अनिल बेदाग, मुंबई | 8 नवंबर 2025 | आगामी फिल्म ‘हाय जिंदगी’ अब सिर्फ एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं रही — इसकी थीम ने दिल्ली हाईकोर्ट के दरवाज़े तक दस्तक दे दी है।
फिल्म में उठाए गए मुद्दे को लेकर बलात्कार के प्रावधान (बीएनएस धारा 63) को जेंडर न्यूट्रल बनाने की मांग पर जनहित याचिका दायर की गई है।
यह याचिका 29 अक्टूबर 2025 को सूचीबद्ध हुई थी और इसे पहले से लंबित याचिका WP(CRL) 3274/2025 से जोड़ दिया गया है।

⚖️ अदालत की प्रतिक्रिया:
- अदालत ने इसी विषय पर ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है
- याचिका में मांग की गई है कि बलात्कार कानून में लैंगिक तटस्थता लाई जाए
- याचिकाकर्ता का तर्क है कि पुरुष और ट्रांसजेंडर भी यौन उत्पीड़न के शिकार हो सकते हैं, लेकिन कानून में उनके लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है
निर्माता सुनील कुमार अग्रवाल और निर्देशक अजय राम ने फिल्म के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश की है कि पुरुष भी यौन उत्पीड़न और बलात्कार के शिकार हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान कानून में उनके लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है।
🎥 फिल्म ‘हाय जिंदगी’ की पृष्ठभूमि:
- रिलीज़ डेट: 14 नवंबर 2025
- निर्माता: सुनील कुमार अग्रवाल
- निर्देशक: अजय राम
- मुख्य कलाकार: गौरव सिंह, गरिमा सिंह, आयुशी तिवारी, सोमी श्री, दीपांशी, ऋषभ शर्मा
- शूटिंग लोकेशन: मथुरा, उत्तर प्रदेश
- थीम:
– पुरुषों और ट्रांसजेंडरों के यौन उत्पीड़न पर ध्यान केंद्रित
– वर्तमान कानून की सीमाओं को उजागर करना
– समान न्याय की मांग — कानून को समय के साथ लैंगिक रूप से तटस्थ बनाना
निर्देशक अजय राम ने कहा — “हमने फिल्म के ज़रिए एक ऐसा सवाल उठाया है जो समाज में दबा हुआ है। अगर महिला पीड़िता हो सकती है, तो पुरुष या ट्रांसजेंडर क्यों नहीं?”
🧠 सामाजिक और कानूनी बहस:
- भारत में बलात्कार कानून अभी भी महिला केंद्रित हैं
- कई विशेषज्ञों का मानना है कि जेंडर न्यूट्रल कानून समय की मांग है
- फिल्म ने इस बहस को जनता और न्यायपालिका दोनों के बीच ला दिया है
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