हल्दिया (पश्चिम बंगाल), 8 जनवरी 2026: भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक अड्डा तैयार कर रही है। सूत्रों ने बताया कि यह सुविधा हल्दिया पोर्ट अथॉरिटी के सहयोग से बनाई जा रही है।
शुरुआती चरण में यहां फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) और फास्ट अटैक क्राफ्ट (FAC) जैसे छोटे व तेज जहाजों की तैनाती की जाएगी, जो तटीय सुरक्षा, घुसपैठ रोधी अभियान और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आदर्श हैं।
हल्दिया अड्डे की खासियतें
- विशेष जेटी का निर्माण: छोटे जहाजों को आसानी से डॉक करने के लिए।
- व्यापारिक बंदरगाह के साथ समन्वय: हल्दिया एक व्यस्त कमर्शियल पोर्ट है। नौसैनिक युद्धपोतों की आवाजाही को वाणिज्यिक जहाजों के साथ सुचारू रूप से चलाने के लिए पोर्ट अथॉरिटी के साथ तालमेल किया जा रहा है।
- तेजी से पहुंच: कोलकाता से हुगली नदी की लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। आपात स्थिति में जहाज तेजी से समुद्र में पहुंच सकेंगे।
- सामरिक महत्व: बंगाल की खाड़ी में चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश की बढ़ती गतिविधियों पर करीबी नजर रखने में मदद मिलेगी।
सूत्रों ने बताया कि पहले चरण में हल्दिया में एक समर्पित जेटी का निर्माण किया जा रहा है, ताकि छोटे युद्धपोतों को आसानी से डॉक किया जा सके।

हल्दिया एक व्यस्त वाणिज्यिक बंदरगाह है, ऐसे में नौसैनिक और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने के लिए पोर्ट अथॉरिटी के साथ समन्वय किया जा रहा है। नौसेना पहले से ही चेन्नई, तूतीकोरिन और मंगलोर जैसे नागरिक बंदरगाहों पर इसी तरह के मॉडल के तहत काम कर रही है।
बंगाल की खाड़ी में भारत का बढ़ेगा दबदबा
हाल के वर्षों में चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी और पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच गहराते रक्षा संबंधों ने भारत की सामरिक चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में हल्दिया में नौसैनिक अड्डा बनने से भारत को इस त्रिकोण की गतिविधियों पर करीबी निगरानी रखने में मदद मिलेगी।
इस अड्डे के चालू होने से नौसेना के जहाजों को कोलकाता से हुगली नदी की लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में वे तेज़ी से खुले समुद्र में तैनात हो सकेंगे। इससे पूर्वी समुद्र तट पर भारत की ऑपरेशनल क्षमता और मजबूत होगी।
दक्षिण-पूर्व एशिया रवाना होगा नौसेना का प्रशिक्षण बेड़ा
इसी बीच, भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वॉड्रन दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा पर रवाना होने जा रहा है। इस बेड़े में—
- आईएनएस तीर
- आईएनएस शार्दूल
- आईएनएस सुजाता
- आईसीजीएस सारथी
शामिल हैं। ये युद्धपोत सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड का दौरा करेंगे।
110वें IOTC का हिस्सा है यह अभियान
नौसेना के अनुसार यह यात्रा 110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (IOTC) का हिस्सा है। इसका उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को अंतरराष्ट्रीय अनुभव, समुद्री अभ्यास और सांस्कृतिक प्रशिक्षण देना है। इस कोर्स में छह अंतरराष्ट्रीय अधिकारी प्रशिक्षु, साथ ही सेना और वायुसेना के जवान भी शामिल हैं।
एक्ट ईस्ट नीति को मिलेगी मजबूती
दक्षिण-पूर्व एशिया में नौसेना की बढ़ती सक्रियता को चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है। यह पहल भारत की एक्ट ईस्ट नीति और स्वतंत्र, खुले एवं समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र की अवधारणा को मजबूती देती है।
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