलाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरि मिश्रा केवल चुनावी समय में नहीं, बल्कि लगातार जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाते रहे हैं।

चांपदानी क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं को लेकर उनके हस्तक्षेप और सक्रियता ने उन्हें एक प्रतिबद्ध जननेता के रूप में स्थापित किया है।
यही कारण है कि आज 187 चांपदानी विधानसभा क्षेत्र में संभावित उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम आगे चल रहा है और राजनीतिक गलियारों में भी उनकी दावेदारी को गंभीरता से देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी उम्मीदवार की स्वीकार्यता जनता के बीच उसके काम के आधार पर बनती है, तो हरि मिश्रा इस कसौटी पर खरे उतरते दिखाई देते हैं।
हालांकि, अभी औपचारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन जिस तरह से उनका जनसंपर्क और आंदोलनात्मक राजनीति आगे बढ़ रही है, इससे उन्हें चांपदानी की राजनीति में एक मजबूत संभावित उम्मीदवार के रूप में स्थापित कर दिया है।
आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इस उभरते जनाधार को किस तरह देखते हैं और चुनावी समीकरण किस दिशा में जाते हैं। फिलहाल, चांपदानी की जनता के बीच हरि मिश्रा का नाम उम्मीद और विकल्प के रूप में तेजी से चर्चा में है।
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